ओडिशा आपदा त्वरित अनुक्रिया बल

ओडिशा तटीय आपदा चेतावनी प्रणाली : प्रमुख तथ्य

ओडिशा सरकार ने हाल ही में नागरिकों को चक्रवात, सुनामी तथा बाढ़ इत्यादि की चेतावनी के लिए एक प्रणाली को लांच किया है।

मुख्य बिंदु

  • यह “शीघ्र चेतावनी प्रसारण प्रणाली” क्षेत्र में भारत में इस प्रकार की पहली प्रणाली है।
  • इस चेतावनी प्रणाली को विश्व बैंक की सहायता से 82 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित किया जा रहा है।
  • आपातकालीन स्थिति में ध्वनि तथा साईरन के लिए ओडिशा की 480 किलोमीटर लम्बी तटरेखा के साथ 122 टावर लगाए गये हैं।
  • इस टावर से निकलने वाली चेतावनी ध्वनि 1.5 किलोमीटर के दायरे में सुनी जा सकती है।
  • आपातकालीन स्थिति में भुबनेश्वर में राज्य आपातकालीन केंद्र में बटन दबाया जाएगा।
  • इस सिस्टम के तहत बालासोर, भद्रक, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, पुरी तथा गंजम को कवर किया गया है।
  • यह राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम निम्नीकरण परियोजना का हिस्सा है, इसकी सहायता से चक्रवातों से लोगों की रक्षा की जा सकेगी।
  • यह सिस्टम ओडिशा के मछुआरों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा।

ओडिशा में आपदाएं

ओडिशा में कई आपदाएं जैसे चक्रवात, तूफ़ान तथा सुनामी इत्यादि का जोखिम है, ओडिशा का बहुत बड़ा भाग भूकंप जोखिम जोन-II में आता है। ओडिशा में 1999 में सुपर-साइक्लोन के कारण लगभग 10,000 लोगों की मृत्यु हुई थी। 2013 में ओडिशा के तट पर फाइलिन चक्रवात, 2014 में हुदहुद चक्रवात टकराया था। हाल ही में ओडिशा में “तितली” नामक चक्रवात आया था।

आपदा का सामना करने के लिए ओडिशा की तैयारी

  1. ओडिशा में 1999 में ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना की गयी थी, यह भारत में स्थापित किया गया पहला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण केंद्र था।
  2. ओडिशा में एक सक्रीय राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण है।
  3. चक्रवात से पीड़ित क्षेत्रों में ओडिशा ने 800 से अधिक बहुउद्देशीय आश्रय स्थलों का निर्माण करवाया है।
  4. ओडिशा से सभी जोखिमग्रस्त क्षेत्रों में सक्रीय चक्रवात प्रबंधन केंद्र हैं।
  5. ओडिशा आपदा त्वरित अनुक्रिया बल (ODRAF) निरंतर आपदा से निपटने के लिए कौशल लोगों तथा अधोसंरचना के विकास पर कार्य कर रहा है। आपदा का सामना करने के लिए ओडिशा की तैयारी काफी पुख्ता है।

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