कैबिनेट ने कोयला गैसीकरण के माध्यम से उत्पादित यूरिया के लिए सब्सिडी को मंजूरी दी

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने हाल ही में यूरिया के लिए सब्सिडी को मंजूरी दी है जो TFL द्वारा उत्पादित की जाएगी। TFL (Talcher Fertilizer Plant) एक सरकार द्वारा संचालित उर्वरक संयंत्र है।

प्लांट के बारे में

  • TFL ओडिशा में एक नया उर्वरक प्लांट को चालू करेगा। यह प्लांट कोयला गैसीकरण (coal gasification) के माध्यम से यूरिया का उत्पादन करेगा। भारत सरकार इस प्लांट स्थापित करने के लिए सब्सिडी प्रदान करेगी। यह कोयला गैसीकरण प्रक्रिया के माध्यम से नाइट्रोजनयुक्त मिट्टी पोषक तत्व का उत्पादन करने वाला भारत का एकमात्र प्लांट होगा।
  • Talcher Fertilizers फ़र्टिलाइज़र कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (Fertilizer Corporation of India) राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फ़र्टिलाइज़र्स (Rashtriya Chemicals and Fertilizers), गेल और कोल इंडिया का एक संयुक्त उद्यम है।
  • तालचर फ़र्टिलाइज़र्स 13,277 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश पर कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी पर एक यूरिया प्लांट बेस स्थापित करेगा।
  • इस प्लांट की वार्षिक क्षमता 27 मिलियन टन प्रति वर्ष है।
  • इस प्लांट के 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है। वर्तमान में यह COVID-19 महामारी के कारण देरी का सामना कर रहा है।

भारत में उर्वरक की खपत का वर्तमान परिदृश्य

  • भारत ने 2020-21 में 61 मिलियन टन उर्वरकों का इस्तेमाल किया। इसमें से 55% यूरिया था।
  • निवेश की कमी के कारण 2010 से भारत में उर्वरक का आयात बढ़ रहा है।
  • भारत ने 2030 तक कोयला गैसीकरण परियोजनाओं में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है। इससे भारत को आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

कोयला गैसीकरण (Coal Gasification)

  • यह syngas उत्पादन की प्रक्रिया है।Syngas हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड, प्राकृतिक गैस, कार्बन डाइऑक्साइड और जल वाष्प का मिश्रण है। यह कोयले और पानी से पैदा होता है।
  • तालचर यूनिट द्वारा अपनाई गई कोयला गैसीकरण नगण्य नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करेगा।

TFL प्लांट के लाभ

वर्तमान में, भारत प्राकृतिक गैस का उपयोग करके यूरिया का उत्पादन करता है। प्राकृतिक गैस का आयात अत्यधिक महंगा है। इसलिए, भारत स्वदेशी कच्चे माल के साथ यूरिया का उत्पादन करने के लिए कोयला गैसीकरण जैसे वैकल्पिक मार्गों को अपना रहा है। यह परियोजना भारत को यूरिया में आत्मनिर्भर बनने, आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से कोयले का उपयोग करने में मदद करेगी।

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