मानव अन्तरिक्ष उड़ान के लिए भारत और रूस के बीच MoU को कैबिनेट ने मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मानव अन्तरिक्ष उड़ान के लिए भारत और रूस के बीच MoU को कैबिनेट ने मंज़ूरी दी। इस समझौते के तहत रूस रेडिएशन शील्ड, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, क्रू मोड्यूल, डॉकिंग सिस्टम तथा अन्तरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण के लिए दोनों देश मिलकर कार्य करेंगे।

मुख्य बिंदु

इस MoU के तहत अन्तरिक्ष में मानव उड़ान कार्यक्रम के लिए रोसकॉसमॉस ने भारतीय अन्तरिक्षयात्रियों को सोयुज़ स्पेसक्राफ्ट में अंतर्राष्ट्रीय स्पसक्रेफ्त मे प्रशिक्षण के लिए पेशकश की है। अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्थान एक किस्म का रहने योग्य सैटेलाइट है जो पृथ्वी की निचली कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है। रूस ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की रूस यात्रा के दौरान भी भारतीय अन्तरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव दिया था।

दोनों देशों के बीच अन्तरिक्ष सहयोग के सन्दर्भ में सम्बन्ध काफी पुराने हैं। आरम्भ में सोवियत संघ ने भारतीय अन्तरिक्ष कार्यक्रम को शुरू करने में काफी सहायता की। इसके अलावा सोवियत संघ के सोयुज़ स्पेसक्राफ्ट में राकेश शर्मा को अंतिरक्ष में भेजा गया था, वे अन्तरिक्ष यात्रा करने वाले पहले भारतीय थे। वे सोवियत संघ के सोयुज़ T-11 अभियान का हिस्सा थे, इस मिशन 2 अप्रैल, 1984 को लांच किया गया था।

मिशन गगनयान

इस मिशन को 2022 में लांच किया जायेगा। इस मिशन में तीन अन्तरिक्ष यात्रियों को अन्तरिक्ष में भेजा जायेगा। यह इसरो का पहला मानव मिशन होगा। यदि यह मिशन सफल रहता है तो भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद अन्तरिक्ष में मानव भेजने वाला विश्व का चौथा देश बन जायेगा। राकेश शर्मा प्रथम भारतीय अन्तरिक्ष यात्री थे, वे सोवियत संघ के सोयुज़ टी-11 अभियान के सदस्य थे। वह मिशन 2 अप्रैल, 1984 को लांच किया गया था। गगनयान मिशन की लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये आएगी। यह मिशन पूर्ण रूप से स्वदेशी होगा। इस मिशन के वास्तविक लांच से पहले इसरो बिना मानव के दो मिशन लांच करेगा, पहला मिशन 30 महीने में तथा दूसरा मिशन 36 महीने बाद लांच किया जायेगा।

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