भारत सरकार ने 17 मिलियन टन सरसों उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की कि यह सरसों की खेती के तहत नौ मिलियन टन भूमि को लायेगा। इससे सरसों का उत्पादन 2025-26 तक बढ़कर 17 मिलियन टन हो जाएगा।

वर्तमान परिदृश्य

भारत में औसत सरसों का उत्पादन, यानी 2015 और 2019 के बीच सरसों का उत्पादन 7.7 मिलियन टन था। यह 5.9 मिलियन हेक्टेयर भूमि से उत्पादित किया गया था।

मामला क्या है?

भारत खाद्य तेल की जरूरत का लगभग 70% आयात करता है। इसमें से पाम ऑयल सबसे ज्यादा है। भारत को तेल में आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता है। इसे प्राप्त करने के लिए, भारत सरकार तेल बीज उत्पादन को बढ़ाने की योजना बना रही है। हालांकि, समस्या कम उत्पादकता है, यानी प्रति हेक्टेयर उत्पादित सरसों कम है।

वर्तमान में, राजस्थान भारत में कुल सरसों का 40.82% उत्पादन करता है। यह देश का सर्वाधिक सरसों उत्पादक राज्य है।

योजना क्या है?

लक्ष्य प्राप्त करने के लिए, भारत सरकार वर्ष 2021-22 के लिए 7.58 मिलियन हेक्टेयर को लक्षित करने की योजना बना रही है। इस भूमि से लगभग 12.24 मिलियन टन का उत्पादन किया जायेगा।

2020 में, भारत सरकार ने 13 राज्यों के 368 जिलों को सरसों की खेती के लिए लक्षित किया। यह सरसों मिशन (Mustard Mission) के तहत किया गया था। 2020 में, भारत सरकार ने सरसों मिशन पर 160 करोड़ रुपये खर्च किए। चालू वित्त वर्ष के लिए भी इसे जारी रखा जायेगा।

उत्पादकता बढ़ाने के लिए, भारत सरकार ने उच्च गुणवत्ता वाले सरसों के बीज का उपयोग करने की योजना बनाई है। इससे पैदावार 20% से बढ़कर 100% हो जाएगी।

पीली क्रांति की उपलब्धि (Achievement of Yellow Revolution)

1986 में, तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने पीली क्रांति (Yellow Revolution) की शुरुआत की। यह तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन (Oilseeds Technology Mission) पर आधारित था। यह एक बड़ी सफलता थी। 1993 तक, भारत खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया। पीली क्रांति के माध्यम से भारत ने देश के भीतर 97% खाद्य तेल की आवश्यकता का उत्पादन किया।

सैम पित्रोदा को “पीली क्रांति का जनक” कहा जाता है। इसमें नौ तिलहन पर ध्यान केंद्रित किया गया। वे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, तिल, कुसुम, निगर, सूरजमुखी, अरंडी और अलसी थे।

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