करेंट अफेयर्स (समाचार सारांश) - मार्च, 2018

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने प्रधानमंत्री रोज़गार प्रोत्साहन योजना के कार्य क्षेत्र में वृद्धि को मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री रोज़गार प्रोत्साहन योजना (पीएमआरपीवाई) के कार्य क्षेत्र में वृद्धि को आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति ने अपनी मंज़ूरी दी है। सरकार अब सभी क्षेत्रों के लिये नए कर्मचारी के पंजीकरण की तिथि से पहले तीन वर्षों के लिये नियोक्‍ता के पूर्ण ग्राह्य योगदान में योगदान देगी, जिसमें वर्तमान लाभार्थियों के तीन वर्षों की उनकी शेष अवधि का योगदान भी शामिल है।

लाभ

-अनौपचारिक क्षेत्र के कामगार एक अनुमान के अनुसार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे तथा और अधिक रोज़गार का सृजन होगा।
-इस योजना के अभी तक काफी प्रेरणादायी परिणाम प्राप्‍त हुए हैं। औपचारिक रोज़गार में लगभग 31 लाख लाभार्थी सम्मिलित हुए हैं, जिसमें 500 करोड़ रुपए से अधिक का व्‍यय शामिल है।

पृष्‍ठभूमि

-प्रधानमंत्री रोज़गार प्रोत्साहन योजना अगस्‍त 2016 से ही परिचालन में है। सरकार इस योजना में 15 हज़ार रुपए प्रति महीने तक के वेतन के साथ, एक नए सार्वभौमिक खाता नंबर रखने वाले नए कर्मचारियों (जो 01 अप्रैल, 2016 या उसके बाद नियुक्‍त हुए हैं) के संदर्भ में कर्मचारी पेंशन योजना में नियोक्‍ताओं के 8.33 प्रतिशत योगदान का भुगतान कर रही है।
-इस योजना के दो लाभ हैं। एक तरफ नियोक्‍ताओं को प्रतिष्‍ठानों में कामगारों के रोज़गार आधार में वृद्धि करने के लिये प्रोत्‍साहन दिया जाता है, तो दूसरी तरफ बड़ी संख्‍या में कामगार ऐसे प्रतिष्‍ठानों में रोज़गार पा सकेंगे। एक प्रत्‍यक्ष लाभ इसका यह है कि इन कामगारों को संगठित क्षेत्र के सामाजिक सुरक्षा लाभों की सुविधा प्राप्‍त हो सकेगी।

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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल का अनुमोदन

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक में संशोधन का केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अनुमोदन किया है। 2 जनवरी, 2018 को लोकसभा में की गई चर्चा, विभाग से संबंधित स्थायी संसदीय समिति द्वारा संसद में 20 मार्च, 2018 को प्रस्तुत रिपोर्ट और चिकित्सा छात्रों तथा चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों द्वारा दिये गये सुझावों पर विचार करने के बाद इन संशोधनों का अनुमोदन किया गया है।

पृष्टभूमि

राष्ट्रीय चिकित्सा बिल दिसम्बर 2017 में लोकसभा में पेश किया गया था। यह बिल भारतीय मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 को निरस्त करने और ऐसी मेडिकल शिक्षा प्रणाली प्रदान करने का प्रयास करता है जो निम्नलिखित सुनिश्चित करता हो-पर्याप्त और उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल पेशेवरों की उपलब्धता।मेडिकल पेशेवरों द्वारा नवीनतम मेडिकल अनुसंधानों का उपयोग। मेडिकल संस्थानों का नियमित आकलन। एक प्रभावी शिकायत समाधान प्रणाली।
-एक 25 सदस्यीय राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के गठन की विधेयक के अंतर्गत बात कही गई है। इसकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी तथा इसमें राज्यों के 3 प्रतिनिधि शामिल होंगे।
-राज्य सरकारों द्वारा विधेयक के पास होने के 3 वर्षों के अंदर इस आयोग का गठन किया जाएगा।
-इस विधेयक को लोकसभा में चर्चा होने के बाद विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति के विचारार्थ भेजा गया था।

प्रस्तावित संशोधन

राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट

पूरे देश में फाइनल MBBS परीक्षा को ही सामान्य परीक्षा का दर्जा दिया जाएगा और यह एग्जिट टेस्ट के रूप में कार्य करेगा।
इसे राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट (National Exit Test-NEXT) कहा जाएगा। इस प्रकार चिकित्सा-छात्रों को लाइसेंस प्राप्त करने के लिये कोई अन्य परीक्षा नहीं देनी होगी।
राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट (NEXT) उन डॉक्टरों के लिये स्क्रीनिंग टेस्ट के रूप में कार्य करेगा जिनके पास विदेशी चिकित्सा डिग्री है और वे भारत में चिकित्सा पेशा करने के इच्छुक हैं।

आयुष चिकित्सकों के लिये ब्रिज पाठ्यक्रम का प्रावधान समाप्त

आधुनिक चिकित्सा का पेशा शुरु करने के लिये आयुष पेशेवरों द्वारा आवश्यक ब्रिज पाठ्यक्रम के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।
राज्य सरकारों को यह ज़िम्मेदारी दी गई है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रोत्साहन देने के लिये आवश्यक कदम उठाएँ।

शुल्क विनियमन

निजी चिकित्सा संस्थानों तथा मानद विश्वविद्यालयों में जिन सीटों के लिये शुल्क विनियमन किया जाएगा उसकी अधिकतम सीमा को 40% से बढ़ाकर 50% कर दी गई है।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक में राज्यों का प्रतिनिधित्व

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक में राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग पर विचार करते हुए इसमें राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के नामित सदस्यों की संख्या 3 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक में कुल 25 सदस्य होंगे जिनमें से कम-से-कम 21 डॉक्टर होंगे।

मेडिकल कॉलेजों पर नियमों का अनुपालन नहीं करने पर कार्रवाई

मेडिकल कॉलेजों द्वारा नियमों को नहीं मानने पर आर्थिक दंड के प्रावधान के स्थान पर विभिन्न दंड विकल्पों का प्रावधान किया गया है।
अभी कॉलेजों द्वारा नियमों को न मानने पर किसी बैच से प्राप्त किये गए कुल शुल्क के आधे से लेकर 10 गुने तक आर्थिक दंड का प्रावधान है।
इस उपनियम के स्थान पर एक अन्य प्रावधान जोड़ा गया है। नए प्रावधान में चेतावनी के विभिन्न विकल्प, सामान्य आर्थिक दंड, नामांकन पर रोक तथा मान्यता समाप्त करना शामिल है।

फर्जी चिकित्सकों पर कार्रवाई

अयोग्य व नीम-हकीम चिकित्सकों के लिये सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। अनधिकृत चिकित्सा सेवा देने पर एक साल का कारावास तथा 5 लाख रुपए तक के अर्थदंड का प्रावधान किया गया है।

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नीति आयोग द्वारा जारी सूची में नूहं देश के सबसे पिछड़े ज़िले के रूप में सूचीबद्ध किया गया

नीति आयोग द्वारा एक सूची जारी की गई है जिसमें विकास के नज़रिये से देश के सबसे पिछड़े ज़िलों का उल्लेख किया गया है। हरियाणा के नूहं (मेवात) को देश के सबसे पिछड़े ज़िले के रूप में इस सूची में सूचीबद्ध किया गया है।

मुख्य तथ्य

– तेलंगाना के आसिफाबाद, मध्य प्रदेश के सिंगरौली, नगालैंड के किफिरे और उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती ज़िले को देश के सबसे पिछड़े पाँच ज़िलों में इसके बाद शामिल किया गया है।
-आपसी प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाकर विकास के लिये इन ज़िलों को प्रोत्साहित करना इस रैंकिंग का उद्देश्य है।
-शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण, कृषि, जल संसाधन, आधारभूत बुनियादी ढाँचे वित्तीय समावेशन तथा कौशल विकास जैसे क्षेत्रों के 49 विकास मानकों के आधार पर देश के 101 पिछड़े ज़िलों की रैंकिंग आयोग द्वारा की गई। इन ज़िलों को ‘आकांक्षापूर्ण ज़िले’ नाम दिया गया।
-केंद्र एवं राज्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रभारी संयुक्त सचिव एवं अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को इन ज़िलों में नियुक्त किया गया।
-मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति राज्य स्तर पर की जाएगी।
-नीति आयोग द्वारा “चैम्पियंस ऑफ चेंज” नाम से एक ऑनलाइन डैशबोर्ड भी तैयार किया जा रहा है जिसके माध्यम से इन ज़िलों की रैंकिंग में आने वाले उतार-चढ़ाव के संबंध में ऑनलाइन रैंकिंग की जा सके।

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