TRIFED

वन धन योजना : स्वयं सहायता समूहों की संख्या को 18,000 से बढ़ाकर 50,000 किया गया

15 जून, 2020 को TRIFED (ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) द्वारा एक वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार का शीर्षक “वन धन: ट्राइबल स्टार्टअप्स ब्लूम इन इंडिया” था।  इस वेबिनार के दौरान यह बताया गया कि वन धन योजना की कवरेज को 18,000 एसएचजी से बढ़ाकर 50,000 एसएचजी किया जायेगा। इसे वन धन स्टार्ट-अप कार्यक्रम के माध्यम से प्राप्त किया जायेगा।

योजना क्या है?

इस योजना में वन धन स्वयं सहायता समूहों का विस्तार किया जाएगा और इसमें 10 लाख आदिवासी लोगों को कवर करने की योजना है। इसका उद्देश्य लघु वनोपज के संदर्भ में जनजातीय पारिस्थितिकी तंत्र को अगली अमूल क्रांति के रूप में बदलना है।

वन धन विकास कार्यकम

भारत सरकार ने प्रत्येक वन धन विकास कार्यकम केंद्र को 15 लाख रुपये आवंटित किए हैं। इन केंद्रों पर अब तक 25% से 30% अनुदान खर्च किया जा चुका है।

वन धन

वन धन योजना के तहत, अब तक 1205 जनजातीय उद्यम स्थापित किए गए हैं। शुरू की गई स्टार्ट अप योजना में 10 लाख आदिवासी लोग कवर किये गये हैं।

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TRIFED ने यूनिसेफ के साथ मिलकर ‘डिजिटल कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी’ लॉन्च की

हाल ही में ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (TRIFED) ने यूनिसेफ के सहयोग से ‘डिजिटल कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी’ लांच की है। इस कार्यक्रम में ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ के महत्व पर बल दिया जाएगा।

मुख्य बिंदु

9 अप्रैल, 2020 को एक वेबिनार का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में लगभग 18,000 प्रतिभागियों हिस्सा लेंगे। अब तक 1,205 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। ये केंद्र 27 राज्यों में फैले हुए हैं और इनमें लगभग 18,705 वन धन स्व-सहायता समूह शामिल हैं।

शुरूआत में स्वयं सहायता समूहों में से 15,000 को वन धन सामाजिक दूरी जागरूकता-आजीविका केंद्र के रूप में बढ़ावा दिया जायेगा। ये केंद्र समुदायों को सामाजिक दूरी,  व्यक्तिगत स्वच्छता और कैशलेस प्रथाओं को अपनाने के बारे में शिक्षित करेंगे।

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