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पुणे में सड़कों में कार्य करेंगे ट्रैफिक रोबोट्स

पुणे ट्रैफिक विभाग ने ट्रैफिक व्यवस्था को बनाये रखने तथा ट्रैफिक नियमों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ट्रैफिक रोबोट्स को सड़कों पर उतारने की योजना तैयार की है।

रोडियो

पुणे ट्रैफिक विभाग “रोडियो” नाम ट्रैफिक रोबोट को सड़क पर उतारने की तैयारी कर रहा है। यह रोबोट शहर की सड़कों में घूम सकेगा और ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी की भाँती कार्य करेगा। यह रोबोट यात्रियों को ट्रैफिक नियमों के बारे जागरूक करेगा।

रोडियो में 16 इंच की LED स्क्रीन लगी हुई है। इस स्क्रीन पर ट्रैफिक  नियम तथा महत्वपूर्ण सन्देश लिखे होंगे जैसे “हमेशा हेलमेट पहनों” तथा ‘सिग्नल मत तोड़ो” इत्यादि। रोडियो अपने हाथों को हिलाकर वाहनों के लिए स्टॉप सिग्नल दिखा सकता है। रोडियो में साईरन, स्किड स्टीयरिंग व्हील और ऑब्सटैकल डिटेक्शन सेंसर लगे हैं।

यह पूरे देश में इस प्रकार की पहली पहल है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो ट्रैफिक प्रबंधन में काफी आसानी होगी। इस रोबोट का विकास पुणे में  SP रोबोटिक्स मेकर ने किया है।

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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से NPA में वृद्धि: भारतीय रिज़र्व बैंक

भारतीय रिज़र्व बैंक ने सरकार की फ्लैगशिप योजना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के कारण नॉन-परफोर्मिंग एसेट्स में हो रही वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है।

मुख्य बिंदु

  • वित्त वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत 2.46 ट्रिलियन रुपये ऋण के रूप में प्रदान किये गये।
  • इस प्रदत्त राशि में से 40% राशि महिला उद्यमियों को प्रदान की गयी जबकि 33% राशि सामाजिक श्रेणियों में वितरित की गयी।
  • इस योजना से 4.81 करोड़ सूक्ष्म ऋण प्राप्तकर्ता लाभान्वित हो चुके हैं।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत नॉन-परफोर्मिंग एसेट्स बढ़कर 11,000 करोड़ रुपये हो गयी है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को 2015 में लांच किया गया था इसका उद्देश्य नॉन-कॉर्पोरेट, नॉन-फार्म सूक्ष्म/लघु उद्योगों को 10 लाख रुपये का ऋण प्रदान करना है। यह ऋण वाणिज्यिक बैंक,  क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, लघु वित्त बैंक, कोआपरेटिव बैंक, MFI तथा NBFC द्वारा प्रदान किया जाते हैं। इस योजना के तहत तीन प्रकार के ऋण प्रदान किये जाते हैं

  • शिशु : 50,000 रुपये तक
  • किशोर : 50,000 से 5 लाख रुपये के बीच
  • तरुण : 5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच

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केंद्र सरकार ने कंपनी (संशोधन) अध्यादेश, 2019 लागू किया

केंद्र सरकार ने कंपनी (संशोधन) अध्यादेश, 2019 को लागू कर दिया है। हालांकि कंपनी (संशोधन) बिल, 2018 को लोक सभा में पारित कर दिया गया था, परन्तु राज्यसभा में यह बिल लटका हुआ है। इससे पहले नवम्बर में इस अध्यादेश को पारित किया गया था। इस अध्यादेश की मियाद 21 जनवरी को समाप्त हो रही थी। इसलिए केंद्र सरकार ने पुनः इस अधिनियम को लागू कर दिया।

मुख्य बिंदु

इस अध्यादेश का उद्देश्य कंपनी अधिनियम के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (NCLT) के कार्यभार को कम करना है। इस अध्यादेश के द्वारा इसके 90% मामलों को NCLT से केन्द्रीय कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय के अधीन क्षेत्रीय कार्यालयों को स्थानांतरित किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार ने कॉर्पोरेट मामले सचिव इंजेती श्रीनिवास की अध्यक्षता में समिति का गठन किया था, इस समिति ने कंपनी अधिनियम के कई बदलाव करने की सिफारिश की थी। इस समिति ने कॉर्पोरेट अपराधों के पुनर्गठन की सिफारिश की थी ताकि न्यायालय में केवल गंभीर अपराधों के मामले ही भेजे जा सकें। इससे NCLT के लंबित पड़े मामलों में कमी आएगी। इसके तहत कंपनी के निर्देशकों की सीमा निश्चित करने की सिफारिश भी की गयी है।

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