चीन

चीन में किया गया विश्व के सबसे लम्बे समुद्री पुल का उद्घाटन

चीन में विश्व के सबसे लम्बे समुद्री पुल का उद्घाटन किया गया, इसका उद्घाटन शी जिनपिंग ने किया। इस पुल का नाम हांगकांग-झुहाई-मकाउ ब्रिज है। यह पुल हांगकांग को मकाउ और झुहाई से जोड़ता है। यह विश्व का सबसे लम्बा समुद्री पुल है इस पुल की कुल लम्बाई 39 किलोमीटर है।

मुख्य बिंदु

39 किलोमीटर लम्बे इस पुल का निर्माण 20 अरब डॉलर की लागत से किया गया है। इस पुल में 6 लेन हैं। इसका निर्माण कार्य दिसम्बर, 2009 में शुरू हुआ था। इस पुल का निर्माण कार्य 14 नवम्बर, 2017 को पूरा हुआ था। इस पुल की एक 6.7 किलोमीटर लम्बी सुरंग पानी के नीचे बनायी गयी है। इस पुल के बाद हांगकांग और झुहाई के बीच का यात्रा 30 मिनट में पूरी हो जाएगी, पहले इसके लिए 3 घंटे का समय लगता था। इस पुल पर 24 अक्टूबर, 2018 से आवाजाही शुरू हो जाएगी।

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पाकिस्तान को चीन बेचेगा 48 विंग लूंग II सैन्य ड्रोन

चीन ने पाकिस्तान को 48 विंग लूंग सैन्य ड्रोन बेचने को मंज़ूरी दे दी है। यह आज तक का चीन को किसी भी देश के साथ ड्रोन के निर्यात के लिए किया गया सबसे बड़ा सौदा है। इस सौदे की राशि की जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गयी है। इन 48 ड्रोन विमानों का निर्माण चीन की चेंग्दू एयरक्राफ्ट कॉर्प तथा पाकिस्तान एयरोनॉटिकल काम्प्लेक्स द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। चीन ने पहले मानवरहित ड्रोन को पहले संयुक्त अरब अमीरात और मिस्त्र को 1 मिलियन डॉलर प्रति ड्रोन की दर से बेचा है। जबकि चीन विंग लूंग I को इंडोनेशिया, कजाखस्तान तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को बीच चुका है।

विंग लूंग II

यह आधुनिक मानवरहित ड्रोन है, इसमें हवा से ज़मीन पर मार कर सकने वाले हथियार इस्तेमाल किये जा सकते हैं। इस निर्माण चेंग्दू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रियल (ग्रुप) कंपनी द्वारा किया जाता है। इस ड्रोन ने फरवरी, 2017 में अपनी पहली उड़ान भरी थी, यह विंग लूंग I मानव रहित ड्रोन का अपग्रेडेड संस्करण है।

इस ड्रोन का उपयोग जासूसी तथा हमला करने के कार्य के लिए किया जा सकता है, इसकी लम्बाई 11 मीटर है, इसके पंखों की लम्बाई 20.5 मीटर है। इसकी पेलोड क्षमता 480 किलोग्राम है। इसमें 12 लेज़र गाइडेड मिसाइलें अथवा YJ-9E युद्धपोत रोधी मिसाइलें इस्तेमाल की जा सकती हैं। यह ड्रोन 20 घंटे तक 150-370 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ान भर सकता है। इस अधिकतम 9000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है। यह ड्रोन स्थिर तथा चलनशील लक्ष्य को ध्वस्त करने की क्षमता कर सकता है। परन्तु अमेरिका के MQ-1 प्रिडेटर और MQ-9 रीपर ड्रोन तकनीकी रूप से इस चीनी ड्रोन से काफी बेहतर है।

चीन-पाकिस्तान रक्षा सम्बन्ध

चीन पाकिस्तान सेना का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है। 2013-17 की अवधि में पाकिस्तान की 70% रक्षा खरीद चीन से ही की गयी है, इस दौरान इसमें पिछले 5 वर्षों की तुलना में 45% की वृद्धि हुई है। चीन और पाकिस्तान ने JF-थंडर एयरक्राफ्ट के संयुक्त रूप से निर्माण करने पर भी सहमती प्रकट की है। पाकिस्तान ने 2015 में ‘बुराक’ नाम ड्रोन का निर्माण किया गया, यह ड्रोन चीन के मध्यम रेंज के CH-3 ड्रोन सिस्टम पर आधारित था।

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चीन ने अफ्रीका के लिए 60 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता देने की प्रतिबद्धता ज़ाहिर की

चीन ने अफ्रीका में गरीबी उन्मूलन, भूखमरी समाप्त करने, सुरक्षा व उद्योग को सशक्त करने के लिए 60 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है। इसकी घोषणा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तीसरे चीन-अफ्रीका सहयोग फोरम (FOCAC) के उद्घाटन के दौरान की।

FOCAC चीन और अफ्रीका महाद्वीप के सभी देशों (एस्वतिनी को छोड़कर) के बीच आधिकारिक फोरम है। इसकी शुरुआत वर्ष 2000 में बीजिंग में मिनिस्टीरियल कांफ्रेंस के रूप में हुई थी, तत्पश्चात इसका आयोजन प्रत्येक तीन वर्ष चीन व अफ्रीका में बारी-बारी से किया जाता है।

मुख्य बिंदु

प्रमुख क्षेत्र : इस फोरम में फंडिंग के लिए आठ प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है,यह क्षेत्र उर्जा, परिवहन, दूरसंचार तथा जल संसाधनों का इष्टतम उपयोग इत्यादि हैं। आने वाले समय में चीन इन क्षेत्रों में अफ्रीका में कार्य करेगा।

आर्थिक व व्यापारिक सहयोग : चीन, अफ्रीका में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक व व्यापारिक सहयोग जोन की स्थापना करेगा। इससे स्थानीय मुद्रा में भी भुगतान को बढ़ावा मिलेगा। इससे अफ्रीका में 2030 तक खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयास किया जायेगा।

सुरक्षा : अफ्रीका में सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए चीन शान्ति व सुरक्षा फण्ड स्थापित करेगा। इसमें साहेल क्षेत्र के देशों तथा अदेन की खाड़ी व गिनी की खाड़ी के निकट के देशों की सहायता की जाएगी, यह देश समुद्री लुटेरों से काफी प्रभावित हैं। इसके अलावा चीन अफ्रीकन यूनियन को सैन्य सहायता भी उपलब्ध करवाएगा। चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत 50 चीन-अफ्रीका सुरक्षा सहायता प्रोग्राम लांच किये जायेंगे। चीन जिबूती में नौसैनिक अड्डा पहले ही स्थापित कर चुका है।

पर्यावरण सुरक्षा : अफ्रीका में पर्यावरण प्रबंधन, प्रदूषण रोकथाम व नियंत्रण तथा हरित क्षेत्र के विकास के लिए चीन अफ्रीका ग्रीन एन्वोय प्रोग्राम लांच किया जायेगा। पर्यावरण सहयोग के लिए एक अनुसन्धान केंद्र भी स्थापित किया जायेगा।

वित्तीय मैकेनिज्म : अफ्रीका की वित्तीय सहायता के लिए एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB), न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) तथा सिल्क रोड फण्ड की सहायता ली जाएगी। 60 अरब डॉलर में से 15 अरब डॉलर ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दिए जायेंगे, जबकि 20 अरब डॉलर क्रेडिट लाइन के रूप में दिए जायेंगे। 10 अरब डॉलर चीन-अफ्रीका विकास के लिए विशेष फण्ड में उपयोग किये जायेंगे तथा अफ्रीकी आयातों के लिए 5 अरब डॉलर का विशेष फण्ड स्थापित किया जायेगा।

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