कादंबिनी गांगुली (Kadambini Ganguly) कौन हैं?

हाल ही में गूगल ने कादंबिनी गांगुली के 160वें जन्मदिन पर उनके सम्मान में एक डूडल बनाया है। गौरतलब है कि कादंबिनी गांगुली भारत की पहली महिला डॉक्टरों में से एक थीं।

मुख्य बिंदु

कादंबिनी गांगुली अपने समय के दौरान 1884 में प्रतिष्ठित कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में भाग लेने वाली पहली भारतीय महिला थीं। उस समय किसी महिला के लिए यह काफी बड़ी बात थी, इससे उन्होंने कई और महिलाओं को भी प्रेरित किया। उनका नाम अक्सर आनंदी गोपाल जोशी (Anandi Gopal Joshi) के साथ याद किया जाता है। दोनों ने 1886 में एक साथ डिग्री प्राप्त की, जिससे उन्हें चिकित्सा का अभ्यास करने की अनुमति मिली।

कादंबिनी गांगुली (Kadambini Ganguly)

कादम्बिनी गांगुली का जन्म चंदसी नामक गाँव में हुआ था, जो पश्चिम बंगाल (अब बांग्लादेश का एक हिस्सा) के बारीसाल जिले में है। उन्होंने पहले ढाका और फिर कलकत्ता में अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त की।

उन्हें चिकित्सा का अध्ययन करने की इच्छा थी। हालांकि, देश के मेडिकल कॉलेजों में अभी भी छात्राओं को प्रवेश नहीं दिया जाता था।

जब उन्होंने 1884 में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया, तब देश में महिलाओं के लिए डॉक्टर बनने के अपने सपनों को पूरा करने के दरवाजे खुल गए। 1892 में, वह मेडिसिन के क्षेत्र में आगे की पढ़ाई के लिए यूनाइटेड किंगडम चली गईं। वह एडिनबर्ग और डबलिन में प्राप्त प्रमाणपत्रों के साथ भारत वापस आई।

अपनी निजी प्रैक्टिस शुरू करने के साथ-साथ, कादम्बिनी गांगुली अपने समय के दौरान सामाजिक आंदोलनों में शामिल होने के लिए भी जानी जाती हैं। उन्होंने महिला कोयला खनिकों की स्थिति में सुधार और उनके अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। 1915 में, उन्होंने छात्राओं को प्रवेश नहीं देने के लिए कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की खुले तौर पर आलोचना की ।

1923 में उनका निधन हो गया था। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कादम्बिनी गांगुली ने बहुमूल्य योगदान दिया।

 

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