S&P ने वित्त वर्ष 22 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाकर 9.8% किया

अमेरिका बेस्ड रेटिंग एजेंसी S&P ने हाल ही में 2021-22 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 9.8% तक घटा दिया है। मार्च 2021 में, इस एजेंसी ने भारत के लिए  11% जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया था। इस एजेंसी के अनुसार, दूसरी लहर रिकवरी को पटरी से उतार सकती है।

हाल ही में आरबीआई द्वारा आर्थिक सुधार की दिशा में कदम उठाए

  • आरबीआई ने बैंकों को 4% की रेपो दर पर 50,000 करोड़ रुपये उधार लेने की स्वतंत्रता प्रदान की है। इन ऋणों को COVID ऋण के रूप में वर्गीकृत किया जाना है। इन ऋणों का क्रेडिट जोखिम बैंकों द्वारा वहन किया जायेगा।
  • स्मॉल फाइनेंस बैंकों को रेपो रेट पर 10,000 करोड़ रुपये उधार लेने का विकल्प दिया गया है। यह मुख्य रूप से अनौपचारिक क्षेत्र की मदद करने के लिए किया गया है जिसमें दैनिक वेतन मजदूर और विक्रेता शामिल होते हैं।
  • आरबीआई ने छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार वाले व्यक्तियों की मदद के लिए रिज़ॉल्यूशन फ्रेमवर्क (Resolution Framework 2.0) पेश किया है। इस ढांचे के तहत, जो लोग पहले पुनर्गठन  (restructuring) का लाभ नहीं उठा पाए, वे अब पात्र हैं।
  • हाल ही में, G-SAP 1.0 के दूसरे दौर की घोषणा की गई है।

दूसरी लहर के प्रभाव

देश का मध्यम वर्ग पहले से ही लॉक-डाउन के कारण नौकरी जाने और वेतन कटौती से प्रभावित था। दूसरी लहर इन नुकसानों को और गहरा कर सकती है।

प्रमुख शहरों में रेस्तरां और आतिथ्य व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यात्रा और पर्यटन भारत में सबसे बड़े रोज़गार देने वाले उद्योग हैं। देश की जीडीपी में इनका योगदान 9% है। रिकवरी चरण के दौरान दूसरी लहर के कारण लॉकडाउन प्रतिबंध और यात्रा प्रतिबंध दिवालियापन को और बढ़ा सकते हैं।

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