आरबीआई ने HDFC बैंक को अपने डिजिटल लांच को रोकने के लिए निर्देश दिए : मुख्य बिंदु

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने एचडीएफसी बैंक को अपने डिजिटल 2.0 कार्यक्रम के तहत अपने सभी लॉन्च को अस्थायी रूप से बंद करने के लिए कहा है।

कारण

आरबीआई ने बैंक के खिलाफ आक्रोश के संबंध में आदेश जारी किया। यह आदेश पिछले दो वर्षों में मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और बैंक की भुगतान उपयोगिताओं में गड़बड़ी की घटनाओं के संबंध में जारी किए गए थे।

मामला क्या है?

नवंबर 2020 में प्राथमिक डेटा सेंटर में होने बिजली चले जाने के कारण बैंक को पूरे देश में नाराजगी का सामना करना पड़ा। दिसंबर 2019 में भी, ग्राहकों को ऋण ईएमआई का भुगतान करने और क्रेडिट कार्ड बिलों का निपटान करने में समस्याओं का सामना करने पर बैंक की कड़ी आलोचना की गयी थी।

डिजिटल 2.0 क्या है?

डिजिटल 2.0 पहल के तहत, HDFC बैंक ने प्रौद्योगिकी के माध्यम से ग्राहकों को जोड़ने की योजना बनाई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सभी वित्तीय आवश्यकताओं जैसे कि बीमा, व्यापार, निवेश, आदि को पूरा करने के लिए ग्राहकों को सुविधा प्रदान करना था।

यह देश का ऐसा पहला बैंक था जिसने 10 सेकंड डिजिटल लोन पेश किया था। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है। HDFC बैंक नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोट प्रोसेस ऑटोमेशन और ब्लॉकचेन पर काम कर रहा था।

आरबीआई के आदेश के अनुसार, एचडीएफसी बैंक को अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए।  बैंक के अनुपालन पर संतुष्ट होने के बाद ही आरबीआई इन प्रतिबंधों को हटा देगा।

बैंकिंग विनियमन अधिनियम

आरबीआई बैंकिंग विनियमन अधिनियम के अनुसार देश में सार्वजनिक और निजी बैंकों में से किसी ही बक के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकता है तथा इसके बारे में आदेश जारी कर सकता है। हाल ही में इस अधिनियम के आधार पर एचडीएफसी पर अंकुश लगाया गया है। इस प्रकार, RBI देश में वाणिज्यिक बैंकों के संरक्षक के रूप में कार्य करता है।

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