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UNEP ने गुडविल एम्बेसडर के रूप में अभिनेत्री दीया मिर्जा के कार्यकाल को आगे बढ़ाया

7 मई, 2020 को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने अभिनेत्री दीया मिर्जा के कार्यकाल को 2022 तक भारत के गुडविल एम्बेसडर के रूप में विस्तारित किया। दीया मिर्ज़ा संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य अधिवक्ता भी हैं।

गुडविल एम्बेसडर

सामान्य तौर पर एक गुडविल एम्बेसडर वह व्यक्ति होता है जो वैश्विक मुद्दे या विशिष्ट कारण का समर्थन करता है। संयुक्त राष्ट्र अपने मिशन FAO, UNDP, UNAIDS, UNEP, UNODC, UNFPA, UNHCR, UNICEF, UNESCO, UNIDO, WHO, WEP, UNWOMEN, IMO, UN-Habitat, OHCR के लिए गुडविल एम्बेसडर नियुक्त करता है। यूनिसेफ में सबसे अधिक संख्या में 300 एम्बेसडर हैं।

भुगतान

यूएनईपी के तहत गुडविल एम्बेसडर को भुगतान नहीं किया जाता। हालांकि, उन्हें प्रति वर्ष 1 डॉलर का प्रतीकात्मक भुगतान प्रदान किया जाता है। उन्हें यात्रा भत्ते प्रदान किए जाते हैं।

भूमिका

संयुक्त राष्ट्र के अनुरोध पर गुडविल एम्बेसडर फण्ड जुटाने में मदद करते हैं, इसके अलावा वे किसी मुद्दे के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए भी कार्य करते है। उनकी सेवा की अवधि 2 साल होती है।

दीया  मिर्जा का योगदान

दीया मिर्जा ने “बीट द पोल्यूशन” अभियान में सक्रिय भाग लिया था। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस समारोह, सर्कुलर फैशन और अन्य यूएनईपी अभियानों के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था।  ‘बीट द पोल्यूशन’ अभियान के तहत भारत 2022 तक सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से पूरी तरह मुक्त होने के लिए कार्य कर रहा है।

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दिल्ली कैबिनेट ने प्रदूषण पर नई नीति को मंज़ूरी दी

24 दिसम्बर, 2019 को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली में विद्युत् वाहनों को बढ़ावा दने के लिए नई नीति प्रस्तुत की। इस नीति के तहत सरकार विद्युत् वाहनों के लिए सब्सिडी प्रदान करेगी।

मुख्य बिंदु

इस नीति का उद्देश्य 2024 नए पंजीकृत वाहनों में 25% विद्युत् वाहन शामिल करना है। इसके अलावा सरकार 250 चार्जिंग स्टेशन निर्मित करने की योजना भी बना रही है। इसमें 20% पार्किंग विद्युत् वाहनों के लिए निर्धारित की जायेगी। इस नीति का निर्माण UNEP (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम), विशेषज्ञों तथा अंतर्राष्ट्रीय परिवहन परिषद् से फीडबैक लेने के बाद किया गया है। इस नीति के पहले ड्राफ्ट को नवम्बर, 2018 में सार्वजनिक किया गया था।

यह नीति दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए आवश्यक है क्योंकि दिल्ली में 80% कार्बन मोनोऑक्साइड, 40% PM 2.5 तथा 80% नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन में जीवाश्म इंधन से चलने वाले वाहनों का हिस्सा काफी ज्यादा है।

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