करेंट अफेयर्स (समाचार सारांश) - मार्च, 2018

सीसीईए को शिक्षा ऋण योजना के लिए क्रेडिट गारंटी फंड जारी रखने की मंजूरी

शिक्षा ऋण योजना के लिए ऋण गांरटी कोष (सीजीएफईएल) को जारी रखने और केंद्रीय क्षेत्र ब्‍याज सब्सिडी (सीएसआईएस) योजना को जारी रखने और उसमें संशोधन करने हेतु मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने स्‍वीकृति दे दी है। 6,660 करोड़ रूपये के आवंटन के साथ दोनों योजनाएं 2017-18 से 2019-20 तक जारी रहेंगी। इस अवधि में 10 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा ऋण उपलब्‍ध होंगे।

संशोधन

अधिक विद्यार्थियों को लाभ तक पहुंचने की अनुमति देगी तथा पाठ्यक्रम अवधि के साथ एक वर्ष स्‍थगन अवधि होगी गुणवत्‍ता शिक्षा के लिए यह योजनाएं उन ऋणों को कवर करेगी जो एनएएसी से मान्‍यता प्राप्‍त संस्‍थान और एनबीए या राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍थानों या केंद्र वित्‍त पोषित तकनीकी संस्‍थानों (सीएफटीआई) द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त पेशेवर/तकनीकी कार्यक्रमों को आगे जारी रखने के लिए है। लेकिन यह स्थिति संभावित प्रभाव से लागू होगी और वर्तमान ऋणों में लागू नहीं होगी। एक डैश बोर्डयोजना की बेहतर निगरानी के लिए स्‍थापित किया जाएगा।

कवरेज

प्रति वर्ष औसत शिक्षा ऋण 2009 में योजना लागू होने के बाद से केवल 2.78 लाख रहा। प्रति वर्ष संशोधित योजना के अंतर्गत ऋणों की संख्‍या अनुमान के अनुसार कम से कम 3.3 लाख होगी। यह पहले की योजना की तुलना में 20 प्रतिशत की वृद्धि है।

केंद्रीय क्षेत्र ब्‍याज सब्सिडी योजना :

पहली अप्रैल 2009 को केंद्रीय क्षेत्र ब्‍याज सब्सिडी योजना (सीएसआईएस) लांच की गई। स्‍थगन अवधि के लिए योजना के अंतर्गत भारत में आगे के पेशेवर/तकनीकी पाठ्यक्रमों को जारी रखने के लिए भारतीय बैंक एसोसिएशन की आर्दश शिक्षा ऋण योजना के अंतर्गत अनु‍सूचित बैंकों से लिए गए शिक्षा ऋण पर पूरी ब्‍याज सब्सिडी उपलब्‍ध कराई जाती है। बिना किसी जमानती सुरक्षा और तीसरे पक्ष की गारंटी के ऋणों का वितरण के किया जाता है। जिन विद्यार्थियों के अभिभावकों की आय 4.5 लाख रूपये तक है वे योजना का लाभ उठा सकते हैं। स्‍नातक और स्‍नातकोत्‍तर या एकीकृत पाठ्यक्रमों के लिए यह सब्सिडी स्‍वीकार्य है। ब्‍याज सब्सिडी रूप में 9,408.52 करोड़ रूपये की राशि योजना के प्रारंभ होने के समय से वितरित की गई है और अभी तक 25.10 लाख विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं।

शिक्षा ऋणों के लिए ऋण गांरटी कोष (सीजीएफईएल) योजना :

इसमें भारतीय बैंक एसोसिएशन की आर्दश शिक्षा ऋण योजना के अंतर्गत शिक्षा ऋण के लिए गांरटी दी जाती है। बैंकों द्वारा जमानती सुरक्षा और तीसरे पक्ष की गारंटी के बिना इसका वितरण किया जाता है और यह 7.5 लाख रूपये की अधिकतम ऋण राशि के लिए होती है।

योजना का तीसरे पक्ष का मूल्‍यांकन आईआईएम बैंगलूरू द्वारा किया गया है। इसमें सुझाव दिए गए हैं कि योजना को विवेकसंगत बनाया जाए ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के और अधिक विद्यार्थी लाभ उठा सकें।

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केन्‍द्रीय मं‍त्रिमंडल ने आईपीआर पर भारत और कनाडा के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

केन्‍द्रीय मं‍त्रिमंडल ने भारत और कनाडा के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अपनी मंजूरी दे दी है। 23 फरवरी, 2018 को बौद्धिक संपदा (आईपी) के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग कार्यकलापों को स्‍थापित करने के लिए इस एमओयू पर हस्‍ताक्षर किया गया। इसका उद्देश्‍य दोनों देशों में नवोन्‍मेषण, रचनाशीलता एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

एक व्‍यापक और लचीले संरचना की यह समझौता ज्ञापन स्‍थापना करता है, जिसमें दोनों ही देश सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों का आदान-प्रदान कर सकते हैं और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा तकनीकी विनिमयों पर एकजुट होकर काम कर सकते हैं तथा आईपीआर की बेहतर तरीके से सुरक्षा कर सकते हैं।

मुख्य प्राथमिकताएं

-व्‍यवसायों ,सार्वजनिक संस्‍थानों तथा नागरिकों के बीच आईपी जागरूकता बढ़ाने पर सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों, अनुभवों एवं ज्ञान का आदान-प्रदान करना ।
-विशिष्‍ट आईपी क्षेत्रों वाले मानव संसाधनों के साथ परस्‍पर सम्‍पर्क करने हेतु विशेषज्ञों का आदान-प्रदान करना ।
-एकल रूप से या संयुक्‍त रूप से प्रतिभागियों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों, प्रशिक्षण एवं समारोह में भागीदारी के जरिये उद्योग, विश्‍वविद्यालय, अनुसंधान एवं विकास संगठनों तथा छोटे एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) के साथ आईपी पर सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों, अनुभवों एवं ज्ञान का आदान-प्रदान एवं प्रसार करना ।
-आईपी में नवीन एवं वर्तमान प्रलेखन ,आधुनिकीकरण परियोजनाओं, सूचना प्रणालियों के स्‍वचालन एवं कार्यान्‍वयन के विकास में सहयोग और आईपी के प्रबंधन के लिए प्रक्रियाएं प्रारंभ करना ।
-पारंपरिक ज्ञान संबंधित डाटा आधारों और वर्तमान आईपी प्रणालियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने यह समझने में कि किस प्रकार पारम्‍परिक ज्ञान की सुरक्षा की जाए समेत सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों के विनिमय में सहयोग प्रदान करना ।

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कैबिनेट ने संगठित अपराध पर भारत ब्रिटेन और आयरलैंड के समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

कैबिनेट ने संगठित अपराध के क्षेत्र में सहयोग के संबंध में भारत और यूनाइटेड किंगडम और उत्तरी आयरलैंड के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दे दी है। अंतरराष्ट्रीय अपराध का मुकाबला करना गंभीर संगठित अपराध से निपटना तथा आपस में जानकारी का आदान प्रदान करना इसका उद्देश्य है।

मुख्य तथ्य

समझौता ज्ञापन सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करेगा जो पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा। भारत और यूके के पास पहले से ही जांच और अपराध के मुकदमेबाजी अनुरेखण और जुर्माने के संबंध में सहमति है, जिस पर 1995 में हस्ताक्षर किए गए थे। दोनों ही देश इसमें मुद्रा हस्तांतरण , आतंकवादी फंडिंग ,अंतरराष्ट्रीय अपराध और गंभीर संगठित अपराध से लड़ने में सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा रखते हैं।

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