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रिलायंस इंडस्ट्रीज बनी 9 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली पहली भारतीय कंपनी

मुकेश अम्बानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज 9 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। मार्केट कैप कंपनी का वह मूल्य है जिसका व्यापार स्टॉक मार्केट में किया जाता है। मार्केट कैप की गणना कुल शेयर की संख्या को शेयर की वर्तमान कीमत से गुणा करके की जाती है।

मुख्य बिंदु

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर की कीमत में लगभग 2% की वृद्धि होने के इसका मार्केट कैप 9 लाख करोड़ के पार पहुंचा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज रिलायंस के शेयर की कीमत 1.423 रुपये है। इस वर्ष रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में अब तक 26 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से भी ज्यादा है, TCS का मार्केट कैप 7.67 लाख करोड़ रुपये है। TCS भारत की पहली आईटी कंपनी है जिसने 7 लाख करोड़ रुपये (100 बिलियन डॉलर) के मार्किट कैप की सीमा को मई, 2018 में छुआ था।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL)

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है, इसकी स्थापना 1977 में धीरुभाई अम्बानी ने की थी। वर्तमान में मुकेश अम्बानी रिलायंस के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, उनके पास रिलायंस के 47% शेयर हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड उर्जा, पेट्रोकेमिकल, कपड़ा, प्राकृतिक संसाधन, रिटेल तथा दूरसंचार क्षेत्र में कार्य करती है। राजस्व के हिसाब से यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है, पहले स्थान पर सरकारी कंपनी इंडियन आयल कारपोरेशन है। 2017 में फार्च्यून ग्लोबल 500 सूची में यह 203 स्थान पर थी।

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पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री की स्थापना के लिए 6 आईटी कंपनियों को शार्टलिस्ट किया गया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने हाल ही में 6 बड़ी आईटी कंपनियों को पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री के लिए शार्टलिस्ट किया। अब RBI इन 6 कंपनियों से प्रस्ताव की मांग करेगा। शार्टलिस्ट की गयी 6 कंपनियां हैं : TCS, विप्रो, IBM इंडिया, कैपजेमिनी टेक्नोलॉजी सर्विसेज इंडिया, दून एंड ब्रैडस्ट्रीट इनफार्मेशन सर्विसेज इंडिया तथा माइंडट्री लिमिटेड।

पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री (PCR)

PCR ऋण लेने वालों की प्रमाणिक डिजिटल रजिस्ट्री है, यह वित्तीय सूचना अधोसंरचना के रूप में कार्य करेगा। इससे ऋण सूचना प्रणाली मज़बूत होगी। PCR ने ऋण वालों की सारी जानकारी एकत्रित की जायेगी, इसमें डिफाल्टर तथा लंबित न्यायिक मामलों की जानकारी भी होगी। इसमें सेबी, कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय, GSTN तथा भारतीय इन्सोल्वेंसी व बैंकरप्सी बोर्ड से डाटा प्राप्त किया जायेगा। इसके द्वारा बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं को ऋण लेने वालों की पूरी जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

पृष्ठभूमि

जून, 2018 में भारतीय रिज़र्व बैंक ने पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री की स्थापना की थी। इसका उद्देश ऋण तक पहुँच को आसान बनाना तथा भारत की साख व्यवस्था को मज़बूत बनाना है। इस फैसले का निर्णय वाई. एम. देवस्थली समिति की अनुशंसा पर किया गया था। वर्तमान में भारत में कई क्रेडिट रिपॉजिटरी हैं, परन्तु उनका उद्देश्य तथा कवरेज भिन्न-भिन्न है।

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