विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

इस श्रेणी में हिन्दी भाषा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स एवं समसामयिक घटनाक्रम का SSC, Railways, RAS/RPSC, BPSC, MPPSC, JPSC, HPSC, UPPSC, UKPSC एवं अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण समाचारों का संग्रह किया गया है।

हरियाणा के झज्जर में खोला गया राष्ट्रीय कैंसर संस्थान

भारत का सबसे बड़ा कैंसर संस्थान “राष्ट्रीय कैंसर संस्थान” 18 दिसम्बर, 2018 को हरियाणा के झज्जर में खोला गया। आधिकारिक रूप से इस संस्थान का उद्घाटन जनवरी, 2019 में किया जायेगा।

राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की स्थापना दिल्ली के एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) के प्रोजेक्ट के तहत किया गया था। दिल्ली एम्स में इंस्टिट्यूट ऑफ़ रोटरी कैंसर हॉस्पिटल के प्रमुख डॉ. जी. के. रथ राष्ट्रीय कैंसर संस्था के प्रमुख होंगे।

राष्ट्रीय कैंसर संस्थान

  • राष्ट्रीय कैंसर संस्थान का निर्माण 2,035 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
  • वर्तमान में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में 710 बिस्तर की व्यवस्था है, इनमे 200 बिस्तर अनुसंधान प्रोटोकॉल के तहत कैंसर के मरीजों के उपचार के लिए हैं।
  • यह संस्थान देश में कैंसर-सम्बन्धी गतिविधियों के लिए नोडल संस्थान के रूप में कार्य करेगा।
  • इस संस्थान को क्षेत्रीय कैंसर केन्द्रों तथा भारत के अन्य कैंसर संस्थानों से जोड़ा जायेगा।
  • यह संस्थान कैंसर नियंत्रण सम्बन्धी कार्य करेगा, इसके तहत कैंसर की रोकथाम, निदान व उपचार के लिए कार्य किया जायेगा।
  • इस संस्थान में कैंसर के शोध व प्रशिक्षण के लिए व्यवस्था उपलब्ध है।
  • इस संस्थान में कैंसर से सम्बंधित सभी आधुनिकतम उपकरण मौजूद हैं।

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भारत में सैन्य विमान में मिश्रित जेट जैव इंधन का पहली बार उपयोग किया गया

17 दिसम्बर को भारतीय वायुसेना के ए.एन. 32 विमान में मिश्रित जेट जैव इन्धन का उपयोग किया गया, यह एक परीक्षण उड़ान थी। यह परीक्षण उड़ान कर्नाटक के बंगलुरु में भारतीय वायुसेना के परीक्षण स्थल से भरी गयी थी। इस परीक्षण के लिए रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन, विमानिकी गुणवत्ता महानिदेशालय तथा CSIR-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान ने मिलकर कार्य किया था।

मुख्य बिंदु

27 जुलाई, 2018 को भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी. एस. धनोआ ने जैव इन्धन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही थी। भारतीय वायुसेना ने 2019 गणतंत्र दिवस समारोह में फ्लाईपास्ट के लिए ए.एन. विमान में मिश्रित जैव इंधन के उपयोग करने की योजना बनायी है। इसके लिए विमान में 10% मिश्रित जैव इंधन का उपयोग किया जा सकता है।

भारत में उड़ान के लिए जैव इन्धन का उपयोग

जैव इंधन द्वारा चालित भारत की पहली उड़ान में रतनजोत बीज तेल का उपयोग किया गया था, यह उड़ान देहरादून से दिल्ली तक अगस्त, 2018 में भरी गयी थी। इस इंधन में रतनजोत बीज के तेल को हवाई टरबाइन इंधन से मिलाया गया था। 43 मिनट की यह उड़ान स्पाइसजेट के बोम्बार्डीयर Q-400 विमान द्वारा भरी गयी थी। इस उड़ान के दौरान विमान में 20 अधिकारी तथा 5 क्रू मेम्बर्स सवार थे।

इस उड़ान के दौरान विमान के एक इंजन में 25% जैव इंधन (रतनजोत बीज से प्राप्त) तथा 75% हवाई टरबाइन इंधन का मिश्रण था, जबकि विमान के दुसरे इंजन में केवल हवाई टरबाइन इंधन ही था। इस टेस्ट फ्लाइट का उद्देश्य वायुयान में जैव इंधन के उपयोग की तकनीकी सम्भावना को सुनिश्चित था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनुसार हवाई टरबाइन इंधन के साथ 50% तक जैव इंधन का मिश्रण किया जा सकते हैं। इस मिश्रण से लागत में 15-20% की कमी आ सकती है।

रतनजोत

रतनजोत एक शुष्क रोधी पौधा है जो कम उपजाऊ भूमि में उगता है। इसका विकास काफी तीव्र गति से होता है और यह 50 वर्ष तक बीज उत्पन्न करता है। यह देश के कई भागों में पाया जाता है। यह पौधा बहुत कम पोषक तत्वों की सहायता से भी जीवित रह सकता है।

रतनजोत के बीज में 37% तेल होता है। यह बिना धुंए की ज्वाला उत्पन्न करता है। यह वातावरण को अधिक नुकसान नहीं पहुंचाता। इसका उपयोग आरम्भ में डीजल इंजन में इंधन के रूप में किया गया था। रतनजोत का उपयोग कीटनाशक के रूप में भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त रतनजोत का उपयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है।

रतनजोत से प्राप्त जैव इंधन

इसका उत्पादन वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् ने देहरादून में स्थित प्रयोगशाला में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के साथ मिलकर किया गया था। जैव इंधन के रूप में उपयोग के लिए रतनजोत बीज पर वर्ष 2000 में प्रयोग शुरू हुए थे, व्यावहारिक तौर पर जैव इंधन का निर्माण करने के लिए लगभग 8 वर्ष का समय लगा।

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कैगा परमाणु उर्जा स्टेशन ने 941 तक निरंतर कार्य करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया

10 दिसम्बर, 2018 को कैगा परमाणु उर्जा स्टेशन ने लगातार कार्य करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया, इस पॉवर स्टेशन ने निरंतर 941 दिन तक कार्य किया। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में काली नदी के निकट स्थित कैगा जनरेटिंग स्टेशन की यूनिट-1 13 मई, 2016 से निरंतर विद्युत् का उप्तादन कर रही है।

यह स्वदेशी रूप से निर्मित PHWR है जो यूरेनियम का उपयोग करता है। इस परमाणु उर्जा स्टेशन ने अब तक 500 करोड़ यूनिट विद्युत् का उत्पादन किया है। इस उर्जा स्टेशन से भारतीय परमाणु उर्जा कारपोरेशन के डिजाईन, निर्माण, सुरक्षा तथा गुणवत्ता की उत्कृष्ठता स्पष्ट होती है। इससे पहले 940 दिन तक लगातार कार्य करने का रिकॉर्ड यूनाइटेड किंगडम के हेशेम की यूनिट-2 के नाम था।

कैगा परमाणु उर्जा स्टेशन

कैगा परमाणु उर्जा स्टेशन का निर्माण कार्य 1989 में शुरू हुआ था। इसे 16 नवम्बर, 2000 को कमीशन किया गया था। इस स्टेशन में 220  मेगावाट की चार इकाइयाँ हैं। इसका निर्माण, डिजाईन व रखरखाव  इत्यादि कार्य भारतीय परमाणु उर्जा कारपोरेशन द्वारा किया जाता है।

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