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वित्त मंत्री की अध्यक्षता में 22वीं वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद की बैठक आयोजित की गयी

28 मई, 2020 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद की बैठक की अध्यक्षता की।

मुख्य बिंदु

इस बैठक ने वर्तमान घरेलू और वैश्विक आर्थिक स्थिति, वित्तीय कमजोरियों के मुद्दों, सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों की तरलता, गैर-बैंकिंग वित्तीय निगमों, नियामक प्रतिक्रियाओं आदि की समीक्षा की गयी। परिषद ने कहा कि COVID-19 ने वैश्विक वित्तीय प्रणाली के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न किया है, और इससे उभरने का समय अनिश्चित है।

वित्तीय स्थिरता व विकास परिषद

वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद भारत सरकार द्वारा गठित एक सर्वोच्च निकाय है। 2008 में रघुराम राजन समिति द्वारा इस विचार को प्रस्तुत किया गया था। इस परिषद की स्थापना 2010 में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा की गई थी।

RBI के गवर्नर, मुख्य आर्थिक सलाहकार, सचिव, SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड), IRDA (बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण), PFRDA (पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण), IBBI  के चेयरमैन इस परिषद् में शामिल होते हैं। वित्त मंत्री इसकी बैठक की अध्यक्षता करते हैं।

परिषद के कार्य

यह परिषद वित्तीय क्षेत्र के विकास, वित्तीय स्थिरता, अंतर-नियामक समन्वय, वित्तीय समावेशन, वित्तीय साक्षरता जैसे मुद्दों से संबंधित है।

इनके अलावा, यह परिषद् भारत के अंतर्राष्ट्रीय इंटरफेस जैसे कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के साथ भी समन्वय करती है। वित्त मंत्री के पास समय-समय पर परिषद के कार्यों को बदलने की शक्तियां होती हैं। वर्तमान में, यह परिषद COVID-19 द्वारा प्रस्तुत किये गये वित्तीय मुद्दों से निपटने के लिए काम कर रही है।

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भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण की स्थापना की

भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण की स्थापना की है। इस प्राधिकरण का मुख्यालय गुजरात के गांधीनगर में स्थापित किया जायेगा।

मुख्य बिंदु

इस प्राधिकरण की स्थापना एक अधिसूचना के माध्यम से की गयी। भारत सरकार द्वारा जारी यह अधिसूचना IFSCA अधिनियम, 2019 के कुछ प्रभावों को लागू करती है। यह प्राधिकरण भारत में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों में वित्तीय बाजारों को विनियमित करेगा। इस प्राधिकरण का मुख्य कार्य वित्तीय उत्पादों को विनियमित करना है जैसे कि बीमा के अनुबंध, जमा, वित्तीय संस्थानों की प्रतिभूतियां जिन्हें नियामकों द्वारा अनुमोदित किया गया है। इन नियामकों में RBI, SEBI, पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण, IRDAI शामिल हैं।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA)

इस प्राधिकरण में 9 सदस्य हैं जिन्हें भारत सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है। इन सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। इसके सदस्यों में अध्यक्ष, वित्त मंत्रालय के दो सदस्य, RBI, SEBI, IRDAI और PFRDA के एक-एक सदस्य और खोज समिति की सिफारिश के आधार पर दो सदस्य शामिल होते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC)

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र कॉर्पोरेट्स, व्यक्तियों और सरकारों को फंड जुटाने की सेवाएं प्रदान करेगा। यह वैश्विक कर प्रबंधन, धन प्रबंधन, विलय, जोखिम प्रबंधन संचालन आदि पर भी फोकस करेगा।

IFSCA भारत में IFSCs के लिए एक एकीकृत प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगा। इससे सेबी, आरबीआई और आईआरडीएआई जैसे अन्य कई नियामकों का बोझ कम होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि वर्तमान में सभी बीमा व पूंजी बाजार उनके द्वारा विनियमित किए जा रहे हैं।

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