भारत ने कोविड की उत्पत्ति की जांच का समर्थन किया

भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) द्वारा कोविड -19 की उत्पत्ति की व्यापक जांच के लिए नए सिरे से वैश्विक आवाहन के लिए अपना समर्थन दिया है।

पृष्ठभूमि

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से यह पता लगाने के लिए कहा है कि चीन में कोरोनावायरस कैसे उत्पन्न हुआ है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों द्वारा इस बात की जांच करने की मांग उठाई गई थी कि क्या कोरोनावायरस 2019 के अंत में चीन के वुहान शहर में किसी पशु स्रोत से या दिसंबर 2019 में प्रयोगशाला दुर्घटना से उत्पन्न हुआ था। इससे पहले, मार्च 2021 में, WHO ने वायरस की उत्पत्ति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, लेकिन अमेरिका और अन्य देश इससे संतुष्ट नहीं थे।

डब्ल्यूएचओ का मत

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कोविड-19 की उत्पत्ति पर वैश्विक अध्ययन एक महत्वपूर्ण कदम है। अब, अगले चरण के अध्ययन से मजबूत निष्कर्ष तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

कोरोनावायरस की उत्पत्ति को लेकर विवाद

लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी (Lawrence Livermore National Laboratory) के वैज्ञानिकों द्वारा 2020 में किए गए SARS-CoV-2 की उत्पत्ति पर एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि कोरोनावायरस की उत्पत्ति चीन की एक प्रयोगशाला में हो सकती है। हालाँकि, Z डिवीजन की रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला, प्रयोगशाला-उत्पत्ति सिद्धांत और जूनोटिक सिद्धांत दोनों संभव है।

कोरोनावायरस की लैब लीक थ्योरी

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (Wuhan Institute of Virology) तब सुर्खियों में आया जब अमेरिका में एक मीडिया रिपोर्ट ने दावा किया गया कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के तीन शोधकर्ताओं ने चीन द्वारा वुहान में कोविड -19 मामलों का खुलासा करने से कुछ हफ्ते पहले नवंबर 2019 में अस्पताल में देखभाल की मांग की थी।

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