नीति आयोग और IEA ने ‘Renewables Integration in India 2021’ रिपोर्ट लॉन्च की

22 जुलाई, 2021 ‘Renewables Integration in India 2021’ नामक एक रिपोर्ट संयुक्त रूप से नीति आयोग और IEA द्वारा लांच किया गया था। यह रिपोर्ट नवीकरणीय-समृद्ध राज्यों के सामने ऊर्जा परिवर्तन चुनौतियों को समझने के लिए कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात सरकारों के साथ तीन राज्यों में आयोजित कार्यशालाओं के परिणाम पर आधारित है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • यह रिपोर्ट पावर सिस्टम पर विभिन्न लचीलेपन विकल्पों के प्रभावों को चित्रित करने के लिए IEA मॉडलिंग परिणामों का उपयोग करती है।
  • इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की उर्जा प्रणाली नवीकरणीय ऊर्जा (वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट और वर्ष 2030 तक 450 गीगावाट) को कुशलतापूर्वक एकीकृत कर सकती है, लेकिन इसके लिए उचित योजना, नियामक नीति और संस्थागत समर्थन, संसाधनों की पहचान, ऊर्जा भंडारण और अग्रिम प्रौद्योगिकी पहल की आवश्यकता होगी।
  • भारत के राज्यों को कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के अधिक लचीले संचालन, मांग प्रतिक्रिया, ग्रिड सुधार और भंडारण जैसे विस्तृत श्रृंखला विकल्पों को नियोजित करने की आवश्यकता है ताकि वे स्वच्छ बिजली प्रणालियों में परिवर्तन कर सकें।
  • उपयोग का समय (Time of Use – ToU) टैरिफ लचीली खपत को प्रोत्साहित करने और मांग पक्ष प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए एक प्रभावी उपकरण हो सकता है।
  • यह रिपोर्ट भारत में सभी हितधारकों के लिए भंडार के रूप में काम करेगी।
  • इस रिपोर्ट में थर्मल पावर प्लांट के लचीलेपन और ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ भंडारण प्रौद्योगिकियों के लिए लागत प्रभावी समाधान की आवश्यकता पर सरकार की नीतियों का भी उल्लेख किया गया है।
  • कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड ने जोर दिया था कि अधिकतम नवीकरणीय ऊर्जा को अवशोषित करने के लिए राज्य ने सभी औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन प्रदान करते हुए 70% से 80% कृषि भार को दिन के समय में स्थानांतरित कर दिया है ताकि वे अधिक बिजली की खपत कर सकें और हरित ऊर्जा में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ा सकें।
  • गुजरात विद्युत नियामक आयोग ने कहा कि पुराने नियमों को संशोधित करने की जरूरत है और नियामक आयोगों को राज्य में संशोधित नियमों को लागू करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है।

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