भारत ने चीन, थाईलैंड और वियतनाम के खिलाफ डंपिंग रोधी जांच (anti-dumping probe) शुरू की

वाणिज्य मंत्रालय ने हाल ही में चीन, वियतनाम और थाईलैंड के खिलाफ डंपिंग रोधी जांच (anti-dumping investigation) शुरू की है। यह जांच इन देशों से सोलर सेल (Solar Cell) के आयात के खिलाफ है। इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन (Indian Solar Manufacturer Association) की ओर से जमा कराए गए आवेदन के बाद मंत्रालय ने यह जांच शुरू कर दी है।

मामला क्या है?

सौर मॉड्यूल के निर्माण में सौर सेल बुनियादी तत्व हैं। चीन से आयात किए जा रहे सोलर सेल भारत में उत्पादित सोलर सेल की तुलना में 15% से 20% कम महंगे हैं। यह स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल का उपयोग करके उत्पादित सौर मॉड्यूल (Solar Module) के व्यवसाय को प्रभावित कर रहा है। अंततः यह घरेलू सौर मॉड्यूल की कीमत बढ़ा रहा है।

इससे पहले की भारत सरकार की कार्रवाई

भारत सरकार ने 2018 में मलेशिया और चीन से सौर आयात पर 25% सुरक्षा शुल्क लगाया था। इसे बाद में 15% की दर से जुलाई, 2021 तक बढ़ा दिया गया था। इस रक्षोपाय शुल्क (safeguard duty) के लागू होने के बाद थाईलैंड और वियतनाम से आयात में वृद्धि हुई है। 2018 और 2020 के बीच, थाईलैंड और वियतनाम से सोलर सेल का आयात क्रमशः 5,750% और 800% बढ़ा!

इसके अलावा, सरकार द्वारा 2017 में मलेशिया, ताइवान और चीन से सौर सेल के आयात के खिलाफ डंपिंग रोधी जांच शुरू की गई थी। हालांकि, इसे अंततः 2018 को बंद कर दिया गया था।

भारत सरकार ने सौर मॉड्यूल निर्माण के लिए 4,500 रुपये की उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (Production Linked Incentive Scheme – PLI) लांच की है।

वर्तमान परिदृश्य

वर्तमान में, मॉड्यूल बनाने की क्षमता 10 GW और घरेलू सेल निर्माण क्षमता लगभग 3 GW है।

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