विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स

इस श्रेणी में हिन्दी भाषा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स एवं समसामयिक घटनाक्रम का SSC, Railways, RAS/RPSC, BPSC, MPPSC, JPSC, HPSC, UPPSC, UKPSC एवं अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण समाचारों का संग्रह किया गया है।

इनफ़ोसिस पुरस्कार 2018: 6 प्रोफेसरों को विज्ञान व शोध के लिए दिया गया पुरस्कार

इनफ़ोसिस विज्ञान फाउंडेशन ने 10वीं वर्षगाँठ के अवसर पर इनफ़ोसिस पुरस्कार 2018 की घोषणा की। यह पुरस्कार 6 भिन्न-भिन्न श्रेणियों में प्रदान किया जायेगा। इन 6 पुरस्कारों के लिए 244 प्रविष्टियों में से विजेताओं को चुना गया, यह चुनाव वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों की 6 सदस्यीय जूरी द्वारा किया गया।

विजेताओं की सूची

इंजीनियरिंग व कंप्यूटर विज्ञान : नवकांत भट्ट

नवकांत भट्ट भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलुरु में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत्त हैं। उन्हें यह कार्य बायोकेमिस्ट्री  में बायो-सेंसर और गैसीय सेंसर में शोध कार्य के लिए प्रदान किया गया। इससे मेटल-ऑक्साइड सेंसर के कार्य में वृद्धि होगी।

मानविकी : कविता सिंह

कविता सिंह जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ़ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स की डीन हैं। उन्हें यह पुरस्कार मुग़ल, राजपूत और दक्कन कला में कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया।

जैव विज्ञान : रूप मलिक

वे टाटा आधारभूत अनुसन्धान संस्थान के जैव विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत्त है। उन्हें यह पुरस्कार मॉलिक्यूलर मोटर प्रोटीन में शोध कार्य के लिए प्रदान किया गया।

गणित : नलिनी अनंतरमण

नलिनी अनंतरमण फ्रांस के स्ट्रासबर्ग विश्वविद्यालय में एडवांस्ड अध्ययन संस्थान में गणित की प्रोफेसर हैं। उन्हें “क्वांटम केओस” के क्षेत्र में कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया।

भौतिक विज्ञान : एस,के. सतीश

एस.के. सतीश IISc बंगलुरु में महासागरीय तथा वायुमंडलीय विज्ञान केंद्र में प्रोफेसर हैं। उन्हें जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में उत्कृष्ट  कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

सामाजिक विज्ञान : सेंधिल मुल्लैनाथान

वे अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय में कम्प्यूटेशन व व्यवहारिक विज्ञान के प्रोफेसर हैं। उन्हें व्यावहारिक अर्थशास्त्र के क्षेत्र में कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया।

इनफ़ोसिस पुरस्कार

इनफ़ोसिस पुरस्कार एक वार्षिक पुरस्कार है, यह पुरस्कार अनुसंधानकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक वैज्ञानिकों और इंजिनियरों को प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार इनफ़ोसिस विज्ञान फाउंडेशन द्वारा दिया जाता है। यह पुरस्कार जैव विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग व कंप्यूटर विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, भौतिक विज्ञान और मानविकी के क्षेत्र में दिया जाता है। प्रत्येक विजेता को 22 कैरट का स्वर्ण पदक, एक प्रशस्ति प्रमाण पत्र तथा 100000 (72 लाख रुपये) डॉलर इनामस्वरुप दिए जाते हैं। यह भारत में वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में सबसे अधिक धनराशी वाला पुरस्कार है।

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इंडियन हेल्थ फण्ड : टाटा ट्रस्ट और द ग्लोबल फण्ड ने टीबी और मलेरिया के शीघ्र निदान के लिए चार नवोन्मेषकों का चयन किया

टाटा ट्रस्ट और द ग्लोबल फण्ड ने टीबी और मलेरिया के शीघ्र निदान के लिए चार नवोन्मेषकों का चयन किया। तीन नवोन्मेषकों का चयन टीबी तथा एक नवोन्मेषक का चयन मलेरिया के शीघ्र निदान के लिए किया गया है।

मुख्य बिंदु

इन नवोन्मेषकों का चयन टीबी और मलेरिया रोग को समाप्त करने के लिए किया गया है। भारत सरकार ने देश से टीबी रोग को समाप्त करने के लिए 2025 की समय सीमा रखी है जबकि मलेरिया रोज़ की समाप्ति के लिए 2030 की समय सीमा निश्चित की गयी है। भारत में विश्व के 27% टीबी के मामले हैं, जबकि दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में 68% मलेरिया के मामले भारत में है।

इंडियन हेल्थ फण्ड

इंडियन हेल्थ फण्ड को टाटा ट्रस्ट ने द ग्लोबल फण्ड के सहयोग से 2016 में लांच किया गया था। इसका उद्देश्य भारत में इन्नोवेटर्स को संक्रामक रोग के समाधान के लिए प्रेरित करना है। इंडियन हेल्थ उन लोगों अथवा संस्थाओं को  सहायता करता है जो टीबी और मलेरिया जैसे रोग के निदान व उपचार के लिए सतत समाधान तैयार करते हैं।

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इसरो ने सफलतापूर्वक लांच किया GSAT-29 संचार उपग्रह

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (ISRO) ने 14 नवंबर, 2018 को GSAT-29 संचार उपग्रह को सफलतापूर्वक लांच किया। इसे GSLV-Mk III द्वारा लांच किया गया। इस संचार उपग्रह का उपयोग जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी भारत में इन्टरनेट सेवाओं को सुधारने के लिए किया जायेगा।

GSLV-Mk III काफी भारी राकेट है, वर्तमान में इसरो भारी रॉकेट्स युक्त उड़ानों का परीक्षण कर रहा है। मिशन गगनयान के लिए इसरो सबसे भारी राकेट का विकास करेगा। मिशन गगनयान को 2022 में लांच किया जायेगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए।

80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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