पल्ली: भारत की पहली ‘कार्बन-न्यूट्रल पंचायत’

जम्मू के सांबा जिले में स्थित पल्ली गाँव कार्बन न्यूट्रल, पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होने वाली भारत की पहली पंचायत बन गई है, और इसके सभी रिकॉर्ड डिजिटल हो गए हैं जो केंद्रीय योजनाओं के सभी लाभों को आसानी से प्राप्त करने में मदद करेंगे।

मुख्य बिंदु 

  • प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्बन-न्यूट्रल पंचायत में 500 किलोवाट के सोलर प्लांट का उद्घाटन किया।
  • इस उद्घाटन के साथ पल्ली कार्बन-न्यूट्रल बनने वाली देश की पहली पंचायत बन गई है।
  • तीन सप्ताह के रिकॉर्ड समय में पल्ली में 500 किलोवाट का सौर संयंत्र स्थापित किया गया।
  • पल्ली ने देश को कार्बन-न्यूट्रल बनाने के ग्लासगो लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
  • पल्ली को अब एक आदर्श पंचायत के रूप में देखा जाएगा, और यह जम्मू-कश्मीर और भारत की अन्य पंचायतों को कार्बन-न्यूट्रल बनने के लिए प्रेरित करेगा।
  • पल्ली में कुल 6,408 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 1500 सोलर पैनल लगाए गए हैं।
  • ये सोलर पैनल पंचायत में स्थित 340 घरों को स्वच्छ बिजली मुहैया कराएंगे।
  • जो बिजली पैदा होगी उसका वितरण स्थानीय पावर ग्रिड स्टेशन द्वारा किया जाएगा।

केंद्र सरकार देश की पंचायतों को और अधिक शक्तिशाली बनाने के उद्देश्य से प्रमुख प्रौद्योगिकी संबंधी उपायों, भुगतान के तरीकों और ई-स्वराज पर जोर दे रही है। पंचायतों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सरकार की योजना है कि पंचायतों को बेहतर बनाया जाए। पंचायतों को रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कार्बन तटस्थता (Carbon Neutrality)

यह शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को प्राप्त करने को संदर्भित करता है। यह कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को उनके निष्कासन या उत्सर्जन के उन्मूलन के माध्यम से संतुलित करके प्राप्त किया जा सकता है। कार्बन न्यूट्रल शब्द का प्रयोग ऊर्जा उत्पादन, परिवहन, उद्योग और कृषि के संदर्भ में किया जाता है। “नेट-जीरो” शब्द का प्रयोग जलवायु कार्रवाई और डीकार्बोनाइजेशन के लिए एक व्यापक प्रतिबद्धता का वर्णन करने के लिए किया जाता है। शुद्ध-शून्य उत्सर्जन केवल तभी प्राप्त किया जा सकता है जब किसी संगठन के ग्रीनहाउस गैस (CO2-e) उत्सर्जन को उनके निष्कासन से संतुलित किया जाता है।

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