1 साल में दिल्ली का NO2 प्रदूषण 125% बढ़ा : ग्रीनपीस (Greenpeace)

गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), ग्रीनपीस (Greenpeace) के एक अध्ययन के अनुसार, पिछले एक साल की अवधि के दौरान दिल्ली में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) में 125% की वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • इस अध्ययन ने भारत के 8 सबसे अधिक आबादी वाले शहरों, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, जयपुर और लखनऊ में NO2 सांद्रता (concentration) का विश्लेषण किया।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, सभी आठ राजधानियों के शहरों में अप्रैल 2020 से अप्रैल 2021 के बीच NO2 प्रदूषण बढ़ा है।
  • दिल्ली ने इस अवधि के दौरान सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की।
  • हैदराबाद में, NO2 प्रदूषण में 69% की वृद्धि हुई।
  • इसी अवधि के दौरान चेन्नई में 94%, बेंगलुरु में 90%, मुंबई में 69 52%, जयपुर में 47%, लखनऊ में 32% और कोलकाता में 11% की वृद्धि हुई।

NO2 क्या है?

NO2 नाइट्रिक एसिड के औद्योगिक संश्लेषण में एक मध्यवर्ती (intermediate) है। यह उच्च तापमान पर लाल-भूरे रंग की गैस है। बड़ी मात्रा में साँस द्वारा लेने पर यह घातक हो सकता है क्योंकि यह एक खतरनाक वायु प्रदूषक है। यह तब जारी किया जाता है जब ईंधन को मोटर वाहनों, बिजली उत्पादन या औद्योगिक प्रक्रियाओं में जलाया जाता है। NO2 को U.S. Emergency Planning and Community Right-to-Know Act की धारा 302 के तहत अमेरिका में एक अत्यंत खतरनाक पदार्थ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

NO2 का प्रभाव

NO2 के संपर्क में आने से सभी उम्र के लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। यह श्वसन और संचार प्रणाली और मस्तिष्क को प्रभावित करता है। वातावरण में मौजूद पानी, ऑक्सीजन और अन्य रसायनों के साथ NO2 और अन्य NOx की परस्पर क्रिया अम्लीय वर्षा का कारण बन सकती है जो संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचाती है। NO2 का बढ़ा हुआ स्तर भी वनस्पति को नुकसान पहुंचा सकता है, और फसल की पैदावार को कम कर सकता है।

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