हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड

वायु सेना में शामिल हुआ भारत में परिवर्तित पहला सुखोई लड़ाकू विमान

हाल ही में भारत में परिवर्तित (overhaul) सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया, इस लड़ाकू विमान को पुणे के वायु सेना बेस में तैनात किया जायेगा।

मुख्य बिंदु

सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान को ओझर के बेस रिपेयर डिपो में भारतीय वायुसेना को सौंपा गया, इसके लिए नासिक के ओझर वायुसेना बेस में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।  एयर मार्शल हेमंत शर्मा (मेंटेनेंस कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ) ने इस विमान को एयर मार्शल एच. एस. अरोड़ा (दक्षिण पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ) को सौंपा। इस एयरक्राफ्ट को पुणे के लोहेगाँव में तैनात किया जायेगा, यहाँ पर सुखोई 30 दो अन्य स्क्वाड्रन – 20 स्क्वाड्रन (अन्य नाम लाइटनिंग्स) तथा 30 स्क्वाड्रन (अन्य नाम राइनोज) भी तैनात है।

सुखोई-30 का विकास रूस ने किया था, भारत में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने ओझर में लाइसेंस के तहत इसका निर्माण किया जाता है। ओझर में इस सुखोई विमान के सभी कल-पुर्जों को खोला गया तथा इसके सभी पुराने पुर्जों को बदला गया। इस एयरक्राफ्ट के सभी हिस्सों की गहनता से जांच की गयी। इस प्रक्रिया को overhaul कहा जाता है, इस प्रक्रिया से विमान लगभग नया जैसा ही बन जाता है और इसकी जीवन अवधि भी काफी अधिक बढ़ जाती है।

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स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में पहली बार हवा में ही भरा गया इंधन

भारतीय वायुसेना ने हाल ही स्वदेशी एयरक्राफ्ट तेजस में हवा में ही सफलतापूर्वक इंधन भरने का कारनामा किया। तेजस MK 1 ने IL-78 MKI टैंकर द्वारा हवा में इंधन भरा गया। इसके साथ ही भारत उन चुनिन्दा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास हवा में सैन्य एयरक्राफ्ट में इंधन भरने की तकनीक है।

मुख्य बिंदु

इस दौरान हवा में  20,000 फीट की ऊंचाई पर IL-78 टैंकर से तेजस में 1900 किलोग्राम इंधन भरा गया। इस टैंकर एयरक्राफ्ट को आगरा से लांच किया गया था, जबकि तेजस एयरक्राफ्ट को ग्वालियर से लांच किया गया था। IL-78 टैंकर में विंग कमांडर सिद्धार्थ सिंह सवार थे। हवा में इंधन भरने की प्रक्रिया की निगरानी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा ग्वालियर में ग्राउंड स्टेशन से की गयी।

महत्व

हवा में इंधन भरने की प्रक्रिया के साथ तेजस ‘युद्ध के लिए तैयार’ के टैग प्राप्त करने  के निकट पहुँच गया है, इसे फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस कहा जाता है। हवा में इंधन भरने की क्षमता के कारण तेजस लम्बे समय तक उड़ान भर सकता है, इससे तेजस की क्षमता और रेंज में काफी वृद्धि होगी।

पृष्ठभूमि

भारतीय वायुसेना में वर्तमान समय में 9 तेजस युद्धक विमान कार्यरत्त हैं, इनका निर्माण हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। यह तेजस विमान स्क्वाड्रन नंबर 45 में फ्लाइंग डैगर्स में शामिल हैं। इसका बेस तमिलनाडु के सुलुर एयर फ़ोर्स स्टेशन में है। भारतीय वायुसेना ने हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को 123 तेजस विमानों का आर्डर दिया है, इसके लिए 70,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

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हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड बनी TReDS प्लेटफार्म में ट्रांज़ेक्शन करने वाली पहली सरकारी कंपनी

हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र की ऐसी पहली बनी जिसने RXIL TReDS प्लेटफार्म के द्वारा डिजिटल इनवॉइस स्वीकार किया, यह इनवॉइस नासिक की एक MSME नरेंद्र उद्योग द्वारा उपलोड किया गया था। इस ट्रांज़ेक्शन को बैंक ऑफ़ बड़ौदा द्वारा फाइनेंस किया गया था।

RXIL TReDS प्लेटफार्म

TReDS एक इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिज्म है, इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु व माध्यम उद्योगों को वित्तीय प्राप्तियों में सहायता उपलब्ध करवाना है। RXIL भारत का पहला TReDS प्लेटफार्म है, यह जनवरी, 2017 से कार्यरत्त है। इसे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, SIDBI, भारतीय स्टेट बैंक, ICICI बैंक और यस बैंक द्वारा प्रमोट किया जा रहा है। केन्द्रीय सरकारी ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को TReDS प्लेटफार्म ज्वाइन करने के निर्देश दिया है ताकि MSME को पेमेंट्स में सहूलियत है।

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