SSLV

जी. नारायणन को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड का चेयरमैन नियुक्त किया गया

जाने-माने अंतिरक्ष वैज्ञानिक जी. नारायणन को ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ इसरो की वाणिज्यिक इकाई है। इससे पहले जी. नारायणन तिरुवनंतपुरम में इसरो की एक इकाई LPSC (Liquid Propulsion Systems Centre) में डिप्टी डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे। ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ एक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई है, इसका गठन इसरो के अधीन किया गया है, इसके द्वारा स्पेस मार्केट में वाणिज्यिक अवसरों का उपयोग किया जाएगा। ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ छोटे उपग्रहों को लांच करने के लिए SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) का निर्माण करेगा।

न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड

23 मई, 2019 को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) का उद्घाटन बंगलुरु में किया गया, यह भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) की वाणिज्यिक शाखा है। यह अन्तरिक्ष टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में निजी उद्यम को बढ़ावा देगी। यह तकनीक हस्तांतरण मैकेनिज्म के द्वारा स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल (SSLV) तथा PSLV के विकास व उत्पादन का कार्य करेगी। यह वैश्विक वाणिज्यिक SSLV मार्केट की मांग को पूरा करने महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

6 मार्च, 2019 को अन्तरिक्ष विभाग ने इसरो ने अपनी दूसरी इकाई NSIL का पंजीकरण किया था। अन्तरिक्ष विभाग का पहला वाणिज्यिक वेंचर एंट्रिक्स कारपोरेशन लिमिटेड था, इसकी स्थापना सितम्बर, 1992 में की गयी थी। NSIL के द्वारा इसरो के अनुसन्धान व विकास कार्य का वाणिज्यीकरण किया जाएगा। NSIL को 100 करोड़ रुपये की शेयर कैपिटल प्रदान की गयी है, इसे 10 करोड़ रुपये की पेड-अप कैपिटल प्रदान की गयी है।

 

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इसरो तमिलनाडु में SSLV के लिए दूसरा लांच पोर्ट स्थापित करेगा

इसरो दक्षिण तमिलनाडु में तूतिकोड़ी में दूसरा लांच पोर्ट स्थापित करेगा। इसके लिए तमिलनाडु सरकार लगभग 2300 एकड़ भूमि की व्यवस्था करेगी। इस नए पोर्ट से स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल (SSLV) लांच किये जायेंगे। SSLV की सहायता से 500 किलोग्राम तक के पेलोड को अन्तरिक्ष में ले जाया जा सकता है।

स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल

छोटे सैटेलाइट्स को कम लागत पर लांच करने के लिए SSLV (स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल) विकसित कर रहा है। SSLV से छोटे सैटेलाइट्स को लांच करने के लगने वाले समय व लागत में कमी आएगी। वर्तमान समय में छोटे सैटेलाइट्स के लांच का ट्रेंड काफी प्रचलन में है। वर्तमान में इसरो छोटे सैटेलाइट्स को बड़े सैटेलाइट्स के साथ PSLV और GSLV जैसे बड़े लांच व्हीकल में ही लांच करता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए।

80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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