एनआरआई वोटिंग क्या है?

हाल ही में भारतीय चुनाव आयोग ने NRI (अनिवासी भारतीयों) को वोट डालने में सक्षम बनाने के लिए पोस्टल बैलेट के उपयोग का प्रस्ताव दिया था। यह ETPBS या इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट सिस्टम का उपयोग करके किया जा सकता है।

मुख्य बिंदु

NRIs को मतदान का अधिकार 2011 में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के एक संशोधन द्वारा मिला था। वर्तमान में, NRI केवल उस क्षेत्र के व्यक्ति को वोट दे सकते हैं जहां उनका निवास स्थान है।

लेकिन यह अनिवासी भारतीयों के लिए महंगा पड़ता है, क्योंकि उन्हें केवल वोट डालने के एकमात्र उद्देश्य के लिए विदेश से यात्रा करनी पड़ती है। चुनाव आयोग के अनुसार, यह तकनीकी रूप से तमिलनाडु, असम, केरल, पश्चिम बंगाल और पुदुचेरी में मतदाताओं के लिए ईटीपीबीएस का विस्तार करने के लिए तैयार है।

भारत में मतदान के लिए क्या प्रावधान हैं?

भारत सरकार अपने नागरिकों को पोस्ट के माध्यम से, व्यक्तिगत रूप से और प्रॉक्सी के माध्यम से तीन अलग-अलग तरीकों से मतदान करने की अनुमति देती है। 2003 में प्रॉक्सी वोटिंग की शुरुआत की गई थी, केवल कुछ सूचीबद्ध देशों में रहने वाले अनिवासी भारतीयों के लिए यह सुविधा शुरू की गयी थी। दूसरी ओर, पोस्टल बैलट में डाक द्वारा भेजे जाने वाले मतपत्र शामिल होते हैं।

उच्चतम न्यायालय ने 2013 और 2014 में मतदान के लिए तीन मुख्य विकल्पों का अध्ययन करने के लिए एक 12-सदस्यीय समिति का गठन किया था, जिसमें ऑनलाइन मतदान, पोस्ट द्वारा मतदान और विदेशों में एक भारतीय मिशन में मतदान करना शामिल था। इस समिति ने ऑनलाइन मतदान से इनकार किया क्योंकि यह मतदान की गोपनीयता से समझौता कर सकता है। समिति ने यह भी सिफारिश की कि प्रॉक्सी वोटिंग और ई-पोस्टल बैलट वोटिंग के अतिरिक्त और भी  विकल्प प्रदान किए जाने चाहिए। कानून मंत्रालय ने प्रॉक्सी वोटिंग पर की गई सिफारिशों पर सहमति जताई थी।

वर्तमान परिदृश्य

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में 16 मिलियन भारतीय रहते हैं। 2014 के संसदीय चुनाव में, केवल 25,000 अनिवासी भारतीयों ने वोट डालने के लिए भारत की यात्रा की।

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