ऑनलाइन वन्यजीव व्यापार पर WWF रिपोर्ट : मुख्य बिंदु

विश्व वन्यजीव कोष (World Wildlife Fund) ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि म्यांमार में ऑनलाइन वन्यजीवों की अवैध खरीद बढ़ रही है जो लुप्तप्राय प्रजातियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा पैदा कर रही है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष

  • 2021 के सैन्य कब्ज़े के बाद राजनीतिक उथल-पुथल के कारण, इस तरह के लेनदेन पर प्रतिबंध लागू करना कठिन हो गया है।
  • एक साल में इस तरह के सौदों में 74% की वृद्धि हुई है।
  • व्यापार की गई 173 प्रजातियों में से 54 वैश्विक विलुप्ति का सामना कर रही हैं।
  • 639 फेसबुक अकाउंट की पहचान की गई है जो वन्यजीव व्यापारियों के हैं।
  • सबसे बड़े ऑनलाइन वन्यजीव व्यापार समूह में 19,000 से अधिक सदस्य हैं और हर हफ्ते दर्जनों पोस्ट किए जाते हैं।

किन जानवरों का व्यापार किया जा रहा है?

जिन जानवरों का व्यापार किया गया उनमें भालू, हाथी, गिबन, गंभीर रूप से लुप्तप्राय पैंगोलिन, तिब्बती मृग और एक एशियाई विशाल कछुआ शामिल थे। बंदरों की विभिन्न प्रजातियां ऑनलाइन सबसे लोकप्रिय व्यापारिक प्रजातियां थीं। अधिकांश विज्ञापित जानवर जिन्हें बिक्री के लिए रखा गया था, वे जंगली थे और उनमें सिवेट शामिल थे, जिन्हें COVID-19 और SARS जैसी बीमारियों के संभावित वैक्टर के रूप में पहचाना गया है।

जन स्वास्थ्य को लेकर चिंता

वन्यजीवों के ऑनलाइन व्यापार में वृद्धि चिंताजनक है क्योंकि यह मनुष्यों और जंगली प्रजातियों के बीच इंटरेक्शन का कारण बन रही है, जिसके कारण COVID-19 जैसी बीमारियों के नए और संभवतः वैक्सीन-प्रतिरोधी अनिर्धारित म्यूटेशन के फैलने का जोखिम है।

वन्यजीवों के ऑनलाइन व्यापार को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदम

वन्यजीवों के इस तरह के ऑनलाइन व्यापार को रोकने के लिए विश्वव्यापी प्रयास विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों द्वारा भी किए जा रहे हैं। फेसबुक लगातार ऐसी गतिविधियों में लगे लोगों के खातों को हटा रहा है।

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