करेंट अफेयर्स (समाचार सारांश) - मार्च, 2018

भारत, रूस और बांग्लादेश ने रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए समझौते पर किये हस्ताक्षर

भारत, बांग्लादेश और रूस ने बांग्लादेश में ढाका के समीप रूपपुर परमाणु संयंत्र के निर्माण के लिए त्रिपक्षीय  समझौता प्रपत्र  पर हस्ताक्षर किये. भारत-रूस परमाणु समझौता के तहत परमाणु उर्जा को तीसरे विश्व के देशो तक पहुचाने के क्रम में ये अपनी तरह का पहला कदम है. ये भारत का विदेश में पहला परमाणु उद्यम भी होगा.

रूपपुर परमाणु उर्जा संयंत्र

रूपुर परमाणु उर्जा संयंत्र की क्षमता २*१२०० मेगा वाट की है. ये बांग्लादेश का पहला परमाणु उर्जा संयंत्र है. ये रूस के सहयोग से ढाका के निकट ही बनाया जा रहा है. इस संयंत्र की स्थापना के बाद बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान के बाद परमाणु उर्जा का प्रयोग करने वाला दक्षिण एशिया का तीसरा देश बन जायेगा. रूस इस संयंत्र को ‘टर्नकी’ आधार पर निर्मित करेगा. इसका निहितार्थ ये है की अनुबंधक ही प्रोजेक्ट को पूरा करेगा और अगर संयंत्र में कोई समस्या उत्पन्न होती है तो उसके लिए भी अनुबंधक ही जिम्मेदार होगा. रूस का कार्य निष्पादन डिज़ाइन, उत्पादन और मशीनों की आपूर्ति, निर्माण कार्य, और संयंत्र को चालू अवस्था में पहुंचाने तक होगा.

भारत चूंकि ‘परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह’ का हस्ताक्षरकर्ता देश नहीं है इसलिए वह परमाणु उर्जा रिएक्टर के निर्माण में सीधे तौर पर भाग नहीं लेगा. लेकिन भारतीय कंपनियां निर्माण, इंस्टालेशन, और अप्रतक्ष उपकरणों की आपूर्ति में हिस्सेदार होंगी.

पृष्ठभूमि

दिसंबर २०१४ में भारत और रूस ने ‘परमाणु उर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोग में बढ़ते सहयोग के लिए सामरिक दृष्टि’ नामक समझौते को कलमबद्ध किया. जिससे भारतीय कंपनियों को अपने उपकरण और सर्विस रूस द्वारा तृतीय विश्व के देशो में डिज़ाइन किये गए संयंत्रों को प्रदान करने का अवसर उपलब्ध हो सके. इसके अलावा भारत ने बांग्लादेश के साथ अप्रैल २०१७ में दो अन्य समझौतों के साथ एक नागरिक परमाणु सहयोग समझौता पर भी हस्ताक्षर किया  हैं जिसके तहत दोनों देश परमाणु उर्जा संयंत्र के लिए उपकरणों की आपूर्ति और और निर्माण कर सकते हैं.

टिप्पणी

बांग्लादेश के साथ परमाणु समझौता भारतीय परमाणु प्रस्थिति को और बढ़त हासिल करने का मौका प्रदान करती है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत बहुत बढ़त हासिल करने में सफल नहीं रहा है क्योंकि १९७४ में पोखरण परीक्षणों के बाद भारत को कड़े प्रतिबंधो का सामना करना पड़ा था. खैर अब तक यह साफ़ नहीं हो सका है की भारत और बांग्लादेश असल में किस तरह के परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाएंगे क्योकि दोनों ही देश ‘परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह’ (NSG) के सदस्य नहीं हैं. (NSG, 48 देशों का एक प्रतिष्ठित समूह है जो परमाणु उर्जा के प्रसार को सीमित और नियंत्रित करता है तथा इसके लिए ऐसे सामान, उपकरण, और तकनीक जो परमाणु हथियार बनाने में सहायक हो सकते हैं, के निर्यात को नियंत्रित करता है.)

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उत्तर प्रदेश पयर्टन नीति-2018 के मुख्य बिंदु

उत्तर प्रदेश सरकार नें पर्यटन की असीम संभावनाओ को मद्देनजर रखते हुए उत्तर प्रदेश पयर्टन नीति-2018 जारी की है. यह पर्यटन नीति पांच साल के लिए लागु की गयी है . इसकी घोषणा उ.प. की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने की है. इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • सालाना 5000 करोड़ रुपये का नया निवेश तथा पांच लाख प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोज़गार के अवसर पैदा करना
  • देश के सबसे अधिक पर्यटकों के आगमन और उनसे प्राप्त राजस्व के रूप में, पर्यटन सर्किट सृजित करने, पर्यटन अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने, रोजगार सृजित करने और पर्यटकों को एक सुखद अनुभव प्रदान करने के माध्यम से उत्तर प्रदेश को सबसे आकर्षक पर्यटन गंतव्‍य के रूप में स्थापित करने का कार्य
  • पर्यटन विभाग का घरेलू पर्यटकों के आगमन में सालाना 15 प्रतिशत और विदेशी पर्यटकों की संख्या में 10 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य
  • प्रदेश में एक लाख पर्यटकों को राष्ट्रीय पार्क तथा वन्य जीव विहारों कि तरफ आकर्षित करना
  • 10 हेरिटेज भवनो को प्रतिवर्ष हेरिटेज होटलों में परिवर्तित करना
  • पर्यटन लैंड बैंक का सृजन करना
  • ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने का विशेष प्रयास करना
  • स्थानीय उद्यमिता को मेलों और पर्वों के माध्यम से आकर्षित करना

ज्ञातव्य है कि पर्यटन में 10 लाख रुपये के निवेश से 90 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। उत्तर प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र की सभी गतिविधियों को उद्योग का दर्जा दिया गया है।

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