भारतीय रिज़र्व बैंक

भारतीय रिज़र्व बैंक ने गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम में बदलाव किये

भारतीय रिज़र्व बैंक ने हाल ही में गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम में कुछ एक बदलाव किये हैं। इसके पश्चात् धर्मार्थ संस्थान, सरकारी संस्थाएं तथा राज्य सरकारें भी गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत सोना जमा कर सकती हैं।

अब गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत भारत के निवासी (व्यक्ति, संयुक्त हिन्दू परिवार) प्रोप्रिएटरशिप व पार्टनरशिप फर्म, म्यूच्यूअल फंड्स/एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स समेत ट्रस्ट इत्यादि, कंपनियां, धर्मार्थ संस्थान, सरकारी संस्थाएं तथा राज्य सरकारें सोना जमा कर सकती हैं।

इस योजना के दायरे को क्यों बढ़ाया गया?

  • इससे धर्मार्थ संस्थानों का बेहिसाब सोना बाहर आएगा।
  • सरकारी एजेंसियां जब्त किये गये सोने को जमा कर सकती हैं।

गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम

गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम को केंद्र सरकार ने लांच किया गया था। इस योजना का दोहरा फायदा है, सोने पर ब्याज प्राप्त किया जा सकता है तथा मैच्योरिटी पर सोने को एनकैश किया जा सकता है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अतिरिक्त अन्य सभी अनुसूचित बैंक इस योजना का क्रियान्वयन कर सकते हैं।

इस योजना के तहत तीन अवधियों के लिए सोना जमा किया जा सकता है:

लघु काल : 1 से 3 वर्ष

मध्यम काल : 5 से 7 वर्ष

दीर्घकाल : 12 से 15 वर्ष

लघुकाल में जमा दर सम्बंधित बैंक द्वारा निश्चित की जाती है, जबकि मध्यम कालीन व दीघकालीन जमा की ब्याज दर केंद्र सरकार द्वारा निश्चित की जाती है।

इस योजना के तहत सोने की न्यूनतम मात्रा 30 ग्राम है, इसमें सोना जमा करने की मात्रा की कोई उपरी सीमा नहीं है। इस योजना से प्राप्त होने वाले पूँजी लाभ को पूँजी लाभ कर, सम्पदा कर तथा आय कर से मुक्त रखा गया है।

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डिजिटल भुगतान तंत्र को मज़बूत करने के लिए RBI ने किया निलेकणी पैनल का गठन

भारतीय रिज़र्व बैंक ने नन्दन निलेकणी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, यह समिति देश में डिजिटल भुगतान से सम्बंधित सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुझाव देगी।

मुख्य बिंदु

नंदन निलेकणी इस समिति के प्रमुख होंगे, इस समिति के अन्य सदस्य आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर एच.आर. खान, विजया बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ किशोर संसी, आईटी व स्टील मंत्रालय की पूर्व सचिव अरुणा शर्मा तथा चीफ इनोवेशन अफसर, सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप, आईआईएम हैदराबाद, संजय जैन हैं।

सन्दर्भ बिंदु

  • भुगतान के डिजिटलीकरण को बदहवा देना तथा डिजिटलीकरण के द्वारा वित्तीय समावेश को बढ़ावा देना।
  • देश में भुगतान के मौजूदा डिजिटलीकरण की समीक्षा करना तथा इसकी कमियों को चिन्हित करना।
  • वित्तीय समावेश में डिजिटल भुगतान के मौजूदा स्तर का आकलन करना।
  • डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए नये सुझाव देना।
  • डिजिटल माध्यम से वित्तीय सेवा का उपयोग करने के लिए ग्राहकों को भरोसेमंद सेवा प्रदान करने के लिए रोडमैप का सुझाव देना।
  • अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण तथा डिजिटल भुगतान के माध्यम से वित्तीय समावेश को तीव्रता देने के लिए बेस्ट प्रैक्टिसेज का अध्ययन करना।
  • डिजिटल भुगतान के लिए मध्यम कालीन रणनीति का सुझाव देना।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस समिति को बैठक के 90 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।

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सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग के पुनरुत्थान के लिए यू. के. सिन्हा की अध्यक्षता RBI पैनल का गठन किया गया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के पूर्व चेयरमैन यू.के. सिन्हा की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग (MSME)) के वित्तीय स्थिति को दीर्घकाल में मज़बूत बनाने के लिए सुझाव देगी।

मुख्य बिंदु

वस्तु व सेवा कर के क्रियान्वयन तथा विमुद्रीकरण के बाद सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग सेक्टर कुछ दबाव में है। यह पैनल सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग सेक्टर के लिए मौजूदा संस्थागत फ्रेमवर्क की समीक्षा भी करेगा। इसके अतिरिक्त यह पैनल MSME उद्योगों को समय पर वित्तीय सहायता प्राप्त न होने के कारकों का अध्ययन भी करेगा। इस पैनल द्वारा MSME के लिए बनाई गयी नीतियों की समीक्षा में की जायेगी तथा यह पैनल अन्य देशों में MSME उद्योग के लिए क्रियान्वित की जा रही विश्वस्तरीय नीतिर्यों का अध्ययन करेगा तथा भारत में इन नीतियों के क्रियान्वयन की सिफारिश करेगा। यह समिति/पैनल जून, 2019 तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केन्द्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है। 1 अप्रैल सन 1935 को इसकी स्थापना रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया अधिनियम, 1934 के अनुसार हुई थी।

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