नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने सिख गुरु गोबिंद सिंह पर जारी किया स्मारक सिक्का व स्टैम्प

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह जी की 350वीं जयंती पर स्मारक सिक्का व स्टैम्प जारी किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने खालसा के द्वारा देश को एकजुट करने के लिए गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रयासों की सराहना की।

मुख्य बिंदु

गुरु गोबिंद सिंह जी की स्मृति में 350 रुपये का सिक्का जारी किया गया है, इस सिक्के का भार 35 ग्राम है। यह सिक्का 50% चांदी, 40% ताम्बे तथा 5-5% निकल और जिंक से बना हुआ है। इस सिक्के के आगे के भाग पर रुपये का चिन्ह तथा “350” रुपये लिखा हुआ है । इस सिक्के के पाशर्व हिस्से पर तख़्त श्री हरमिंदर जी पटना साहिब का चित्र अंकित है।

गुरु गोबिंद सिंह

गुरु गोबिंद सिंह जी सिख धर्म के 10वें तथा अंतिम गुरु थे। वे 1675 में अपने पिता गुरु तेग बहादुर की शहादत के बाद 6 वर्ष की आयु में गुरु बने थे।

गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना तथा गुरु ग्रन्थ साहिब के द्वारा सिख धर्म को वर्तमान आकार में ढाला। गुरु गोबिंद सिंह के दो पुत्र युद्ध में शहीद हुए जबकि दो की हत्या मुग़ल सेना द्वारा की गयी। उनका निधन 1708 में हुआ था।

खालसा पंथ

गुरु गोबिंद सिंह के पिता गुरु तेग बहादुर की शहादत के बाद उन्होंने घोषणा की कि वे एक ऐसे पंथ की स्थापना करेंगे जो दमनकारी शासकों का मुकाबला करेगा तथा न्याय, समानता व शान्ति की स्थापना करेगा। इसके पश्चात् खालसा पंथ की स्थापना हुई। उन्होंने 5 “क” : केश, कंघा, कड़ा, किरपान तथा कच्छा की शुरुआत की।

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केन्द्रीय कैबिनेट ने जापान के साथ करेंसी स्वैप के समझौते को मंज़ूरी दी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जापान के साथ 75 अरब डॉलर के करेंसी स्वैप समझौते को मंज़ूरी दे दी है। यह समझौते भारत-जापान आर्थिक संबंधों में एक मील का पत्थर है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक व सामरिक सहयोग में वृद्धि होगी।

करेंसी स्वैप समझौता (मुद्रा विनिमय) क्या है?

करेंसी स्वैप समझौता एक विदेशी विनिमय समझौता है यह दो पक्षों के बीच में एक मुद्रा के बदले दूसरी मुद्रा के लिए एक निश्चित समय तक के लिए किया जाता है।

यह समझौता भारत के लिए किस प्रकार लाभदायक है?

  • करेंसी स्वैप (मुद्रा विनिमय) से भारत को आयात का भुगतान करने में आसानी होगी। इससे अवमूल्यन की समस्या भी दूर हो जाएगी।
  • चूंकि मुद्रा विनिमय में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार किया जाता है। दोनों देशों आयात व निर्यात के लिए अपनी मुद्राओं से भुगतान करते हैं। इससे तीसरे पक्ष की मुद्रा की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा मुद्रा विनिमय पर व्यय नहीं करना पड़ता।
  • मुद्रा विनिमय से तरलता को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
  • मुश्किल समय के लिए मुद्रा विनिमय काफी उपयोगी होता है।
  • मुद्रा विनिमय से देश का भुगतान शेष भी स्थिर होता है।

इस मुद्रा विनिमय समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच पिछले वर्ष अक्टूबर में सहमती बनी थी।

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प्रधानमंत्री मोदी ने महाराज सुहेलदेव की स्मृति में जारी की स्टैम्प

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाराज सुहेलदेव की स्मृति में एक स्टैम्प जारी की। उन्होंने महाराज सुहेलदेव को बहादुर योद्धा बताया, जो लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि केंद्र सरकार उन सभी लोगों की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिन्होंने भारत की रक्षा में योगदान दिया है।

महाराज सुहेल देव

महाराज सुहेलदेव का सन्दर्भ कल्पना व इतिहास की सीमा के निकट पाया जाता है। उनके नाम के बारे में इतिहासकार एकमत नहीं हैं, उन्हें साकारदेव, सुहिराध्वज, सुह्रिद्ली, सुहरीदल-धज, राय सुहरिद देव, सुसज, सुहरदल इत्यादि नामों से जाना जाता है।

फ़ारसी पुस्तक मिरात-ए-मसूदी में उनके बारे में जानकारी मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि महाराज सुहेलदेव ने गजनी के जनरल गाजी सईद सलार मसूद को 11वीं शताब्दी में बहराइच में पराजित किया था।

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