करेंट अफेयर्स (समाचार सारांश) - मार्च, 2018

इस श्रेणी में GKToday में मार्च, 2018 में प्रकाशित हिन्दी भाषा के करेंट अफेयर्स (समाचार सारांश) एवं समसामयिक घटनाक्रम का SSC, Railways, RAS/RPSC, BPSC, MPPSC, JPSC, HPSC, UPPSC, UKPSC एवं अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण समाचारों का संग्रह किया गया है।

पवन उर्जा शिखर सम्मेलन-2018

25 से 28 सितंबर 2018 को जर्मनी के हैम्बर्ग में वैश्विक पवन उर्जा सम्मेलन का प्रथम संस्करण आयोजित किया जाएगा. यह सम्मेलन व्यापार, नेटवर्क और सम्पूर्ण विश्व में लोगों के बीच पवन उर्जा के बारे में प्रचार-प्रसार करने पर केन्द्रित रहेगा. इस सम्मेलन के तीन मुख्य विषय डायनामिक बाजार, कम लागत और स्मार्ट उर्जा है.

मुख्य विशेषताएँ

इस पवन उर्जा शिखर सम्मेलन में 1400 से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित होंगे, और यह दुनिया का सबसे बड़ा पवन उर्जा सम्मेलन रहेगा. इस कार्यक्रम का उद्देश्य व्यापार, नेटवर्क और सम्पूर्ण विश्व में लोगों के बीच पवन उर्जा के विषय का प्रचार-प्रसार करना है. सम्मेलन में 100 से अधिक देश भाग लेंगे, जिनमें भारत, चीन, अमेरिका, स्पेन एवं डेनमार्क शामिल है. इस शिखर सम्मेलन कार्यक्रम में ‘विंडइनेर्जी हैम्बर्ग’ और ‘विंडयुरोप’ दो सम्मेलन सम्मिलित होंगे. विंडयूरोप सम्मेलन के 250 विशेषज्ञ 50 से अधिक सेमिनारों में हिस्सा लेंगे, जिन्हें इको-फ्रेंडली तकनीक के लिए एक प्लैटफ़ार्म भी मिलेगा. पवन उर्जा शिखर सम्मेलन का यह पहला संस्करण व्यापार, नेटवर्किंग तथा सूचना के दृष्टिकोण से पवन उर्जा इंडस्ट्री के लिए अति महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. इस सम्मेलन में भारत की कई कंपनियां भाग लेते हुये कार्यक्रम मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी. पवन उर्जा उत्पादित करने वाले देशों में भारत चौथे स्थान पर है. पवन उर्जा उत्पादन करने वालों देशों की सूची में भारत से पहले अमेरिका एवं जर्मनी का नाम दर्ज है. साथ ही चीन के बाद भारत मे 33 GW पवन उर्जा उत्पादित होती है.

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चीन ने बेईदोउ (एमईओ-3) के तहत बेईदोउ-30 तथा बेईदोउ-31 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया

चीन ने अपने घरेलू बेईदोउ (कम्पास) उपग्रह नेविगेशन प्रणाली को लॉन्च करने के अपने तीसरे और अंतिम चरण के रूप में बेईदोउ -30 और बेईदोउ-31 के बेईदोउ (एमईओ-3) उपग्रहों को सफलतापूर्वक लौंच किया है । दक्षिण पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के झिचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्ग मार्च -3 बी वाहक रॉकेट पर उन्हें लॉन्च किया गया । यह लांग मार्च रॉकेट समूह का 269 वां मिशन था

बेईदोउ उपग्रह नेविगेशन प्रणाली

‘बेईदोउ’ उपग्रह नेविगेशन परियोजना को औपचारिक रूप से वर्ष 1994 में शुरू किया गया था | चीन की योजना वर्ष 2018 तक बेईदोउ सेवा का विस्तार “बेल्ट एंड रोड” परियोजना के आसपास के देशों में करने की है |

बेईदोउ प्रणाली में 30 उपग्रह होंगे और इसे 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य है | यह उपग्रह प्रणाली अमेरिका के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, रूस के ग्लोनास, और यूरोप के गैलीलियो नेविगेशन उपग्रह प्रणाली का समकक्ष होगा बेईदोउ वर्तमान में चीन के भीतर नेविगेशन और पड़ोसी क्षेत्रों को सेवा प्रदान कर रहा है | इसके नामित ग्रहपथ में प्रस्थापित होते ही यह दुसरे स्थापित उपग्रहों में शामिल हो जाएगा |

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कड़कनाथ मुर्गे का GI टैग मध्य प्रदेश को मिला

कड़कनाथ मुर्गे का GI टैग चेन्नई के भौगोलिक संकेतक पंजीयन कार्यालय ने मध्य प्रदेश को दे दिया। कड़कनाथ मुर्गा मध्य प्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर ज़िलों में पाया जाता है। कई दिनों से इसकी प्रजाती को लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच विवाद चल रहा था। दोनों ही राज्यों ने इस प्रजाति के मुर्गे के जीआई टैग को लेकर अपना-अपना दावा पेश किया था। साल 2012 में मप्र ने GI रजिस्ट्री ऑफिस चेन्नई में कड़कनाथ के लिए क्लेम किया था वहीं साल 2017 में छत्तीसगढ़ ने अपना दावा पेश किया था। मध्य प्रदेश का दावा था है कि झाबुआ ज़िले में कड़कनाथ मुर्गे की उत्पत्ति हुई है, जबकि छत्तीसगढ़ का दावा था कि कड़कनाथ को प्रदेश के दंतेवाडा ज़िले में अनोखे तरीके से पाला जाता है और यहां उसका संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन होता है।

“कड़कनाथ”

कड़कनाथ चिकन नस्ल अपने काले रंग के पंखों के कारण अद्वितीय है। पौष्टिकता औऱ स्वाद कड़कनाथ की सबसे खास बात है। कड़कनाथ में 25-27 फीसदी प्रोटीन होता है। आम चिकन में यह 18 से 20 फीसदी होता है। वहीं दूसरे चिकन की तुलना में इसमे फेट भी कम होता है। ये मुर्गा विटामिन-बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी, ई, नियासिन, केल्शियम, फास्फोरस और हीमोग्लोबिन से भरपूर होता है।

‘जियोग्राफ़िकल इंडिकेशंस टैग’ या भौगोलिक संकेतक का मतलब ये है कि कोई भी व्यक्ति, संस्था या सरकार अधिकृत उपयोगकर्ता के अलावा इस उत्पाद के मशहूर नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकती। वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइज़ेशन के अनुसार जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन ये बताता है कि वह उत्पाद एक ख़ास क्षेत्र से ताल्लुक़ रखता है और उसकी विशेषताएं क्या हैं। साथ ही उत्पाद का आरंभिक स्रोत भी जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन से तय होता है।

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