म्यांमार पर आसियान की पहल : मुख्य बिंदु

भारत सरकार ने हाल ही में म्यांमार पर आसियान पहल का स्वागत किया है।

म्यांमार पर आसियान की पहल

आसियान (ASEAN) देशों ने म्यांमार संकट पर पांच सूत्रीय बयान जारी किया है। इस बयान के तहत, आसियान देशों ने “हिंसा के तत्काल समाप्ति” की मांग की है। इस पहल के पांच बिंदु इस प्रकार हैं:

  • हिंसा को समाप्त करना
  • सभी पक्षों के बीच रचनात्मक संवाद का आयोजन करना
  • सर्वदलीय संवाद को सुविधाजनक बनाने के लिए एक विशेष आसियान दूत की नियुक्ति
  • सहायता की स्वीकृति
  • विशेष आसियान दूत सैन्य नेता के साथ म्यांमार में का दौरा करेंगे

मामला क्या है?

फरवरी, 2021 में म्यांमार की सेना ने आंग सान सू की (Aung San Suu Kyi) के नेतृत्व वाली सरकार को बर्खास्त कर दिया था।

आलोचना

पांच-बिंदु वाली आम सहमति आसियान देशों और वर्तमान सैन्य नेता के बीच बनाई गई थी जिन्होंने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था। सैन्य तख्तापलट के बाद से देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इस सहमति की आलोचना की जा रही है कि आसियान सैन्य तख्तापलट को प्रोत्साहित कर रहा है। इसके अलावा, सर्वसम्मति में एक समयरेखा का उल्लेख नहीं किया गया था। इसने म्यांमार में राजनीतिक कैदियों की भी उपेक्षा की।

ब्रुनेई आसियान का वर्तमान अध्यक्ष है।

म्यांमार का मुद्दा : गहन विश्लेषण

म्यांमार ने 1948 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त की। 1962 और 2011 के बीच, देश पर सशस्त्र बलों का शासन था। यह शासक सेना ही थी जिसने बर्मा का नाम म्यांमार में बदल दिया।

1988 में म्यांमार के पिता (आंग सान) की बेटी आंग सान सू की म्यांमार लौट आईं। उन्हें 1989 में सेना द्वारा नजरबंद कर दिया गया। 2010 में सू की को मुक्त कर दिया गया। 2012 में, उन्होंने एक उप-चुनाव जीता और संसद में एक सीट प्राप्त की।

2015 में, नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने चुनाव जीते। हालांकि, सेना ने सू की को राष्ट्रपति पद से हटा दिया। सू की को सरकार चलाने के लिए स्टेट काउंसलर का पद बनाया गया था।

फरवरी 2021 के चुनावों में, नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ने फिर से चुनाव जीते। इसके बाद म्यांमार सेना ने आपातकाल की स्थिति घोषित की। यह भी घोषित किया कि तमाम शक्तियां कमांडर-इन-चीफ ऑफ डिफेंस सर्विसेज को हस्तांतरित की जा रही है।

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