भारत-जापान सम्बन्ध

भारत और जापान ने किया आपदा नियंत्रण अभ्यास

भारत और जापान के तटरक्षक बालों ने जापान में योकोहामा के तट के निकट आपदा नियंत्रण, खोज व बचाव अभ्यास किया। पिछले वर्ष इस अभ्यास का आयोजन भारत में किया गया था। इस अभ्यास में भारत की ओर से ICGS शौनक नामक पोत से अभ्यास में हिस्सा लिया।

मुख्य बिंदु

ICGS शौनक भारतीय तटरक्षक बल का ऑफशोर पट्रोल वेसल है। इस वेसल की लम्बाई 105 मीटर है। इस वेसल में 2 ट्विन-इंजन लाइट हेलीकाप्टर, पांच हाई स्पीड बोट्स ले जाई जा सकती है, यह खोज व बचाव कार्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ICGS शौनक में नेविगेशन व संचार उपकरण, सेंसर, 30 mm CRN 91 नेवल गन, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, इंटीग्रेटेड मशीनरी कण्ट्रोल सिस्टम, पॉवर मैनेजमेंट सिस्टम तथा बाह्य अग्नि शमन सिस्टम भी उपलब्ध है।

इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों द्वारा आपदा नियंत्रण में अपने अनुभव तथा कौशल को एक-दूसरे के साथ साझा करना था। जापान में प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप तथा समुद्री तूफ़ान वर्ष भर आते रहते हैं। भारत को 7000 किलोमीटर से अधिक तटरेखा पर कई किस्म की आपदाओं का सामना करना पड़ता है।

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केन्द्रीय कैबिनेट ने जापान के साथ करेंसी स्वैप के समझौते को मंज़ूरी दी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जापान के साथ 75 अरब डॉलर के करेंसी स्वैप समझौते को मंज़ूरी दे दी है। यह समझौते भारत-जापान आर्थिक संबंधों में एक मील का पत्थर है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक व सामरिक सहयोग में वृद्धि होगी।

करेंसी स्वैप समझौता (मुद्रा विनिमय) क्या है?

करेंसी स्वैप समझौता एक विदेशी विनिमय समझौता है यह दो पक्षों के बीच में एक मुद्रा के बदले दूसरी मुद्रा के लिए एक निश्चित समय तक के लिए किया जाता है।

यह समझौता भारत के लिए किस प्रकार लाभदायक है?

  • करेंसी स्वैप (मुद्रा विनिमय) से भारत को आयात का भुगतान करने में आसानी होगी। इससे अवमूल्यन की समस्या भी दूर हो जाएगी।
  • चूंकि मुद्रा विनिमय में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार किया जाता है। दोनों देशों आयात व निर्यात के लिए अपनी मुद्राओं से भुगतान करते हैं। इससे तीसरे पक्ष की मुद्रा की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा मुद्रा विनिमय पर व्यय नहीं करना पड़ता।
  • मुद्रा विनिमय से तरलता को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
  • मुश्किल समय के लिए मुद्रा विनिमय काफी उपयोगी होता है।
  • मुद्रा विनिमय से देश का भुगतान शेष भी स्थिर होता है।

इस मुद्रा विनिमय समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच पिछले वर्ष अक्टूबर में सहमती बनी थी।

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