यूनाइटेड किंगडम ने संयुक्त राष्ट्र परिवार नियोजन कार्यक्रम के लिए अपनी सहायता में कटौती की

यूनाइटेड किंगडम ने संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक परिवार नियोजन कार्यक्रम (United Nations Global Family Planning Programme) के लिए अपने फंड में कटौती करने का निर्णय लिया है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UN Population Fund) के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम ने 154 मिलियन यूरो की प्रतिबद्धता की थी। हालांकि, अब यूनाइटेड किंगडम केवल 23 मिलियन यूरो उपलब्ध करवाएगा।

मुख्य बिंदु

2020 में, यूके सरकार ने घोषणा की कि वह अपनी राष्ट्रीय सहायता व्यय को राष्ट्रीय आय के 0.7% से घटाकर अपनी राष्ट्रीय आय का 0.5% कर देगी। यह कटौती 4 बिलियन यूरो के बराबर है।

संयुक्त राष्ट्र परिवार नियोजन कार्यक्रम के लिए यूके के फंड से सबसे गरीब देशों में लाखों महिलाओं के लिए मातृ स्वास्थ्य देखभाल और गर्भ निरोधकों के प्रावधान शामिल हैं।

परिणाम

लगभग 217 मिलियन महिलाएं गर्भधारण से बचना चाहती हैं। लेकिन आधुनिक गर्भ निरोधकों तक उनकी पहुंच नहीं है। इस फंड कटौती का उन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

यूके के फंड्स से 2,50,000 मातृ मृत्यु और बाल मृत्यु की रक्षा में मदद हो सकती थी। यह फण्ड 14.6 मिलियन अनपेक्षित गर्भधारण और 4.3 मिलियन असुरक्षित गर्भपात से बचा सकता था।

यूके की सहायता

2020 में, ब्रिटेन ने अंतर्राष्ट्रीय सहायता प्रदान करने में 14.5 बिलियन यूरो खर्च किए। आज, यूके दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दान देने वाला देश है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UN Population Fund)

इसकी स्थापना 1967 में हुई थी। यह संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट से जुड़ा हुआ नहीं है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुसार, भारत 2028 में सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा।

भारत में जनसंख्या

भारत की जनसंख्या 1.36 बिलियन है। भारत में मातृ मृत्यु दर 2015 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों में 174 थी। भारत की प्रजनन दर 2.3 प्रति महिला जन्म है। यह दुनिया की प्रजनन दर 2.5 की तुलना में कम है।

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