भारत ने 2030 के लिए तय किए गये 40% गैर-जीवाश्म ईंधन के लक्ष्य को 2021 में ही पूरा कर लिया : भारत सरकार

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की है कि भारत अपने गैर-जीवाश्म ईंधन लक्ष्य को 2030 से काफी पहले प्राप्त कर चुका है।

मुख्य बिंदु 

COP21 में, भारत ने गैर-नवीकरणीय स्रोतों से कुल विद्युत ऊर्जा का 40% स्थापित करने का वचन दिया था। भारत ने इस लक्ष्य को 2030 तक हासिल करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन अब इसने नवंबर 2021 में तक यह लक्ष्य हासिल कर लिया है।

भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 392.01 GW है। इसमें से कुल गैर-जीवाश्म-ईंधन आधारित ऊर्जा 157.32 गीगावॉट है। यह 392.01 GW का 40.1% है।

भारत ने इतनी जल्दी लक्ष्य कैसे हासिल कर लिया?

प्राप्त लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions – NDC) का एक हिस्सा है। 2015 के पेरिस समझौते में NDC का वादा किया गया था। भारत इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद से NDC को बहुत ईमानदारी से लागू करने का इच्छुक था। भारत एकमात्र G-20 देश है जो अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा कर रहा है। इससे भारत को लक्ष्य जल्दी हासिल करने में मदद मिली। NDC के तहत, भारत ने जीवाश्म ईंधन से अपनी कुल बिजली उत्पादन को देश में कुल बिजली उत्पादन का 40% तक बढ़ाने का संकल्प लिया था। भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन को 33 प्रतिशत कम करने का संकल्प लिया था।

लक्ष्य प्राप्त करने के लिए क्या कदम उठाए गए?

  • भारत ने अक्षय ऊर्जा कार्यक्रमों में अपना निवेश बढ़ाया। REN21 रिन्यूएबल्स 2020 ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में कुल 64.6 बिलियन अमरीकी डालर का निवेश किया। अकेले 2019 में, भारत ने इस क्षेत्र में 11.2 बिलियन अमरीकी डालर का निवेश किया।
  • 2015 और 2021 के बीच, भारत के गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 7.27 बिलियन अमरीकी डालर था।

उपलब्धि में AGC की भूमिका

AGC ऑटोमेटिक जेनरेशन कंट्रोल है। AGC का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली स्थापित करना है। AGC का संचालन POSOCO (पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉर्पोरेशन) द्वारा किया जाता है। AGC के तहत अब तक 51 गीगावाट बिजली सुविधा की स्थापना की  जा चुकी है।

AGC क्या करता है?

नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर AGC के जरिए 50 बिजली संयंत्रों को सिग्नल (फ्रीक्वेंसी मॉनिटरिंग डेटा) भेजता है। यह डेटा हर चार सेकंड में भेजा जाता है। विद्युत प्रवाह की आवृत्ति (frequency) आपूर्ति और मांग के साथ बदलती है। राष्ट्रीय विद्युत प्रणाली की निरंतर आवृत्ति बनाए रखना आवश्यक है। भारतीय बिजली की आवृत्ति 50 हर्ट्ज़ है। सभी घरेलू सामान इसी आवृत्ति (frequency) पर चलते हैं। आवृत्ति में परिवर्तन से माल को नुकसान होता है। भारतीय विद्युत नियम, 1956 48.5 Hz और 51.5 Hz के बीच परिवर्तन की अनुमति देता है, जो कि +/- 3% है। 

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