करेंट अफेयर्स (समाचार सारांश) - मार्च, 2018

ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर सरकार ने ई-ट्राइब्स इंडिया की शुरूआत की

भारत सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय के दृष्टि पत्र के अनुसार जनजातीय मंत्रालय के अंतर्गत ट्राइफेड अब डिजिटल होने जा रहा है। जनजातीय मामलों के मंत्री श्री जुआल ओराम ने “ई ट्राइब्स इंडिया” लांच कर दिया है इसके अतिरिक्त अमेज़न, स्नैपडील, पेटीएम तथा जीईएम पर“ट्राइब्स इंडिया” के बैनर भी लांच किए गए । खुदरा व्यापार के लिए भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड की पुस्तिका और भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड की तिमाही पत्रिका “ट्राइब्स हाट” का भी विमोचन किया गया ।

मुख्य तथ्य

भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड ने अपने सभी उत्पादों को बेचने तथा एम-कॉमर्स (मोबाइल कॉमर्स) क्षेत्र पर पकड़ के लिए अपनी ई-कॉमर्स (इलेक्ट्रोनिक कॉमर्स) वेबसाइट tribesindia.com विकसित की है। एक एनड्रॉयड ऐप के साथ-साथ गूगल स्टोर (ट्राइब्स इंडिया) भी है, जिसे किसी भी एनड्रॉयड फोन पर डाउनलोड किया जा सकता है और एनड्रॉयड स्मार्टफोन का उपयोग कर इस मोबाइल ऐप से बिक्री की जा सकती है।

भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड के डिजिटल होने से जनजातीय वाणिज्य का विस्तार होगा और बड़े इलाके तक जनजातीय उत्पाद उपलब्ध होंगे, जिसका लाभ जनजातीय दस्तकार उठाएंगे। जनजातीय उत्पादों का खुदरा व्यापार देश और विदेश तक फैलेगा। भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड ने स्नैपडील और अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों से समझौता किया है, जो जनजातीय उत्पादों को अपने ग्राहकों को पेश करेंगे।

भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (ट्राइफेड)

यह आदिवासी मामलों के मंत्रालय के तहत बहु-राज्य सहकारी समिति है। यह मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम 1984 के अंतर्गत कल्याण मंत्रालय द्वारा अगस्त 1987 में स्थापित किया गया था |

जनजातीय उत्पादों के विपणन के अनेक पहलुओं पर ट्राइफेड काम कर रहा है। इनमें मोबाइल एनड्रॉयड एप्लीकेशन से जनजातीय उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री, प्रदर्शनियों में भागीदारी, कौशल उन्नयन प्रशिक्षण, ट्राइफेड की गतिविधियों पर प्रचार सामग्री की तैयारी शामिल हैं। भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (ट्राइफेड) जनजातीय मंत्रालय के अंतर्गत बहु-राज्य सहकारी सोसायटी है। संघ अपने 31 खुदरा दुकानों “ट्राइब्स इंडिया”, विभिन्न राज्यों के 37 इंपोरिया और 16 फ्रेंचाइज दुकानों में जनजातीय उत्पादों को विपणन समर्थन देकर जनजातीय उत्पादों, कला और दस्तकारी के विपणन को प्रोत्साहित कर रहा है। भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड राष्ट्रीय जनजातीय क्रॉफ्ट एक्सपो “आदि महोत्सव” जैसे प्रदर्शनियां भी आयोजित करता है और जनजातीय उत्पादों का विपणन प्रोत्साहन करता है। जनजातीय दस्तकारों को सुविधा उपलब्ध कराता है, ताकि वे बाजार आवश्यकताओं का जायजा लेने के लिए कला प्रेमियों के साथ सीधी बातचीत कर सकें। उत्पादों की बिक्री के लिए पिछले तीन वर्षों में यह जनजातीय दस्तकारों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रहा है।

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संस्कृति मंत्रालय ने गुजरात में माधवपुर मेला का आयोजन किया

गुजरात के प्रसिद्ध माधवपुर मेले का उत्तर-पूर्व के राज्यों के साथ एक अनोखी पहल के अंतर्गत पहला सांस्कृतिक एकीकरण दिखाई देगा। इसका उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों, प्रमुख रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों को एक भारत-श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत एक-दूसरे के निकट लाना है।
• अरुणाचल प्रदेश की मिश्मी जनजाति से यह मेला संबद्ध है। मिश्मी जनजाति, प्राचीन राजा भीष्मक और उनकी पुत्री रुक्मिणी के ज़रिये भगवान कृष्ण को अपना पूर्वज मानती है।
• इस मेले में भगवान कृष्ण के साथ रुक्मिणी देवी की अरुणाचल प्रदेश से गुजरात तक की अमर यात्रा का उल्लास पहली बार मनाया जाएगा।
• उत्तर-पूर्व से 150 लोगों के एक जत्थे का माधवपुर मेले में रुक्मिणी के परिवार के प्रतिनिधि के तौर पर पारंपरिक स्वागत किया जाएगा।
• कल्कि पुराण में निचले दिबांग घाटी शहर में रोइंग के निकट स्थित भीष्मकनगर का जिक्र भी मिलता है।
• संस्कृति मंत्रालय के तहत, राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), मानव संग्रहालय और गुजरात, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर राज्य एवं अन्य संस्थाएँ, इस मेले को एक नया आयाम देने के लिये एक साथ काम कर रही हैं।
• पश्चिम बंगाल को छोड़कर इस अभियान में शेष सभी राज्य एवं संघीय क्षेत्र भाग ले रहे हैं।
• एक भारत-श्रेष्ठ भारत अभियान इस वर्ष के उत्सव का मूल उद्देश्य के अनुरूप है और विविधता में एकता की देश की विशिष्टता को दर्शाने के साथ-साथ पश्चिम एवं पूर्व के बीच संबंध स्थापित करना है।
• सांस्कृतिक एकीकरण के उद्देश्य से दोनों क्षेत्रों के आयोजित किये गए चार दिन के इस पर्व में अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर एवं उत्तर-पूर्व के अन्य राज्यों की कला, नृत्य, संगीत, कविता, कथा वाचन और लोक-नाटकों का जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

सांस्कृतिक रूप से महत्त्वपूर्ण माधवपुर घेड एक छोटा गाँव है,जहाँ भगवान कृष्ण ने राजा भीष्मक की बेटी रुक्मिणी से लोककथाओं के अनुसार विवाह किया था। माधवपुर पोरबंदर के निकट, समुद्र तट पर स्थित है। 15वीं शताब्दी में निर्मित इस माधवराय मंदिर स्थल को प्रतिबिंबित करता है। एक सांस्कृतिक मेले द्वारा इस समारोह का आगाज़ किया जाता है, जो रामनवमी से शुरू होता है। एक रंगीन रथ कृष्ण की मूर्ति को लेकर गाँव की परिक्रमा करता है और आमतौर पर यह उत्सव पाँच दिनों तक चलता है।

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डाउन सिंड्रोम पर राष्ट्रीय सम्‍मेलन

राष्‍ट्रीय न्‍यास द्वारा 26 मार्च को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत ‘डाउन सिंड्रोम पर राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन’ आयोजित किया गया।
डाउन सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति के जीवन पर आधारित इस सम्मेलन में “ट्वीलाइट्स चिल्ड्रन” नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। यह सम्मेलन इससे पीडि़त लोगों के मन में सकारात्मक परिवर्तन लाने , डाउन सिंड्रोम पर विचारों और ज्ञान का प्रसार करने, और संबंधित विभिन्न पक्षों के अनुभवों के साझाकरण पर आधारित था।

डाउन सिंड्रोम

यह एक आनुवंशिक विकार है, जो कि क्रोमोसोम-21 में एक अतिरिक्त क्रोमोसोम के जुड़ने की उपस्थिति के कारण होता है। आम लोगों की सभी कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र होते हैं, लेकिन डाउन सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में एक अतिरिक्त गुणसूत्र आने से इनकी संख्या 47 हो जाती है।जिसके कारण उनमें बौद्धिक विकास और सीखने की क्षमता कम होती है। बच्‍चों में अक्सर देरी से विकास और व्‍यवहार संबंधी समस्‍याएँ होती हैं।
यह नाम ब्रिटिश चिकित्सक जॉन लैंगडन डाउन के नाम पर पड़ा, जिन्होंने इस सिंड्रोम (चिकित्सीय स्थिति) के बारे में सबसे पहले 1866 में पता लगाया था। विश्व में लगभग 1000 में 1 से लेकर 1100 में से 1 बच्चा डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होता है।

राष्ट्रीय न्यास

यह सांविधिक निकाय है, जिसकी स्‍थापना सेरेब्रल पाल्‍सी,ऑटिज्‍म, मंदबुद्धि और कई प्रकार की दिव्‍यांगता से ग्रसित लोगों के कल्‍याण के लिये संसदीय अधिनियम के तहत की गई। यह अपनी स्‍थापना के बाद से ही दिव्‍यांगजनों के कल्‍याण के लिये विभिन्‍न योजनाएँ और कार्यक्रम चला रहा है। विभिन्‍न कार्यशालाओं, सम्‍मेलनों का आयोजन कर इन दिव्‍यांगताओं और ऐसे व्‍यक्तियों की क्षमताओं के बारे में आम जन के बीच जागरूकता फैलाना इसका कार्य है।

विश्‍व डाउन सिंड्रोम दिवस

-2012 से प्रतिवर्ष 21 मार्च को डाउन सिंड्रोम के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस के रूप में मनाया जाता है।
-संयुक्‍त राष्‍ट्र आम सभा ने 19 दिसंबर, 2011 में 21 मार्च को विश्‍व डाउन सिंड्रोम दिवस मनाने की घोषणा की थी।
– विश्‍व डाउन सिंड्रोम दिवस के लिये क्रोमोसोम-21 (गुणसूत्र) में त्रयी (ट्रायसोमिक) की विशिष्टता को दर्शाने के लिये तीसरे महीने की 21 तारीख़ का चयन किया गया था, जिसके कारण डाउन सिंड्रोम होता है।

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