आपदा प्रबंधन

भारत और एशियाई विकास बैंक ने असम के लिए 60 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किये

भारत सरकार ने एशियाई विकास बैंक के साथ असम के 60 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस राशि का उपयोग असम में ब्रह्मपुत्र नदी के साथ बाढ़ से जोखिम बचाव प्रबंधन तथा पुनर्निर्माण इत्यादि के लिए किया जायेगा। इसका उद्देश्य असम में बाढ़ तथा नदी तट अपरदन जोखिम प्रबंधन प्रणाली  को प्रभावशाली तथा भरोसेमंद बनाना है। इस ऋण की अवधि 20 वर्ष है, इसका ग्रेस पीरियड 5 वर्ष है।

मुख्य बिंदु

वर्ष 2010 में एशियाई विकास बैंक ने असम एकीकृत बाढ़ व नदी तथा अपरदन जोखिम प्रबंधन निवेश कार्यक्रम के लिए दो किश्तों में 120 मिलियन डॉलर के ऋण को मंज़ूरी प्रदान की थी। इस कार्यक्रम के प्रोजेक्ट 2 से तीन सब-प्रोजेक्ट्स – पलास्बरी गुमी, काजीरंगा तथा डिब्रूगढ़ में बाढ़ से बचाव के लिए बाड़बंदी की जायेगी।

इन प्रोजेक्ट्स का क्रियान्वयन असम बाढ़ व नदी अपरदन प्रबंधन एजेंसी तथा असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत आपदा प्रबंधन के पूर्वानुमान के लिए आपदा प्रबंधन प्रणाली को मज़बूत बनाया जायेगा।

ब्रह्मपुत्र नदी

इस नदी का उद्गम तिब्बत में मानसरोवर झील से होता है, तिब्बत में इस नदी को यारलुंग सांग्पो के नाम से जाना जाता है। यह नदी चीन, भारत और बांग्लादेश में बहती है। चीन में इसे यारलुंग सांग्पो, भारत में ब्रह्मपुत्र, बांग्लादेश में गंगा में मिलने से फेल इसे जमुना कहा जाता है, जबकि बंगाल की खाड़ी में गिरते समय  इसे मेघना कहा जाता है।

एशियाई विकास बैंक

एडीबी एक क्षेत्रीय विकास बैंक है जिसका उद्देश्य एशिया में सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इसकी स्थापना दिसंबर 1966 में की गयी थी। इसका मुख्यालय मनीला (फिलीपींस) में स्थित है। इसके कुल 67 सदस्य हैं, जिनमें से 48 एशिया और प्रशांत क्षेत्र जबकि बाकी 19 अन्य क्षेत्र के हैं। एडीबी का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ऋण, तकनीकी सहायता, अनुदान और इक्विटी निवेश प्रदान करके अपने सदस्यों और भागीदारों की सहायता करना है।

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विश्व सुनामी जागरूकता दिवस : 5 नवम्बर

5 नवम्बर को प्रतिवर्ष विश्व सुनामी जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसका उद्देश्य विश्व भर में सुनामी के बारे में जागरूकता फैलाना है। यह विश्व सुनामी जागरूकता दिवस का तीसरा संस्करण है, इस दिवस की स्थापना 2015 में की गयी थी। इसके द्वारा विश्व भर में सुनामी के खतरे के बारे में जागरूकता फैलाना है। इस दिवस पर सुनामी की पूर्व चेतावनी प्रणाली के महत्व पर बल दिया जाता है।

मुख्य बिंदु

विश्व सुनामी जागरूकता दिवस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसम्बर 2015 में प्रस्ताव पारित करके की गयी थी। इस प्रस्ताव को जापान द्वारा मार्च 2015 में सेंडाई (जापान) में तीसरे आपदा निम्नीकरण सम्मेलन के बाद प्रस्तुत किया गया था।

सुनामी

सुनामी समुद्र की बड़ी लहरें होती हैं जो समुद्र के तट में हलचल के कारण उत्पन्न होती हैं। यह घटनाएँ आमतौर पर ज्वालामुखी उद्गार तथा भूकंप के कारण होती हैं। सुनामी एक जापानी शब्द है, सु का अर्थ बंदरगाह तथा नामी का अर्थ लहर होता है। इसके अतिरिक्त जलमग्न भूस्खलन, तटीय चट्टानों तथा बाह्य टकराव के कारण भी सुनामी उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि अन्य आपदाओं की भाँती सुनामी का अनुमान लगाना मुश्किल है, परन्तु भूकंपीय गतिविधियों की सहायता से सुनामी का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

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ओडिशा तटीय आपदा चेतावनी प्रणाली : प्रमुख तथ्य

ओडिशा सरकार ने हाल ही में नागरिकों को चक्रवात, सुनामी तथा बाढ़ इत्यादि की चेतावनी के लिए एक प्रणाली को लांच किया है।

मुख्य बिंदु

  • यह “शीघ्र चेतावनी प्रसारण प्रणाली” क्षेत्र में भारत में इस प्रकार की पहली प्रणाली है।
  • इस चेतावनी प्रणाली को विश्व बैंक की सहायता से 82 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित किया जा रहा है।
  • आपातकालीन स्थिति में ध्वनि तथा साईरन के लिए ओडिशा की 480 किलोमीटर लम्बी तटरेखा के साथ 122 टावर लगाए गये हैं।
  • इस टावर से निकलने वाली चेतावनी ध्वनि 1.5 किलोमीटर के दायरे में सुनी जा सकती है।
  • आपातकालीन स्थिति में भुबनेश्वर में राज्य आपातकालीन केंद्र में बटन दबाया जाएगा।
  • इस सिस्टम के तहत बालासोर, भद्रक, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, पुरी तथा गंजम को कवर किया गया है।
  • यह राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम निम्नीकरण परियोजना का हिस्सा है, इसकी सहायता से चक्रवातों से लोगों की रक्षा की जा सकेगी।
  • यह सिस्टम ओडिशा के मछुआरों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा।

ओडिशा में आपदाएं

ओडिशा में कई आपदाएं जैसे चक्रवात, तूफ़ान तथा सुनामी इत्यादि का जोखिम है, ओडिशा का बहुत बड़ा भाग भूकंप जोखिम जोन-II में आता है। ओडिशा में 1999 में सुपर-साइक्लोन के कारण लगभग 10,000 लोगों की मृत्यु हुई थी। 2013 में ओडिशा के तट पर फाइलिन चक्रवात, 2014 में हुदहुद चक्रवात टकराया था। हाल ही में ओडिशा में “तितली” नामक चक्रवात आया था।

आपदा का सामना करने के लिए ओडिशा की तैयारी

  1. ओडिशा में 1999 में ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना की गयी थी, यह भारत में स्थापित किया गया पहला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण केंद्र था।
  2. ओडिशा में एक सक्रीय राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण है।
  3. चक्रवात से पीड़ित क्षेत्रों में ओडिशा ने 800 से अधिक बहुउद्देशीय आश्रय स्थलों का निर्माण करवाया है।
  4. ओडिशा से सभी जोखिमग्रस्त क्षेत्रों में सक्रीय चक्रवात प्रबंधन केंद्र हैं।
  5. ओडिशा आपदा त्वरित अनुक्रिया बल (ODRAF) निरंतर आपदा से निपटने के लिए कौशल लोगों तथा अधोसंरचना के विकास पर कार्य कर रहा है। आपदा का सामना करने के लिए ओडिशा की तैयारी काफी पुख्ता है।

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