मिशन कोविड सुरक्षा क्या है?

हाल ही में भारत सरकार ने देश में वैक्सीन के विकास में तेजी लाने के लिए ‘मिशन कोविड सुरक्षा’ को लांच किया। यह सुनिश्चित करेगा कि विकसित किए जा रहे टीकों को बाजार के करीब लाया जाए।

वित्त मंत्री ने हाल ही में चौथे आर्थिक पैकेज के तहत 2.65 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसमें से COVID-19 वैक्सीन के विकास में तेजी लाने के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग को 900 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस धनराशी का उपयोग मिशन कोविड सुरक्षा के प्रथम चरण के क्रियान्वयन के लिए किया जायेगा। इसका प्रथम चरण 12 महीने तक चलेगा। आवंटित धनराशि का उपयोग वैक्सीन के विकास और वैक्सीन के लाइसेंस के लिए किया जायेगा जो नैदानिक ​​चरण में हैं या नैदानिक ​​चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं। जैव प्रौद्योगिकी विभाग वर्तमान में दस टीकों के विकास का समर्थन कर रहा है।

मिशन कोविड सुरक्षा क्या है?

यह मिशन प्री-क्लिनिकल फेज़ से लेकर विनिर्माण और नियामक सुविधा के लिए COVID-19 वैक्सीन विकास की परिकल्पना करेगा।  इस मिशन की अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाएँ इस प्रकार हैं :

  • क्लिनिकल ट्रायल के लिए साइट्स स्थापित करना
  • मौजूदा प्रयोगशालाओं को मजबूत करना
  • पशु अध्ययन के लिए उपयुक्त सुविधाओं को मजबूत करना
  • क्लिनिकल साइट्स की स्थापना करना
  • डेटा प्रबंधन प्रणाली, प्रशिक्षण, मान्यता, बाहरी गुणवत्ता प्रबंधन और सामान्य सामंजस्यपूर्ण प्रोटोकॉल के लिए सहायता
  • यह मिशन सेल लाइन डेवलपमेंट का समर्थन करेगा।सेल लाइन एक कोशिका से विकसित सेल कल्चर है।

इस मिशन को India Coalition for Epidemic Preparedness Innovations (Ind-CEPI) और नेशनल बायो फार्मा मिशन द्वारा समर्थन दिया जायेगा।

Ind-CEPI क्या है?

इस मिशन को मार्च 2019 में 312 करोड़ रुपये की लागत से लॉन्च किया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत में महामारी के लिए टीकों के विकास को मजबूत करना है।

 उद्देश्य

यह मिशन उनके परीक्षण के चरण 2 तक कम से कम दो से तीन टीकों के विकास का समर्थन करेगा। यह उद्योग-शिक्षा इंटरफेस के माध्यम से टीका विकास के बुनियादी ढांचे के समर्थन को मजबूत करेगा। यह मिशन वैक्सीन के विकास को गति देने के लिए अंतर-मंत्रालय समन्वय को मजबूत करने के लिए काम करेगा। यह नए टीकों के उपयोग के लिए निगरानी, ​​विकास ढांचे और लॉजिस्टिक्स को भी मजबूत करेगा।

CEPI क्या है?

CEPI का अर्थ Coalition for Epidemic preparedness Innovations है। यह एक फाउंडेशन है जिसे 2017 में विश्व आर्थिक फोरम, भारत, नॉर्वे, बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना स्विट्जरलैंड के दावोस में हुई थी। सीईपीआई का मुख्यालय ओस्लो, नॉर्वे में स्थित है। CEPI सार्वजनिक, निजी और परोपकारी संगठनों से दान लेकर टीके विकसित करने वाली स्वतंत्र अनुसंधान परियोजनाओं का वित्तपोषण करता है।

सीईपीआई ने कार्यक्रम में कैसे मदद की है?

CEPI ने अब तक भारत में निप्पा वायरस, लासा, चिकनगुनिया, MERS और RFV के लिए प्राथमिकता वाले अभ्यास किए हैं।

राष्ट्रीय बायो फार्मा मिशन क्या है?

राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन का क्रियान्वयन जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) द्वारा किया जा रहा है। यह उद्योग-अकादमिक सहयोग के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। यह मिशन देश में बायोफार्मास्युटिकल विकास को गति देता है। इस मिशन को 2017 में 1500 करोड़ रुपये की लागत से लॉन्च किया गया था। यह मिशन 50% विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित है।

मिशन के तहत I3 कार्यक्रम क्या है?

इनोवेट इन इंडिया, I3 कार्यक्रम को इस मिशन के तहत लांच किया गया था। यह जैव फार्मा क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाता है।

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