अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

इस श्रेणी में हिन्दी भाषा में अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स एवं समसामयिक घटनाक्रम का SSC, Railways, RAS/RPSC, BPSC, MPPSC, JPSC, HPSC, UPPSC, UKPSC एवं अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण समाचारों का संग्रह किया गया है।

फैक्ट शीट : भारत-ज़ाम्बिया सम्बन्ध

हाल ही में उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने ज़ाम्बिया के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से नई दिल्ली में मुलाकात की। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के सदस्य के रूप में ज़ाम्बिया का स्वागत किया तथा उन्होंने शीघ्र ही अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन फ्रेमवर्क समझौते को पारित किये जाने की उम्मीद जताई।

भारत-ज़ाम्बिया सम्बन्ध

  • भारत और ज़ाम्बिया के बीच सम्बन्ध काफी मैत्रीपूर्ण हैं।
  • 1964 में ज़ाम्बिया की स्वतंत्रता के बाद के भारत ज़ाम्बिया को सबसे पहले मान्यता देने वालों देशों में से एक था।
  • भारत ने विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा जाम्बिया के आर्थिक व तकनीकी विकास में सहयोग किया है।
  • 2010 में भारत ने ज़ाम्बिया की विकास आवश्यकताओं के लिए 75 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन जारी की थी।
  • इसके अतिरिक्त 2010 में भारत में ज़ाम्बिया को स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए 5 मिलियन डॉलर की ग्रांट प्रदान की थी।
  • भारत ने ज़ाम्बिया को शुल्क मुक्त तथा कोटा मुक्त श्रेणी में शामिल किया है।
  • भारत तकनीकी तथा सहयोग कार्यक्रम के तहत ज़ाम्बिया के सैन्य व असैन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित करता है।
  • ज़ाम्बिया ने जम्मू-कश्मीर तथा आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत का समर्थन किया है। ज़ाम्बिया ने 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण का समर्थन किया था।
  • ज़ाम्बिया में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।

2010 में भारत और ज़ाम्बिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 200 मिलियन डॉलर था, दोनों देशों ने इसके बढ़ाकर 1 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा था। भारत से ज़ाम्बिया को दवाएं, परिवहन उपकरण, प्लास्टिक तथा केमिकल उत्पाद निर्यात किये जाते हैं। जबकि भारत ज़ाम्बिया से बहुमूल्य धातुओं, अयस्क तथा कपास इत्यादि का आयत करता है।

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अस्मा जहाँगीर को मरणोपरांत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित किया गया

हाल ही में पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मा जहाँगीर को मरणोपरांत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे इस पुरस्कार को जीतने वाली चौथी पाकिस्तानी नागरिक हैं। इससे पहले बेगम राणा लियाकत खान (1978), बेनजीर भुट्टो (2008) तथा मलाल यूसुफ़जई (2013) को भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार

इन पुरस्कारों की स्थापना 1966 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने की थी, इसका उद्देश्य उन व्यक्तियों तथा संगठनों को सम्मानित करना है जिन्होंने मानव अधिकारों की रक्षा व सम्वर्धन के लिए उत्कृष्ठ कार्य किया है। पहली बार यह पुरस्कार 1968 में प्रदान किये गये थे। इन पुरस्काओं को प्रत्येक पांच वर्ष बाद प्रदान किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार 2018 के विजेता

अस्मा जहाँगीर

अस्मा जहाँगीर एक पाकिस्तान मानवाधिकार कार्यकर्ता थीं, उनकी मृत्यु फरवरी, 2018 में हुई थी। वे एक वकील थीं उन्हें महिलाओं के अधिकारों तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने  के लिए जाना जाता था। वे पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय की बार एसोसिएशन की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं। वे पाकिस्तान सेना तथा खुफिया एजेंसियों की आलोचक थीं। इस कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने पाकिस्तान मानव अधिकार आयोग की स्थापना की थी।

रेबेका ग्युमी

रेबेका ग्युमी एक तंज़ानियाई वकील हैं, वे म्सिचाना इनिशिएटिव की संस्थापक हैं। म्सिचाना इनिशिएटिव लड़कियों की शिक्षा के लिए कार्य करता है। वर्ष 2016 में उन्होंने बाल विवाह के विरुद्ध केस में ऐतिहासिक जीत प्राप्त की थी। उन्होंने तंज़ानिया विवाह अधिनियम के विरुद्ध याचिका दायर की थी, इस अधिनियम में 14 वर्ष के विवाह की अनुमति दी गयी थी।

जेओनिया वापिचाना

जेओनिया वापिचाना ब्राज़ील की वकील हैं। उन्हें हाल ही में कांग्रेस के लिए चुना गया। वे ब्राज़ील की पहली मूल निवासी वकील हैं। वे ब्राज़ील में लॉ स्कूल से ग्रेजुएट होने वाली पहली मूल निवासी थीं।

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स आयरलैंड का एक मानवाधिकार संगठन है, यह संगठन मानव अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करती है। इसकी स्थापना 2001 में आयरलैंड की राजधानी डबलिन में की गयी थी।

ट्रिविया : अब तक केवल एक ही भारतीय को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार प्रदान किया गया था। बाबा आमटे को 1988 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार प्रदान किया गया था।

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विश्व आर्थिक फोरम के लिंग भेद सूचकांक में भारत को 108वां स्थान प्राप्त हुआ

हाल ही में विश्व आर्थिक फोरम द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत को लिंग भेद सूचकांक में भारत को 108वां स्थान प्राप्त हुआ। 2017 में भी भारत इसी स्थान पर था।

इस रिपोर्ट को प्रतिवर्ष विश्व आर्थिक फोरम द्वारा 2006 से प्रकाशित किया जा रहा है। लिंग भेद सूचकांक के द्वारा चार मुख्य बिंदुओं- आर्थिक अवसर, राजनीतिक सशक्तिकरण, शिक्षा प्राप्ति तथा स्वास्थ्य में लिंग समानता को मापा जाता है।

इस वर्ष लिंगभेद सूचकांक में आइसलैंड को लगातार 10वीं बार पहला स्थान प्राप्त हुआ है। जबकि नॉर्वे को दूसरा, स्वीडन को तीसरा तथा फ़िनलैंड को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है।

टॉप 10 देश

  1. आइसलैंड
  2. नॉर्वे
  3. स्वीडन
  4. फ़िनलैंड
  5. निकारगुआ
  6. रवांडा
  7. न्यूजीलैंड
  8. फिलीपींस
  9. आयरलैंड
  10. नामीबिया

लिंग भेद सूचकांक 2018 में भारत का प्रदर्शन

  • लिंगभेद सूचकांक 2018 के उप-सूचकांक में मजदूरी दर की समानता में भारत का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।
  • पहली तृतीयक शिक्षा में लिंगभेद पूर्ण रूप से समाप्त हुआ।
  • इस सूचकांक के आर्थिक अवसर उप-सूचकांक में भारत को 149 देशों की सूची में 142वां सूचकांक प्राप्त हुआ।
  • विश्व आर्थिक फोरम के अनुसार भारत को अपनी रैंकिंग में सुधार करने के लिए प्रोफेशनल भूमिकाओं में महिलाओं को बढ़ावा देना होगा।

विश्व आर्थिक फोरम  (WEF)

यह एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है, इसकी स्थापना क्लाउस श्वाब ने सार्वजनिक-निजी सहयोग के द्वारा विश्व की स्थित में सुधार के लिए की थी। इसकी स्थापना 1971 में की गयी थी। इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थित है। यह एक गैर-लाभकारी संगठन है, यह अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करता है। यह संगठन राजनीती, व्यापार, शिक्षा तथा उद्योग इत्यादि विभिन्न क्षेत्रों के लीडर्स के भी कार्य करता है।

 

 

 

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