करेंट अफेयर्स (समाचार सारांश) - मार्च, 2018

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा 2020 के लिये नई एकीकृ‍त शिक्षा योजना के प्रस्‍ताव को मंजूरी

01 अप्रैल, 2018 से 31 मार्च, 2020 के लिये प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा नई एकीकृत शिक्षा योजना बनाने के स्‍कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी गई है। प्रस्‍तावित योजना में, राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए),सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) और शिक्षक शिक्षण अभियान को समाहित कर दिया गया है। 75 हज़ार करोड़ रुपए प्रस्‍तावित योजना के लिये मंजूर किये गए हैं। यह राशि मौजूदा आवंटित राशि से 20 प्रतिशत अधिक है।

प्रमुख विशेषताएँ

-प्रधानमंत्री के ‘सबको शिक्षा, अच्‍छी शिक्षा’ के विज़न के परिप्रेक्ष्‍य में प्रस्‍तावित योजना लाई गई है। पूरे देश में प्री-नर्सरी से लेकर बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा सुविधा सबको उपलब्‍ध कराने के लिये राज्‍यों की सहायता करना इसका लक्ष्‍य है।
-शिक्षा के क्षेत्र में सतत् विकास के लक्ष्‍यों के अनुरूप नर्सरी से लेकर माध्‍यमिक स्‍तर तक सबके लिये समान रूप से समग्र और गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा सुनिश्‍चित करना इस योजना का मुख्‍य उद्देश्‍य है। एकीकृत स्‍कूली शिक्षा योजना में शिक्षकों और प्रौद्योगिकी पर ध्‍यान केंद्रित करते हुए स्‍कूली शिक्षा की गुणवत्‍ता को सुधारने पर विशेष बल दिया गया है।

प्रभाव

-राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों को अपने उपलब्‍ध संसाधनों के हिसाब से अपनी प्राथमिकता तय करने और योजना के प्रावधान लागू करने का इस योजना से अवसर मिलेगा।
-स्‍कूली शिक्षा के विभिन्‍न चरणों में बच्‍चों के आगे शिक्षा ज़ारी रखने के मामलों में बढ़ोतरी होगी तथा बच्‍चों को अपनी स्‍कूली शिक्षा पूरी करने के लिये सार्वभौमिक रूप से मौका मिलेगा।
-बच्‍चों को गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा उपलब्‍ध कराने के साथ ही उन्‍हें विभिन्‍न तरह के कौशल और ज्ञान में दक्ष बनाना योजना का उद्देश्‍य है जो उनके सर्वांगीण विकास के साथ ही भविष्‍य में कार्यजगत में जाने और उच्‍च शिक्षा ग्रहण करने के लिये आवश्‍यक है।
-बजटीय आवंटन का बेहतर और मानव संसाधन तथा पूर्ववर्ती योजनाओं के लिये तैयार की गई संस्‍थागत संरचनाओं का प्रभावी इस्‍तेमाल योजना से हो सकेगा।

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राजस्थान का पहला मेगा फूड पार्क अजमेर में स्थापित

अजमेर में रूपनगण गाँव में राजस्थान के पहले मेगा फूड पार्क का केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा उद्घाटन किया गया। अजमेर और पड़ोसी ज़िलों के लगभग 25 हज़ार किसानों को 113.57 करोड़ रुपए की लागत से बने इस मेगा फूड पार्क से लाभ मिलेगा।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

-मेगा फूड पार्क के केंद्रीय प्रसंस्करण केंद्र में बनाई गई सुविधाओ में 5 हज़ार मीट्रिक टन का शीतगृह, 2550 मीट्रिक टन की क्षमता का डीप फ्रीज, 2 मीट्रिक टन/घंटे का आईक्यूएफ, 2500 मीट्रिक टन कच्चे माल के लिये ड्राई गोदाम और 5 हज़ार मीट्रिक टन तैयार माल के लिये ड्राइ गोदाम, 6500 मीट्रिक टन के साइलो, 10 मीट्रिक टन/घंटे के पैक हाउस, 8 मीट्रिक टक की क्षमता का स्टीम जनरेटर और अन्य संबधित प्रंसस्करण सुविधाएँ शामिल हैं।
-25 से 30 खाद्य प्रंसस्करण इकाइयों में 250 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मेगा फूड पार्क से निवेश होगा और वार्षिक कारोबार 450 से 500 करोड़ रुपए तक हो सकेगा।
-मेगा फूड पार्क प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5000 व्यक्तियों को रोज़गार प्रदान करेगा और CPC और PPC पहुँच वाले क्षेत्रों में लगभग 2500 किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
-मेगा फूड पार्क में निर्मित आधुनिक अवसंरचना से राजस्थान और इससे जुड़े हुए क्षेत्रों के किसान, उत्पादक, संसाधक और ग्राहकों को अत्यधिक लाभ मिलेगा और यह राजस्थान राज्य में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में वृद्धि को बढ़ावा देगा।
-खाद्य प्रसंस्करण के लिये खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय समूह आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से मज़बूत और पिछड़े क्षेत्रों के साथ खेत से बाज़ार तक मूल्य श्रृंखला सहित मेगा फूड पार्क का सृजन कर रहा।
-यह क्षेत्र प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना की फ्लैगशिप योजना के अंतर्गत परियोजनाओं के कार्यान्वयन के माध्यम से आगामी वर्षों में किसानों की आय को दोगुना करने के लिये योगदान करेगा।

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मंत्रिमंडल ने सरसों के तेल को छोड़कर अन्य सभी खाद्य तेलों के थोक में निर्यात की अनुमति दी

सरसों के तेल को छोड़कर अन्य सभी प्रकार के खाद्य तेलों के बड़ी मात्रा में निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मंजूरी दे दी है। 900 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के न्यूनतम मूल्य पर सरसों के तेल के लिए पांच किलोग्राम के उपभोक्ता पैक में निर्यात की अनुमति जारी रहेगी। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली समिति को अधिकार सम्पन्न बनाने की आर्थिक मामलों की समिति ने स्वीकृति दे दी है। समिति में वाणिज्य, कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण, राजस्व, उपभोक्ता मामले तथा विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के सचिव शामिल हैं।घरेलू उत्पादों और मांग, घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय कीमतों तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की मात्रा के आधार पर विभिन्न प्रकार के खाद्य तेलों की आयात-निर्यात नीति की समीक्षा करने तथा उन पर मात्रात्मक प्रतिबंध, पूर्व पंजीकरण, न्यूनतम निर्यात मूल्य तय करने और आयात शुल्क में बदलाव के संबंध में आवश्यक उपाय करने का समिति को अधिकार होगा। उपभोक्ता पैक में खाद्य तेलों का निर्यात करने तथा उनका न्यूनतम निर्यात मूल्य समय-समय पर तय करने का वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालय समिति का अधिकार समाप्त कर दिया गया है।

प्रभावः

खाद्य तेलों के अतिरिक्त विपणन के अवसर खाद्य तेलों के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटाने से उपलब्ध होंगे। किसानों को तिलहनों से ज्यादा वसूली हो सकेगी, जिससे वे लाभान्वित होंगे। निर्यात की अनुमति मिलने से मंद पड़े देश के खाद्य तेल उद्योग की क्षमता में वृद्धि होगी। इससे निर्यात प्रतिबंध और कई तरह की रियायतों की वजह से उत्पन्न हुई दुविधा की स्थिति खत्म हो सकेगी और कारोबारी सहूलियत का मार्ग प्रशस्त होगा।

पृष्ठभूमिः

2016-17 के दौरान पिछले दो वर्षों की तुलना में देश में तिलहन उत्पादन में भारी वृद्धि देखी गई है। संभावना है कि 2017-18 में भी उत्पादन वृद्धि का यह स्तर बना रहेगा। केवल कुछ खाद्य तेलों को ही बड़ी मात्रा में निर्यात की अभी तक अनुमति है। देश में खाद्य तेलों के बढ़ते उत्पादन को सहारा देने तथा इन तेलों के विपणन के लिए अतिरिक्त संभावनाएं तलाशने के लिए सरसों के तेल को छोड़कर अन्य खाद्य तेलों के बड़े पैमाने पर निर्यात की अनुमति दिया जाना जरूरी हो गया था। सरसों के तेल का भारत में बड़े पैमाने पर उपभोग किया जाता है।

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