सर्कुलर इकोनॉमी की ओर देश को ले जाने के लिए 11 समितियां गठित की गईं

केंद्र सरकार ने 11 समितियां बनाई हैं, जिनका नेतृत्व संबंधित मंत्रालय, पर्यावरण और वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और नीति आयोग के अधिकारी करेंगे। यह समितियां एक रेखीय अर्थव्यवस्था से सर्कुलर अर्थव्यवस्था में भारत के परिवर्तन के लिए कार्य करेंगी।

मुख्य बिंदु

ये समितियां संबंधित फोकस क्षेत्रों में रैखिक (linear) से परिपत्र अर्थव्यवस्था (circular economy) में परिवर्तन के लिए मदद करने के लिए व्यापक कार्य योजना तैयार करेंगी। यह समिति आवश्यक तौर-तरीके भी अपनाएगी, जो निष्कर्षों और सिफारिशों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे।

फोकस क्षेत्रों

सरकार ने रैखिक अर्थव्यवस्था से परिपत्र अर्थव्यवस्था में स्थानांतरित करने के लिए 11 फोकस क्षेत्र का चयन किया है। इन क्षेत्रों में शामिल हैं: नगरपालिका ठोस अपशिष्ट और तरल अपशिष्ट, इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट, स्क्रैप धातु (लौह और अलौह), सौर पैनल, जिप्सम, लिथियम-आयन बैटरी, कृषि अपशिष्ट, विषाक्त खतरनाक औद्योगिक अपशिष्ट, प्रयुक्त तेल अपशिष्ट, टायर और रबर पुनर्चक्रण और ELVs (End-of-life Vehicles)।

परिवर्तन की आवश्यकता

सतत विकास आत्मनिर्भर भारत पहल का प्रमुख तत्व है। इसलिए, भारत को संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए एक विकास मॉडल की आवश्यकता है। इस प्रकार, जलवायु परिवर्तन, बढ़ती जनसंख्या, तेजी से शहरीकरण और पर्यावरण प्रदूषण के चलते परिपत्र अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने की आवश्यकता है।

परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy)

यह एक आर्थिक प्रणाली है जिसका उद्देश्य कचरे  को कम करना है और पुनःउपयोग को बढ़ावा देना है। यह प्रणाली पुन: उपयोग, मरम्मत, साझाकरण, नवीनीकरण, पुन: निर्माण और पुनर्चक्रण पर फोकस करती है।  यह प्रदूषण, अपशिष्ट और कार्बन उत्सर्जन को भी कम करती है।

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