20,000 करोड़ रुपये की पूंजी के साथ मंत्रिमंडल ने DFI को मंजूरी दी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 16 मार्च, 2021 को घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20,000 करोड़ रुपये के पूंजी के साथ “विकास वित्त संस्थान (DFI)” के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव को देश में बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने के लिए मंजूरी दी गई है।

पृष्ठभूमि

इसकी घोषणा 1 फरवरी, 2021 को केंद्रीय बजट 2021-2022 के भाषण के दौरान वित्त मंत्री द्वारा की गई थी। इस घोषणा के बाद, राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (National Infrastructure Pipeline-NIP) के तहत कुछ 7,000 परियोजनाओं की पहचान की गई है। सरकार ने 2020-25 की अवधि के लिए 111 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगाया है।

विकास वित्त संस्थान (Development Finance Institution-DFI)

दीर्घकालिक वित्त जुटाने के लिए विकास वित्त संस्थान की स्थापना की जाएगी। 10 वर्षों की अवधि के लिए DFI पर कुछ कर लाभ भी होंगे। DFI में एक पेशेवर बोर्ड शामिल होगा जिसमें 50 प्रतिशत सदस्य गैर-आधिकारिक निदेशक होंगे। इसके तहत प्रारंभिक अनुदान 5,000 करोड़ रुपये की होगी।  शुरुआती चरण में, नए संस्थान का स्वामित्व सरकार के पास होगा जबकि बाद के चरण में, सरकार की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत तक कम की जाएगी।

DFI का महत्व

सरकार डीएफआई को प्रतिभूतियां जारी करने की भी योजना बना रही है जो बदले में फंड्स की लागत को कम करने में मदद करेगी। इससे संस्था को कई स्रोतों से प्रारंभिक पूंजी और फंड प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह भारत में बांड बाजार पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। यह संस्थान नई परियोजनाओं में निवेश करने के लिए वैश्विक पेंशन और बीमा क्षेत्रों से धन जुटाने का प्रयास भी करेगा।

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