कोयला मंत्रालय ने किया सतत विकास प्रकोष्ठ (Sustainable Development Cell) का गठन

कोयला मंत्रालय ने स्वच्छ ऊर्जा की प्रतिबद्धता के अनुरूप एक “सतत विकास प्रकोष्ठ” (Sustainable Development Cell) का गठन किया है।

मुख्य बिंदु

  • सतत विकास प्रकोष्ठ का गठन ‘पंचामृत रणनीति’ के तहत COP26 में नए जलवायु लक्ष्यों पर प्रधानमंत्री की घोषणा की पृष्ठभूमि में किया गया।
  • मंत्रालय ने खनन के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव का ध्यान रखते हुए कोयला खनन में सतत विकास पर विशेष जोर दिया।

सतत विकास प्रकोष्ठ (Sustainable Development Cell – SDC)

  • कोयला मंत्रालय ने खनन के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए परामर्श, सलाह और योजना कार्रवाई के लिए एक पूर्ण सतत विकास सेल (Sustainable Development Cell) की स्थापना की है।
  • यह भारत में कोयला क्षेत्र के साथ-साथ लिग्नाइट क्षेत्र में पर्यावरणीय शमन के लिए भविष्य की नीतिगत रूपरेखा भी तैयार करेगा।

फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (First Mile Connectivity – FMC)

पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए कोयला कंपनियों द्वारा FMC पहल शुरू की गई थी। इस पहल के तहत कोल हैंडलिंग प्लांट से कन्वेयर बेल्ट के जरिए लदान के उद्देश्य से साइलो तक कोयले का परिवहन किया जाता है। यह प्रक्रिया सड़क के माध्यम से कोयले की आवाजाही को दूर करती है। ऐसी 39 परियोजनाओं की योजना बनाई गई है। 2023-24 तक 13000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ परियोजनाओं को चालू किया जाएगा। इन FMC परियोजनाओं से सालाना 2100 करोड़ रुपये के डीजल की बचत करने में मदद मिलेगी।

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Comments

  • Vikash gupta
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    बहुत ही शानदार कदम आदरणीय पीएम मोदी जी