भारतीय वायुसेना (IAF) में महिला फाइटर पायलटों को स्थाई तौर पर शामिल किया जायेगा

1 फरवरी, 2022 को, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महिलाओं को लड़ाकू पायलटों के रूप में शामिल करने की प्रायोगिक योजना को स्थायी में बदलने के सरकार के फैसले की घोषणा की।

मुख्य बिंदु

  • भारतीय वायु सेना (IAF) में महिलाओं को लड़ाकू विमान उड़ाने की अनुमति देने की प्रायोगिक योजना छह साल पहले 2015 में शुरू की गई थी।
  • 2016 में प्रायोगिक योजना के लागू होने के बाद से अब तक 16 महिलाओं को लड़ाकू पायलट के रूप में नियुक्त किया गया है।
  • अब, रक्षा मंत्रालय ने इस योजना को स्थायी बनाने के लिए मंजूरी दे दी है।

पृष्ठभूमि

इस कदम की घोषणा ऐसे समय की गई जब सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए नए दरवाजे खुल गए हैं। भारतीय नौसेना महिलाओं को अपने पुरुष समकक्षों के साथ युद्धपोतों में सेवा के अवसर प्रदान करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। भारतीय सेना ने भी महिलाओं को हेलीकॉप्टर उड़ाने की अनुमति दी है। वे अब स्थायी कमीशन के लिए पात्र हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी जून 2022 में महिला कैडेटों के पहले बैच को शामिल करने के लिए तैयार है। सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2021 में इस अकादमी के दरवाजे महिलाओं के लिए खोलने की घोषणा की थी।

IAF में महिला पायलट

IAF की महिला पायलट राफेल, मिग-21, सुखोई-30 और मिग-29 लड़ाकू विमानों को उड़ा रही हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह भारत की पहली राफेल पायलट हैं। वह भारतीय वायुसेना की झांकी का हिस्सा थीं, जिसे गणतंत्र दिवस परेड 2022 में प्रदर्शित किया गया था।

सेना में महिलाएं

वर्तमान में 9,000 से अधिक महिलाएं सेना, नौसेना और वायु सेना में सेवा दे रही हैं। सेवाएं उन्हें करियर की प्रगति को बढ़ावा देने के लिए अधिक अवसर प्रदान कर रही हैं। नतीजतन, पिछले सात वर्षों में सेना में महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई है। महिलाओं को अब लड़ाकू विमान उड़ाने और युद्धपोतों पर सेवा देने की अनुमति दी गई है। 1992 में पहली बार महिलाओं को मेडिकल स्ट्रीम के बाहर सशस्त्र बलों में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। मई 2021 में, भारतीय सेना ने कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में महिलाओं के पहले बैच को शामिल किया था। यह पहली बार था जब महिलाओं को गैर-अधिकारी संवर्ग में सेना में शामिल होने की अनुमति दी गई थी।

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