नयी विदेशी ऋण नीति

भारतीय रिज़र्व बैंक ने विदेशों से ऋण लेने के लिए नयी नीति शुरू है, इस नीति की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं :

  • नयी नीति के तहत योग्य ऋण लेने वाले एक्सटर्नल कमर्शियल बोर्रोविंग के तहत प्रति वित्त वर्ष 750 मिलियन डॉलर तक का ऋण ले सकते हैं।
  • एक्सटर्नल कमर्शियल बोर्रोविंग के फ्रेमवर्क को उदार बनाने तथा रुपये में बांड ट्रैक्स I व II का विलय “विदेशी मुद्रा बाह्य वाणिज्यिक ऋण” में कर दिया गया है।
  • सभी बाह्य वाणिज्यिक ऋण के लिए न्यूनतम औसत मैच्योरिटी अवधि को तीन वर्ष रखा गया है।
  • योग्य ऋण लेने वालों की सूची का विस्तार किया गया है, इसमें उन सभी इकाइयों को शामिल किया गया है जो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त कर सकती हैं।
  • नई नीति के तहत पोर्ट ट्रस्ट, SEZ इकाईयां, SIDBI, EXIM बैंक, सूक्ष्म वित्त गतिविधियों में शामिल पंजीकृत इकाईयां, पंजीकृत सोसाइटी/ट्रस्ट/कोआपरेटिव तथा गैर-सरकार संगठन ऋण ले सकते हैं।
  • बाह्य वाणिज्यिक ऋण का उपयोग रियल एस्टेट गतिविधियों, पूँजी बाज़ार में निवेश, इक्विटी निवेश, कार्यशील पूँजी इत्यादि के लिए नहीं किया जा सकता है।

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