केरल की सिल्वरलाइन परियोजना (SilverLine Project) का विरोध क्यों हो रहा है?

कई राजनीतिक दल और नागरिक संगठन जैसे के-रेल सिल्वरलाइन विरुद्ध जनकीय समिति “केरल की सिल्वरलाइन परियोजना” का विरोध कर रहे हैं।

इस परियोजना का विरोध क्यों किया जा रहा है?

सांसदों ने परियोजना के खिलाफ याचिका पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि, “इसमें बड़ा घोटाला हो रहा है” और यह राज्य को और कर्ज में खींच लेगा। इसके अलावा, पर्यावरणविदों का विचार है कि इस परियोजना से पर्यावरण को बहुत नुकसान होगा क्योंकि इसका मार्ग आर्द्रभूमि, धान के खेतों और पहाड़ियों से होकर गुजरता है।

सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट क्या है?

सिल्वरलाइन परियोजना एक सेमी हाई स्पीड रेलवे परियोजना है। इसमें केरल के उत्तरी और दक्षिणी छोर के बीच 200 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों की परिकल्पना की गई है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 63,940 करोड़ रुपये है। यह प्रस्तावित रेल-लिंक लगभग 529.45 किलोमीटर का है और तिरुवनंतपुरम को कासरगोड से जोड़ेगा। यह 11 स्टेशनों के माध्यम से 11 जिलों को कवर करेगा। कासरगोड से तिरुवनंतपुरम के बीच यात्रा का समय 12 घंटे से घटकर चार घंटे से भी कम हो जाएगा।

कार्यकारी प्राधिकरण और समय सीमा

यह परियोजना “केरल रेल विकास निगम लिमिटेड (KRDCL)” द्वारा कार्यान्वित की जा रही है। यह परियोजना केरल सरकार और केंद्रीय रेल मंत्रालय का एक संयुक्त उद्यम है। इस परियोजना के कार्यान्वयन की समय सीमा 2025 है।

सिल्वरलाइन परियोजना का महत्व

कई शहरी नीति विशेषज्ञ चिंता जताते हैं कि केरल में मौजूदा रेलवे बुनियादी ढांचा भविष्य की मांगों को पूरा करने में सक्षम नहीं होगा। मौजूदा खंड पर वक्र और मोड़ के कारण अधिकतर ट्रेनें 45 किमी/घंटा की औसत गति से चलती हैं। इसलिए सरकार सिल्वरलाइन परियोजना पर काम कर रही है, जो मौजूदा खंड से यातायात का एक महत्वपूर्ण भार उठा सकती है और यात्रियों के लिए यात्रा को तेज कर सकती है। इसके अलावा, परियोजना ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को भी कम करेगी, रोजगार के अवसर पैदा करेगी और रो-रो सेवाओं के विस्तार में मदद करेगी, हवाई अड्डों और आईटी कॉरिडोर को एकीकृत करेगी और साथ ही उन शहरों में तेजी से विकास को सक्षम करेगी जहां से यह गुजरती है।

परियोजना की विशेषताएं

  • प्रोजेक्ट इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) टाइप की ट्रेनें चलाएगा। प्रत्येक ट्रेन में 9 डिब्बे होंगे जिन्हें 12 तक बढ़ाया जा सकता है।
  • व्यापार और मानक वर्ग सेटिंग्स में 9 डिब्बों में 675 यात्री यात्रा कर सकते हैं।
  • मानक गेज ट्रैक पर ट्रेनें 220 किमी/घंटा की अधिकतम गति से चलेंगी।

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