रूस ने यूक्रेन के पास सैन्य अभ्यास आयोजित किया

रूस ने हाल ही में क्रीमिया से जुड़े क्षेत्र में सैन्य अभ्यास किया। इस अभ्यास में 6,000 से अधिक सैनिकों ने भाग लिया। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में रूस और यूक्रेन के बीच तनाव का माहौल बना है और रूस ने यूक्रेन की सीमा पर पहले ही एक लाख सैनिक तैनात कर दिए हैं।

रूस ने यह अभ्यास क्यों किया?

यह अभ्यास अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किया गया था। रूस के मुताबिक अमेरिका अपने सैनिकों को अलर्ट पर रख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में यूरोपीय नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद, बाईडेन ने घोषणा की कि रूस से निपटने पर “पूर्ण एकमत” है। साथ ही अमेरिका ने 8,500 सैनिकों को स्टैंडबाय पर रखा है। साथ ही अमेरिका पूर्वी यूरोपीय देशों की रक्षा को मजबूत करने के लिए जहाज भेज रहा है। रूस के इस अभ्यास को इन कार्रवाइयों की जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। 

इस ड्रिल में बमवर्षक विमान, लड़ाकू जेट, विमान-रोधी प्रणालियाँ, कैस्पियन सागर के बेड़े और काला सागर बेड़े के जहाज़ शामिल थे।

यूक्रेन

1991 में सोवियत संघ के विघटन से पहले यूक्रेन सोवियत संघ के साथ था। अमेरिका और कई अन्य यूरोपीय देश विघटन के बाद से यूक्रेन का समर्थन करते रहे हैं। अमेरिका का मानना ​​है कि रूस यूक्रेन पर कब्जा करना चाहता है। रूस इस आरोप को खारिज कर रहा है।

नाटो (NATO)

नाटो चाहता है कि रूस यूक्रेन की सीमा से अपनी सेना हटा ले। नाटो ने रूस को चेतावनी दी है कि अगर वह यूक्रेन पर हमला करता है तो उसे गंभीर आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। नाटो (NATO) का अर्थ उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization) है। यह अमेरिका और 27 अन्य यूरोपीय देशों द्वारा गठित एक अंतर सरकारी संगठन है।

पेरिस वार्ता

यह अभ्यास यूक्रेन पर चतुष्कोणीय की पेरिस वार्ता के दौरान किया गया है। इसे “नॉरमैंडी वार्ता” (Normandy Talks) भी कहा जाता है। इससे तनाव और बढ़ रहा है। यह वार्ता रूस, जर्मनी, यूक्रेन और फ्रांस के बीच आयोजित की गई। यह वार्ता पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने के लिए आयोजित की गई थी। इस वार्ता का उद्देश्य रूसी समर्थक अलगाववादियों और यूक्रेनी सरकारी बलों के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष को समाप्त करना था।

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