पर्यावरण एवं पारिस्थिकी करेंट अफेयर्स

जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया करेगा ओलिव रिडले कछुओं की टैगिंग

जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने ओडिशा में ओलिव रिडले कछुओं को टैग करना शुरू कर दिया है। यह कछुए लुप्तप्राय हैं।

मुख्य बिंदु

जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के वैज्ञानिकों ने बंगाल की खाड़ी के गहरे पानी में तैरते हुए 6 ओलिव रिडले कछुओं को टैग करके उन्हें वापस समुद्र में छोड़ दिया है। ये टैग एल्यूमीनियम से बने होते हैं। जिन छह कछुओं को टैग किया गया उनमें चार मादा और दो नर शामिल थे। वैज्ञानिकों ने इन 6 कछुओं की लंबाई और वजन जैसी बुनियादी जानकारी दर्ज की है।

ZSI के अनुसार, यह उनके आवागमन और प्रवासन मार्ग को जानने के लिए 30,000 कछुओं को टैग करेगा। यह कछुए फरवरी में अंडे देने के लिए रशिकुल्या समुद्र तट पर आएंगे। रुशिकुल्या समुद्र तट कछुओं के लिए सबसे बड़े सामूहिक घोंसले के स्थानों में से एक है। ओडिशा तट के साथ-साथ रशिकुल्या नदी के मुहाने, गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य और देवी नदी के मुहाने सहित बड़े पैमाने पर घोंसले के लिए लाखों लुप्तप्राय कछुए आते हैं।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII)

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने कछुओं के प्रवास के मार्ग को निर्धारित करने के लिए 2007-2010 में एक अध्ययन किया था। डब्ल्यूआईआई के अध्ययन के अनुसार, ओलिव रिडले कछुए, जो तब बड़े पैमाने पर घोंसले के लिए ओडिशा समुद्र तटों पर आए थे, श्रीलंका और यहां तक ​​कि अंडमान द्वीपों के तट पर पाए गए थे।

ओडिशा सरकार ने हाल ही में डब्ल्यूआईआई से समुद्री कछुओं के प्रवास के मार्ग का निर्धारण करने के लिए नए सिरे से अध्ययन करने का अनुरोध किया था।

Month:

तमिलनाडु की सिरुवानी पहाडियों को तितली सुपर-हॉटस्पॉट घोषित किया गया

हाल ही में, तमिलनाडु के कोयम्बटूर जिले में स्थित सिरुवानी पहाड़ियों को तितली सुपर-हॉटस्पॉट के रूप घोषित किया गया। इसकी घोषणा 6 साल के अध्ययन के बाद की गयी है, नेचर एंड बटरफ्लाई सोसाइटी (TNBS) द्वारा 6 वर्ष पहले एक अध्ययन आयोजित किया गया था।

मुख्य बिंदु

इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में पाई जाने वाली तितली प्रजातियों के कारण इस क्षेत्र को तितलियों के सुपर-हॉटस्पॉट के रूप में नामित किया गया है। TNBS के सदस्यों ने मार्च 2015 से दिसंबर 2020 के बीच तमिलनाडु में 325 तितली प्रजातियाँ दर्ज की हैं। इन प्रजातियों में से, 240 प्रजातियाँ केवल सिरुवानी पहाड़ियों में ही पाई जाती हैं। यह अवधि के दौरान पाई जाने वाली कुल प्रजातियों का 74% है।

नेचर एंड बटरफ्लाई सोसाइटी (TNBS) में हॉटस्पॉट के रूप में एक स्थान को परिभाषित करने की एक पद्धति है। इस पद्धति के अनुसार, एक स्थान को हॉटस्पॉट के रूप में तब नामित किया जाता है यदि राज्य की 25% चेकलिस्ट प्रजातियां एक ही क्षेत्र में पाई जाती हैं। टीएनबीएस ने अपनी रिपोर्ट जिला वन अधिकारी डी. वेंकटेश को सौंप दी और सिरुवानी पहाड़ियों को तितली हॉटस्पॉट घोषित करने की सिफारिश की।

सिरुवानी में पाई जाने वाली 240 तितली प्रजातियां तितलियों के छह परिवारों- ब्रश-फूटिड (72), व्हाइट्स और येलो (28), ब्लूज़ (69), स्वॉलोटेल्स (17), स्किपर्स (53) और मेटलमार्क्स (1) से हैं।

Month:

न्यू फ्रूटफ्लाई प्रजाति ‘युफ्रंटा सिरुवानी’ की खोज की गयी

हाल ही में शोधकर्ताओं ने तमिलनाडु में कोयम्बटूर जिले से फ्रूट फ्लाई (एक किस्म का कीट) की एक नई प्रजाति की खोज की है। यह नई प्रजाति पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक हॉटस्पॉट सिरुवानी के पास पाई गई है। जिसके कारण इस प्रजाति का नाम सिरुवानी के नाम पर ‘यूफ्रंटा सिरुवानी’ रखा गया है।

मुख्य बिंदु

शोधकर्ताओं ने सिरुवानी के पास एक गैर-वन क्षेत्र में Tephritidae परिवार  से संबंधित इस फ्रूट फ्लाई की पहचान की। इस शोध पत्र का लेखन यूके के एल. हैनकॉक, के.जे. डेविड और के. सचिन ने राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो बेंगलुरु और अन्नामलाई विश्वविद्यालय से एच. शंकररमन और वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून से सुधीर सिंह ने किया है। यह फ्रूट फ्लाई पंखों पर ‘वी’ आकार के काले बैंड द्वारा यूफ्रंटा की अन्य प्रजातियों से भिन्न है। यह फ्रूट फ्लाई फलों में अंडे देती है। इस प्रजाति के बारे में अधिक जानकारी अभी तक नहीं मिली है।

वर्तमान में जीनस यूफ्रंटा से फ्रूट फ्लाई की 104 प्रजातियां दुनिया भर में पाई जाती हैं। इन 104 प्रजातियों में से 14 भारत में पाई जाती हैं।  इस नई खोज के निष्कर्ष ‘Zootaxa’ जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

फेयरी फ्लाई

फ्रूट फ्लाई के साथ-साथ अन्नामलाई विश्वविद्यालय के एस. मणिकावसगम और शंकरमन ने सिरुवानी क्षेत्र से एक नई फेयरी फ्लाई की प्रजाति की खोज की है। यह प्रजाति Mymaridae परिवार से सम्बंधित है और इसे ‘ओयोमाइमर हयाती’ (Omyomymar Hayati) नाम दिया गया है। इसका नाम एएमयू के प्रो. मोहम्मद हयात के नाम पर  रखा गया है।

Month:

वन प्लेनेट समिट क्या है?

11 जनवरी, 2021 को ‘वन प्लेनेट समिट’ का आयोजन किया गया। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य प्रकृति की सुरक्षा को बढ़ावा देना है।

थीम : “Let’s act together for nature”

वन प्लैनेट समिट

वन प्लैनेट शिखर सम्मेलन एक अंतर्राष्ट्रीय आयोजन है, जिसमें पारिस्थितिकी प्रणालियों की रक्षा के लिए जैव विविधता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। वन प्लैनेट समिट का उद्देश्य विश्वव्यापी पारिस्थितिक परिवर्तन को बढ़ावा देना है। इस शिखर सम्मेलन  नवाचार और अर्थव्यवस्था के साथ संयुक्त पर्यावरण और जलवायु संरक्षण को मापेगा। इस शिखर सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और फ्रांस द्वारा किया जाता है।

ऐतिहासिक पेरिस समझौते के दो साल बाद पहला वन प्लैनेट शिखर सम्मेलन 2017 में आयोजित किया गया था। इसके बाद 12 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को अपनाया गया । वे इस प्रकार हैं:

  • द्वीपीय देशों में चरम घटनाओं पर प्रतिक्रिया
  • जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भूमि और पानी की रक्षा करना
  • जलवायु के लिए काम करने के लिए शोधकर्ताओं और युवाओं को इकठ्ठा करना
  • हरित वित्तपोषण को बढ़ावा
  • शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य
  • डीकार्बनाइज्ड अर्थव्यवस्था की ओर कदम
  • शून्य-प्रदूषण परिवहन
  • पेरिस समझौते के साथ संगत एक कार्बन मूल्य की दिशा में कार्य करना
  • वित्तीय कारक
  • विकास बैंकों की अंतर्राष्ट्रीय लामबंदी
  • संप्रभु निधियों द्वारा प्रतिबद्धता
  • संस्थागत निवेशकों को एकजुट करना

महत्व

COVID-19 ने हमारे दैनिक जीवन और अर्थव्यवस्थाओं के लिए प्रकृति के महत्व को रेखांकित किया है।  वन प्लैनेट समिट मूल्य श्रृंखलाओं, उपभोग की आदतों और व्यापार मॉडल को बदलने में मदद करेगा।

Month:

अफ्रीकी हाथियों का AI आधारित सर्वेक्षण किया जायेगा

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने उपग्रह चित्रों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके अफ्रीकी हाथियों के सर्वेक्षण के लिए एक नया तरीका विकसित किया है।

मुख्य बिंदु

यह विधि अंतरिक्ष में उपग्रह का उपयोग करती है जो पांच हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक छवियों को कैप्चर करने में सक्षम है। बाद में कैप्चर की गई छवियों को गहन शिक्षण मॉडल के माध्यम से संसाधित किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका में हजार से अधिक हाथियों को कवर करने के लिए एक अनुकूलित डेटासेट का उपयोग किया। यह विधि दोहरी गिनती के जोखिम को समाप्त करती है। साथ ही, छोटे अंतराल में रिपीट सर्वे करना भी संभव है।

वर्तमान विधियाँ

हाथियों की गिनती के लिए मैनुअल काउंटिंग और एयरक्रॉफ्ट मौजूदा तरीके हैं। इसमें से हवाई गणना के लिए मानवयुक्त विमान अत्यधिक महंगे हैं। इसके अलावा, ऐसे तरीके खराब दृश्यता से बाधित होते हैं और अत्यधिक चुनौतीपूर्ण होते हैं। अन्य मैनुअल गिनती में गलत गणना हो सकती है।

भारत में हाथी

भारत में हाथियों की आबादी 27,312 है। भारतीय हाथी एशियाई हाथियों की तीन उप-प्रजातियों में से एक हैं।

हाथियों का संरक्षण

1986 में, एशियाई हाथियों को IUCN रेड लिस्ट में “लुप्तप्राय” के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। उन्हें CITES परिशिष्ट I के तहत सूचीबद्ध किया गया है। भारत ने वन्यजीव प्रबंधन प्रयासों के वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए 1992 में ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ लॉन्च किया था। इस परियोजना का उद्देश्य हाथियों के प्राकृतिक आवासों और प्रवास गलियारों की सुरक्षा के द्वारा उनके जीवन को बढ़ाना है।

भारत में हाथी गलियारे

वर्तमान में भारत में 138 हाथी गलियारे हैं। इनमें से 28 अंतरराज्यीय हैं और 17 अंतरराष्ट्रीय राज्य गलियारे हैं। हाथी गलियारे भूमि की संकीर्ण पट्टियाँ हैं जो हाथियों के दो बड़े आवासों को जोड़ती हैं।

Month:

भारतीय मौसम विभाग ने 2020 के दौरान भारत की जलवायु पर वक्तव्य जारी किया

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हाल ही में 2020 के दौरान भारत की जलवायु पर अपना वक्तव्य जारी किया है। IMD के अनुसार, 1901 के बाद से वर्ष 2020 आठवां सबसे अधिक गर्म वर्ष था।

मुख्य बिंदु

  • 1901 के बाद से 15 सबसे गर्म वर्षों में से 12 वर्ष 2006 और 2020 के बीच थे।
  • दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान बारिश सामान्य से अधिक हुई। इसका दीर्घकालिक औसत 109% था (1961 और 2010 के बीच की गणना)।
  • पिछला दशक, रिकॉर्ड पर सबसे गर्म दशक था।
  • उत्तर प्रदेश और बिहार प्रतिकूल मौसम के कारण सबसे अधिक प्रभावित हुए।इन दोनों राज्यों में आंधी-तूफ़ान से 350 से अधिक मौतें हुईं।
  • आंधी-तूफ़ान और आसमानी बिजली के कारण 2020 में 815 मौतें दर्ज की गयी।
  • 2020 में भारत में औसत भूमि सतह का तापमान सामान्य से 29 डिग्री सेल्सियस अधिक था।
  • सर्दियों के दौरान औसत तापमान भी सामान्य से अधिक था।यह सामान्य से अधिक 140 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
  • मॉनसून और मानसून के बाद के मौसमों का औसत तापमान क्रमश: +430 डिग्री सेल्सियस और +0.53 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, वैश्विक औसत सतह तापमान विसंगति को +2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

2020 के दौरान आये चक्रवात

2020 में उत्तर हिंद महासागर में पांच चक्रवात बने थे। वे सुपर साइक्लोनिक स्टॉर्म अम्फान, साइक्लोनिक स्टॉर्म बुरेवी, निसर्ग, निवार और गति थे। इन चक्रवातों में से, निसर्ग और गती अरब सागर के ऊपर और शेष बंगाल की खाड़ी में बने।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग केद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन काम करता है। इसके क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, नागपुर और गुवाहाटी में है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग मलक्का जलडमरूमध्य, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, फारस की खाड़ी सहित उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र की मॉनिटरिंग करता है। यह मुख्य रूप से चक्रवात के निर्माण की निगरानी करता है और इन क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी करता है।

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