ART और सरोगेसी पर बिल राज्यसभा द्वारा पारित किये गये

राज्यसभा ने 8 दिसंबर, 2021 को विपक्ष की अनुपस्थिति में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक, 2020 और सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2020 पारित किया। इस बिल ने एकल पुरुषों, लिव-इन जोड़ों और LGBT समुदाय को बाहर रखा है। 

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार 2008 से ART (Assisted Reproductive Technology) उद्योग को विनियमित करने के लिए विधेयक पर काम कर रही थी। इस विधेयक का मसौदा सबसे पहले भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने तैयार किया था। इसे पहली बार 2020 में लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन इसने बिल को एक स्थायी समिति के पास भेज दिया।

ART विधेयक के प्रावधान

  1. इस विधेयक में सभी चिकित्सा पेशेवरों और क्लीनिकों के लिए “राष्ट्रीय रजिस्ट्री और पंजीकरण प्राधिकरण” (National Registry and Registration Authority) स्थापित करने का प्रस्ताव है। यह प्राधिकरण क्षेत्र में काम करने वाले सभी क्लीनिकों और पेशेवरों के डेटाबेस को बनाए रखने में मदद करेगा। पंजीकरण प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य सरकारों द्वारा पंजीकरण अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
  2. यह विधेयक सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) क्लीनिकों और ART बैंकों को विनियमित और पर्यवेक्षण करने, सुरक्षित और नैतिक प्रथाओं को अपनाने और दुरुपयोग को रोकने का भी प्रयास करता है।
  3. इसमें एक राष्ट्रीय बोर्ड के गठन का भी प्रस्ताव है। यह बोर्ड भौतिक बुनियादी ढांचे, नैदानिक ​​उपकरण, विशेषज्ञ जनशक्ति और प्रयोगशाला के न्यूनतम मानक तय करेगा।
  4. यह विधेयक लिंग चयन और मानव भ्रूण या युग्मक की बिक्री करने वाले लोगों के लिए कड़ी सजा की व्यवस्था करता है।

कानून के उल्लंघन पर जुर्माना

  • इस बिल में पहली बार के अपराधियों के लिए 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
  • बाद के उल्लंघनों में 8 से 12 साल की कैद और 10 से 20 लाख रुपये के बीच जुर्माना हो सकता है।

बिल की आवश्यकता

प्रोटोकॉल को मानकीकृत करने के लिए इस बिल की आवश्यकता थी। कई ART क्लीनिक ऐसे हैं जो बिना नियमन के चल रहे हैं। इसके अलावा, प्रक्रिया में भाग लेने वालों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार, अनैतिक प्रथाओं को रोकने के लिए एक मानक प्रोटोकॉल की आवश्यकता है।

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