एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी

स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में पहली बार हवा में ही भरा गया इंधन

भारतीय वायुसेना ने हाल ही स्वदेशी एयरक्राफ्ट तेजस में हवा में ही सफलतापूर्वक इंधन भरने का कारनामा किया। तेजस MK 1 ने IL-78 MKI टैंकर द्वारा हवा में इंधन भरा गया। इसके साथ ही भारत उन चुनिन्दा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास हवा में सैन्य एयरक्राफ्ट में इंधन भरने की तकनीक है।

मुख्य बिंदु

इस दौरान हवा में  20,000 फीट की ऊंचाई पर IL-78 टैंकर से तेजस में 1900 किलोग्राम इंधन भरा गया। इस टैंकर एयरक्राफ्ट को आगरा से लांच किया गया था, जबकि तेजस एयरक्राफ्ट को ग्वालियर से लांच किया गया था। IL-78 टैंकर में विंग कमांडर सिद्धार्थ सिंह सवार थे। हवा में इंधन भरने की प्रक्रिया की निगरानी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा ग्वालियर में ग्राउंड स्टेशन से की गयी।

महत्व

हवा में इंधन भरने की प्रक्रिया के साथ तेजस ‘युद्ध के लिए तैयार’ के टैग प्राप्त करने  के निकट पहुँच गया है, इसे फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस कहा जाता है। हवा में इंधन भरने की क्षमता के कारण तेजस लम्बे समय तक उड़ान भर सकता है, इससे तेजस की क्षमता और रेंज में काफी वृद्धि होगी।

पृष्ठभूमि

भारतीय वायुसेना में वर्तमान समय में 9 तेजस युद्धक विमान कार्यरत्त हैं, इनका निर्माण हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। यह तेजस विमान स्क्वाड्रन नंबर 45 में फ्लाइंग डैगर्स में शामिल हैं। इसका बेस तमिलनाडु के सुलुर एयर फ़ोर्स स्टेशन में है। भारतीय वायुसेना ने हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को 123 तेजस विमानों का आर्डर दिया है, इसके लिए 70,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

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