ब्रह्मोस के उन्नत संस्करण का परीक्षण किया गया

11 जनवरी, 2022 को रक्षा अनुसंधान विकास संगठन ने ब्रह्मोस के उन्नत संस्करण का परीक्षण किया। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का समुद्र-से-समुद्र संस्करण है। इसका परीक्षण आईएनएस विशाखापत्तनम से किया गया।

मुख्य बिंदु 

यह भारत के आत्मनिर्भर बनने का एक कदम है। साथ ही, इस परीक्षण ने भारतीय नौसेना की तैयारी की पुष्टि की। ब्रह्मोस को भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया था। इसे हवा, समुद्र और जमीन से लॉन्च किया जा सकता है। ब्रह्मोस की लक्ष्य सीमा 290 किलोमीटर है। MTCR (Missile Technology Control Regime) की वजह से रेंज को 290 किमी पर सीमित कर दिया गया था।

MTCR और ब्रह्मोस

MTCR एक अनौपचारिक संगठन है। इसमें 35 सदस्य हैं। चीन MTCR का सदस्य नहीं है। भारत MTCR के तहत वियतनाम को ब्रह्मोस का निर्यात करता है। MTCR ने भारत को इजरायल से एरो II मिसाइल खरीदने में मदद की। MTCR के कारण भारतीय हथियारों का निर्यात बढ़ा। 

INS विशाखापत्तनम

यह स्वदेशी रूप से निर्मित चार मिसाइल डिस्मेंट्रॉयर से एक है। इसे प्रोजेक्ट 15B के तहत बनाया गया है। इसे नवंबर 2021 में कमीशन किया गया था।

ब्रह्मोस (Brahmos)

यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। यह नाम ब्रह्मपुत्र और मोस्कवा नदियों को जोड़ कर रखा गया है। ब्रह्मोस इंजन का पहला चरण ठोस रॉकेट बूस्टर द्वारा, दूसरे चरण में तरल रैमजेट द्वारा प्रज्वलित किया जाता है। पहले चरण में इस्तेमाल होने वाला प्रणोदक (propellant) ठोस ईंधन है और दूसरे चरण में प्रयुक्त होने वाला तरल ईंधन है। यह मैक 2.0 से 2.8 की अधिकतम गति प्राप्त कर सकता है।

ब्रह्मोस पर भारत – रूस

दोनों देशों ने 2000 ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलों के निर्माण और उन्हें अपने मित्र देशों को निर्यात करने पर सहमति व्यक्त की है। भारत ने आठ युद्धपोतों में इस मिसाइल को शामिल किया है। वे राजपूत वर्ग के डिस्ट्रॉयर, तलवार वर्ग के युद्धपोत, शिवालिक वर्ग, कोलकाता वर्ग, विशाखापत्तनम वर्ग और नीलगरी वर्ग हैं।

ब्रह्मोस का निर्यात

ब्रह्मोस का निर्यात मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, ओमान, चिली और ब्रुनेई को किया जाता है।

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