डीएसआर तकनीक (DSR Technique) क्या है?

DSR Technique का अर्थ Direct Seeding of Rice Technique है। इस साल पंजाब सरकार ने एक हेक्टेयर जमीन को डीएसआर तकनीक के तहत लाने का फैसला किया है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सरकार प्रवासी मजदूरों की कमी की उम्मीद कर रही है।

डीएसआर तकनीक (DSR Technique) क्या है?

डीएसआर तकनीक धान की सीधी बुवाई है। यहां बीजों को रोपाई के बजाय सीधे खेत में बोया जाता है। बीजों को मिट्टी में खोदने के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली मशीन का उपयोग किया जाता है।

डीएसआर तकनीक में नर्सरी की तैयारी नहीं होती है।

धान की रोपाई (Transplanting Paddy)

परंपरागत तरीके से जहां धान की रोपाई की जाती है, किसान पहले नर्सरी तैयार करता है। इन नर्सरी में बीजों को बोया जाता है और पौधों को उगाया जाता है। 25-35 दिनों के बाद इन पौधों को उखाड़ कर खेत में बो दिया जाता है।

डीएसआर तकनीक के लाभ

इस तकनीक से लागत में 6000 रुपये प्रति एकड़ की कमी आती है।

यह तकनीक 30% कम पानी का उपयोग करती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि रोपाई के दौरान, खेत को लगभग रोजाना 4-5 सेंटीमीटर पानी की गहराई बनाए रखते हुए सिंचित करना पड़ता है।

डीएसआर तकनीक के बारे में भ्रांतियां

रोपाई विधि से प्रति एकड़ 35 क्विंटल उपज प्राप्त होती है। डीएसआर तकनीक की उत्पादकता कम हो सकती है। किसानों के अनुसार, यह केवल 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दे सकती है। हालांकि, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय इस बात पर जोर देता रहा है कि यह एक गलत धारणा है।

समस्या क्या है?

2020 में, पंजाब सरकार ने 40% से 50% सब्सिडी के साथ 4000 डीएसआर मशीनों और 800 धान ट्रांसप्लांटरों को मंजूरी दी।

जुलाई 2020 के आसपास, किसानों ने चूहों के हमलों की शिकायत की। आमतौर पर सामान्य रोपाई पद्धति में, फसलें चूहों के हमलों की चपेट में नहीं आती हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि वे पाने में डूबे हुए खेतों में जीवित नहीं रह सकते। हालांकि, पंजाब में चूहों का हमला काफी आम है और हर फसल को इस समस्या का सामना करना पड़ता है। राज्य में हर साल लगभग 2% से 15% नुकसान चूहों के हमलों से होता है।

सीमायें

  • मानसून की बारिश से पहले फसलों को ठीक से बाहर आने के लिए समय पर बुवाई की आवश्यकता होती है।
  • इसमें बीज की आवश्यकता अधिक होती है।रोपाई में यह 4-5 किग्रा प्रति एकड़ तथा डीएसआर में 8-10 किग्रा प्रति एकड़ बीज का इस्तेमाल होता है।

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